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MP: आखिर मामा को क्यों पड़ी 'योगी मॉडल' की जरूरत, यूपी की तर्ज पर मदरसे बंद करने की तैयारी में शिवराज सरकार

Wed, 03 Aug 2022 06:01 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Wed, 03 Aug 2022 06:01 PM IST
सार

शिवराज सिंह चौहान को इस बार बाहर ही नहीं, अंदर से भी चुनौती है। इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार पांडेय कहते हैं कि चौहान मध्य प्रदेश की सत्ता पर अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के समय से जमे हुए है। बतौर मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें करीब 16 साल हो गए है।

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MP: why Shivraj Singh Chauhan need Yogi Model BJP Government preparing to close madrasas on the lines of UP
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश में 2023 में विधानसभा चुनाव होने जा रहे है। ऐसे में सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने अपने चौथे कार्यकाल के आखिरी साल में अपनी रणनीति में बदलाव किया है। चौहान इन दिनों लोकप्रिय से ज्यादा मजबूत सीएम की छवि बनाने में जुटे हुए है। इसके लिए वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रेरणा ले रहे हैं। बुलडोजर मॉडल को अपनाने के बाद शिवराज सरकार अब प्रदेश में गलत तरीके या अवैध रूप से चलने वाले मदरसों पर कार्रवाई के लिए भी योगी सरकार की राह चल पड़ी है।  

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हार्डकोर हिंदुत्व की तरफ बढ़ते शिवराज
दरअसल, उत्तर प्रदेश में भाजपा की दोबारा वापसी के पीछे योगी आदित्यनाथ की बुलडोजर बाबा की छवि का बड़ा योगदान माना जाता है। इसके बाद से ही कई भाजपा शासित राज्यों के मुखिया सख्त छवि को कामयाबी का पर्याय मान रहे हैं, लेकिन शिवराज चौहान को अपनी छवि बदलने की जरूरत क्यों महसूस हुई? इस बारे में प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार ऋषि पांडेय अमर उजाला से चर्चा में कहते है कि 2018 तक शिवराज सिंह चौहान की इमेज सॉफ्ट के साथ न काहू से दोस्ती न काहू से बैर वाले मुख्यमंत्री के तौर पर रही।
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हालांकि, मोदी-शाह के राज में बदली हुई भाजपा में शिवराज सिंह चौहान ने भी अपनी छवि में परिवर्तन किया और ये परिवर्तन इस बार के कार्यकाल में साफ दिखाई दे रहा है। चौहान सॉफ्ट से हार्डकोर छवि में तब्दील होते दिखाई दे रहे है, क्योंकि 2018 के विधानसभा चुनाव में मामूली अंतर से मिली हार के बाद उन्हें भी अपने आप में बदलाव करने की जरुरत महसूस हुई। इसके बाद ही वे साफ्ट के जगह हार्डकोर हिंदुत्व की तरफ बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। खरगोन का मामला हो या फिर भोपाल का मामला चौहान ने पार्टी लाइन के हिसाब से ही सोचा और आगे बढ़ आक्रामक कार्रवाई करते हुए नजर आए। 
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जहां तक योगी के बुलडोजर मॉडल की बात है तो शिवराज सिंह चौहान के दूसरे और तीसरे कार्यकाल में भी बुलडोजर खूब चले है, लेकिन अभी बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की रफ्तार जो बढ़ी है उसके पीछे निश्चित तौर पर यूपी के सीएम योगी की प्रेरणा होगी। योगी आदित्यनाथ की दोबारा जीत से उन्हें लगता है कि बुलडोजर के जरिए वह अपनी इमेज को एक आक्रामक नेता के तौर पर पेश करेंगे तो जनता पसंद करेगी।
 
चौहान को इस बार बाहर ही नहीं, अंदर से भी चुनौती
जहां तक अवैध मदरसे बंद करने की बात है तो यह संघ और भाजपा का एजेंडा है। सरकार इन्हें हर हाल में बंद करके रहेगी, क्योंकि भाजपा जानती है कि मुस्लिम समाज का वोट उन्हें नहीं मिलने वाला है। इसलिए अपने कोर वोट बैंक को एकजुट रखने के लिए वह इस तरह की कार्रवाई समय समय पर करती रहेगी। ताकि उसका वोटबैंक एकजुट रहे। 2018 के चुनाव में जो भटकाव आया था और कांग्रेस पार्टी को जो बढ़त हासिल हुई थी। वह 2023 के चुनाव में नहीं मिले।

शिवराज सिंह चौहान को इस बार बाहर ही नहीं, अंदर से भी चुनौती है? इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार पांडेय कहते हैं कि चौहान मध्य प्रदेश की सत्ता पर अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के समय से जमे हुए है। बतौर मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें करीब 16 साल हो गए है। इस दौरान नेताओं की एक पूरी पीढ़ी नए सीएम का इंतजार करते करते हुए रिटायर होने की कगार पर है। इसके बाद भी वे हर दिन वह एक नए रिकार्ड कायम करते हुए नजर आ रहे है। आज भाजपा और शिवराज दोनों ही जानते है कि जो फेस वैल्यू सीएम के पास है वह उनके मुकाबले अन्य किसी नेता के पास नहीं है। इसलिए उनको अब तक इसका लाभ भी मिल रहा है। सिंधिया को जरुर भाजपा में लाए है लेकिन सिंधिया की स्वीकार्यता पार्टी के अंदर अभी तक बन नहीं पाई है।

मध्य प्रदेश में हैं 7700 से ज्यादा रजिस्टर्ड मदरसे
मध्य प्रदेश सरकार राज्य में गलत तरीके या अवैध रूप से चलने वाले मदरसों पर कार्रवाई शुरू करने जा रही है।  एमपी की पर्यटन, संस्कृति और अध्यात्म मंत्री उषा ठाकुर ने कहा है कि, जो मदरसे नियमों से हिसाब से ठीक नहीं हैं। उन्हें बंद किया जाएगा। प्रदेश के कई ऐसे मदरसे हैं जो सिर्फ कागजों पर चल रहे हैं। साथ ही कुछ ऐसे भी हैं जिनमें एक कमरे में टेबल और बोर्ड लगाकर संचालन किया जा रहा है। सरकार ने गैर मान्यता प्राप्त और कागजों पर चलने वाले फर्जी मदरसों को जल्द बंद कराने का मन बना लिया है और इसमें दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में अभी लगभग 7700 से ज्यादा रजिस्टर्ड मदरसे हैं, लेकिन बाल आयोग द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद दर्जनों मदरसे ऐसे थे। जहां नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था। कई मदरसे नियम के मुताबिक संचालित होते हुए नहीं पाए गए। मध्य प्रदेश मदरसा बोर्ड के अधीन मदरसों की संख्या हजारों में है और इसके साथ ही सरकार द्वारा मदरसों में शिक्षकों को नियुक्ति के आधार पर अनुदान राशि मिलने का भी प्रावधान है।

गौरतलब है कि इससे पहले यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार आने के बाद राज्य में मदरसों को लेकर सख्त फैसले लिए गए थे। जिसके चलते फर्जी और अवैध रूप से चलने वाले मदरसों को बंद करने की कार्रवाई भी शामिल थी।


कांग्रेस ने लगाया टारगेट करने का आरोप
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहना है कि मदरसे अवैध नहीं हैं। जानबूझकर मदरसों को टारगेट किया जा रहा है। जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट गलत है। वो जानबूझ मदरसों को टारगेट कर रहे हैं।

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