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मध्यप्रदेश उपचुनाव : शिवराज बने रहेंगे सरताज, 'गद्दार' व 'आइटम' जैसे जुमले फेल
Tue, 10 Nov 2020 05:02 PM IST
सुरेंद्र जोशी
अमर उजाला न्यूज डेस्क, भोपाल
अमर उजाला न्यूज डेस्क, भोपाल
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 10 Nov 2020 05:02 PM IST
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मध्यप्रदेश उपचुनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर हुए उपचुनाव में जनता ने एक बार पुन: कमल खिलाकर शिवराज का ताज बरकरार रखा है। न प्रदेश कांग्रेस प्रमुख व पूर्व सीएम कमल नाथ कोई कमाल कर पाए न 'गद्दार' व 'आइटम' जैसे कांग्रेस के जुमलों का जनता पर कोई असर हुआ। अब तक के रुझानों में 21 सीटों पर भाजपा तो 6 पर कांग्रेस आगे है। एक सीट पर बसपा बढ़त लिए हुए है।
इमरती के आंसू का दिखा असर
प्रदेश की महिला व बाल विकास मंत्री इमरती देवी के लिए पूर्व सीएम नाथ ने आपत्तिजनक शब्द 'आइटम' का इस्तेमाल किया था। इस पर इमरती देवी के आंसू छलक पड़े थे। मामला चुनाव आयोग तक गया तो नाथ का स्टार प्रचारक का दर्जा छीन गया था। अब जनता ने इमरती के प्रति पुन: समर्थन व्यक्त कर कमलनाथ को जवाब दे दिया है।
सात माह तक गूंजा गद्दार
इसी साल मार्च में जब कांग्रेस की 15 माह पुरानी कमल नाथ सरकार का पतन हुआ तो इसका ठीकरा कांग्रेस के उन 22 बागी विधायकों पर फोड़ा गया, जो अपनी ही पार्टी में उपेक्षा से त्रस्त होकर भाजपा के हो गए थे। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने पूरे सात माह तक इन बागियों को 'गद्दार' का तमगा दिया और उन पर लगातार जुबानी प्रहार किए। इन 22 बागियों में से भी अधिकांश पुन: जीत की ओर हैं। इससे साबित होता है कि कांग्रेस के इस आरोप को भी जनता ने महत्व नहीं दिया।
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भाजपा की थी आक्रामक रणनीति
दरअसल कांग्रेस की ओर से मुख्य रूप से कमल नाथ ही उपचुनाव का किला लड़ा रहे थे। उनकी मदद के लिए न तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने रुचि दिखाई न प्रदेश के सारे कांग्रेस नेता एकजुट होकर मैदान में दिखे, जबकि भाजपा ने केंद्र से लेकर राज्यभर के अपने तमाम नेताओं को मोर्चे पर तैनात किया। स्वयं शिवराज ने अधिकतर उपचुनाव क्षेत्रों के एक से ज्यादा बार दौरे किए। उनके साथ वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी पूरी ताकत झोंकी। सिंधिया पर अपने समर्थक पूर्व विधायकों को जितवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि उनके गढ़ ग्वालियर—चंबल से अब तक प्राप्त रुझानों में भाजपा उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है, लेकिन मोटे तौर पर उन्हें मिली 70 फीसदी कामयाबी को कमतर नहीं आंका जा सकता।
कमल नाथ के नेतृत्व पर उठेंगे सवाल
अब कांग्रेस आलाकमान जब मप्र के उपचुनावों के नतीजों की समीक्षा करेगा तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के प्रदर्शन पर सवाल उठना लाजमी हैं। उनके कुछ अन्य विरोधी भी सवाल उठा सकते हैं। देखना होगा कि जीत के बाद भाजपा राज्य में अपनी सरकार बनवाने व बचाने के लिए सिंधिया को और क्या पारितोषिक देगी और कांग्रेस अपना किला नहीं बचा पाने के लिए किसे मुजरिम ठहराएगी।
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इमरती के आंसू का दिखा असर
प्रदेश की महिला व बाल विकास मंत्री इमरती देवी के लिए पूर्व सीएम नाथ ने आपत्तिजनक शब्द 'आइटम' का इस्तेमाल किया था। इस पर इमरती देवी के आंसू छलक पड़े थे। मामला चुनाव आयोग तक गया तो नाथ का स्टार प्रचारक का दर्जा छीन गया था। अब जनता ने इमरती के प्रति पुन: समर्थन व्यक्त कर कमलनाथ को जवाब दे दिया है।
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सात माह तक गूंजा गद्दार
इसी साल मार्च में जब कांग्रेस की 15 माह पुरानी कमल नाथ सरकार का पतन हुआ तो इसका ठीकरा कांग्रेस के उन 22 बागी विधायकों पर फोड़ा गया, जो अपनी ही पार्टी में उपेक्षा से त्रस्त होकर भाजपा के हो गए थे। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने पूरे सात माह तक इन बागियों को 'गद्दार' का तमगा दिया और उन पर लगातार जुबानी प्रहार किए। इन 22 बागियों में से भी अधिकांश पुन: जीत की ओर हैं। इससे साबित होता है कि कांग्रेस के इस आरोप को भी जनता ने महत्व नहीं दिया।
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भाजपा की थी आक्रामक रणनीति
दरअसल कांग्रेस की ओर से मुख्य रूप से कमल नाथ ही उपचुनाव का किला लड़ा रहे थे। उनकी मदद के लिए न तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने रुचि दिखाई न प्रदेश के सारे कांग्रेस नेता एकजुट होकर मैदान में दिखे, जबकि भाजपा ने केंद्र से लेकर राज्यभर के अपने तमाम नेताओं को मोर्चे पर तैनात किया। स्वयं शिवराज ने अधिकतर उपचुनाव क्षेत्रों के एक से ज्यादा बार दौरे किए। उनके साथ वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी पूरी ताकत झोंकी। सिंधिया पर अपने समर्थक पूर्व विधायकों को जितवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि उनके गढ़ ग्वालियर—चंबल से अब तक प्राप्त रुझानों में भाजपा उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है, लेकिन मोटे तौर पर उन्हें मिली 70 फीसदी कामयाबी को कमतर नहीं आंका जा सकता।
कमल नाथ के नेतृत्व पर उठेंगे सवाल
अब कांग्रेस आलाकमान जब मप्र के उपचुनावों के नतीजों की समीक्षा करेगा तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के प्रदर्शन पर सवाल उठना लाजमी हैं। उनके कुछ अन्य विरोधी भी सवाल उठा सकते हैं। देखना होगा कि जीत के बाद भाजपा राज्य में अपनी सरकार बनवाने व बचाने के लिए सिंधिया को और क्या पारितोषिक देगी और कांग्रेस अपना किला नहीं बचा पाने के लिए किसे मुजरिम ठहराएगी।