फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   MP women judges termination: SC to consider sealed cover report against them

महिला जजों की बर्खास्तगी: तीन दिसंबर को सीलबंद रिपोर्ट पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट, जानें पूरा मामला

Wed, 27 Nov 2024 07:24 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 27 Nov 2024 07:24 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बर्खास्त की गई दो महिला सिविल जजों के खिलाफ एक सीलबंद रिपोर्ट पर तीन दिसंबर को विचार करेगा। इस रिपोर्ट में कथित तौर पर उनके असंतोषजनक प्रदर्शन और अन्य कारणों का विवरण है।

विज्ञापन
MP women judges termination: SC to consider sealed cover report against them
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बर्खास्त की गई दो महिला सिविल जजों के खिलाफ एक सीलबंद रिपोर्ट पर तीन दिसंबर को विचार करेगा। इस रिपोर्ट में कथित तौर पर उनके असंतोषजनक प्रदर्शन और अन्य कारणों का विवरण है। शीर्ष कोर्ट ने पिछले साल 11 नवंबर को इस मामले का संज्ञान लिया था, जब राज्य सरकार ने छह महिला जजों को उनकी कथित असंतोषजनक कार्यप्रणाली के कारण बर्खास्त कर दिया था। 

विज्ञापन


हाईकोर्ट ने महिला जजों की बर्खास्तगी पर किया पुनर्विचार
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने 23 जुलाई 2023 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को यह आदेश दिया था कि वह जजों की बर्खास्तगी पर फिर से विचार करे। इसके बाद, 1 अगस्त 2023 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की पूर्ण अदालत ने अपने फैसले पर पुनर्विचार किया और चार जजों को कुछ शर्तों को फिर से बहाल करने का फैसला लिया। ये चार जज ज्योति वर्गड़े, सोनाक्षी जोशी, प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी थीं। 
विज्ञापन


दो महिला जजों की बर्खास्तगी नहीं की गई रद्द
हालांकि, सरिता चौधरी और अदिति कुमार शर्मा के मामले में पहले के आदेशों को रद्द नहीं किया गया और हाईकोर्ट ने इन दोनों जजों के खिलाफ जानकारी को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सीलबंद रिपोर्ट के रूप में रखने का फैसला लिया। बुधवार को बर्खास्त जजों में से एक का प्रतिनिधित्व कर रहीं वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने सवाल उठाया कि क्या उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई नया सबूत है, जिसे चुनौती दी जा सके। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कोरोना काल में नहीं हो सका जजों के काम का मूल्यांकन
सुप्रीम कोर्ट ने सीलबंद रिपोर्ट की प्रति अमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल को देने का आदेश दिया है। ताकि वे पीठ को रिपोर्ट में मौजूद नए सबूतों के बारे में जानकारी दें सकें। शीर्ष कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस रिपोर्ट को फिलहाल बर्खास्त किए गए जजों के वकीलों के साथ साझा नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा था कि बर्खास्तगी के बावजूद कोरोना महामारी के कारण इन जजों के काम का ठीक से मूल्यांकन नहीं किया जा सका था।  


कार्रवाई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: महिला जज
इस मामले में एक बर्खास्त जज ने कहा कि उनकी बर्खास्तगी बिना किसी उचित प्रक्रिया के की गई थी, जबकि उनका सेवा रिकॉर्ड साफ था और उनके खिलाफ कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनको उनका हक नहीं दिया गया और उनके खिलाफ कार्रवाई संविधान के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मातृत्व और बच्चे के देखभाल के लिए ली गई छुट्टियों को काम के मूल्यांकन में शामिल करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है, क्योंकि यह एक महिला और शिशु का मौलिक अधिकार है। अब सुप्रीम कोर्ट तीन दिसंबर को इस मामले पर सुनवाई करेगा और सीलबंद रिपोर्ट की समीक्षा करेगा। 

संबंधित वीडियो-
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed