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योग दिवस का विरोध करने वाले ‘धर्मनिरपेक्ष ताकतों’ को झेलना पड़ेगा ‘दुष्प्रभाव’
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Tue, 28 Jun 2016 03:57 AM IST
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संघ के मुखपत्र ने कहा, ऐसे लोगों का सियासी सफाया संभव
योग दिवस और इसके प्रचार का विरोध करनेवाले ‘धर्मनिरपेक्ष ताकतों’ को इसका ‘दुष्प्रभाव’ झेलना पड़ेगा। जिसमें उनका राजनीतिक सफाया भी शामिल है। आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में प्रकाशित संपादकीय में इस आशय का जिक्र किया गया है।
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मुखपत्र ने लिखा है कि दुर्भाग्य से जो लोग राजनीतिक रूप से सिर के बल खड़े हैं उन्हें नहीं मालूम कि शीर्षासन विरोध का अप्राकृतिक तरीका है। ऐसा करने से एक निश्चित समय के बाद इसका कई दुष्प्रभाव होता है।
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हठयोग करने वाले धर्मनिरपेक्ष मार्क्सवादी यह समझने को तैयार नहीं हैं कि इसका भाजपा और मोदी से कुछ भी लेना-देना नहीं है। यह पूरी तरह से भारत के लिए है, जिसकी सांस्कृतिक परंपरा में हिंदू अंतर्निहित हैं।
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संपादकीय में लिखा है कि यदि इन धर्मनिरपेक्ष ताकतों ने गलत आसन से इसे मिटाने का प्रयास किया, तो उनके राजनीतिक सफाये के रूप में उन्हें इसका जवाब मिलेगा। जितनी जल्दी वह यह समझ जाएंगे, यह उनके और उनके राजनीतिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा।
ऑर्गनाइजर ने लिखा है कि कुछ लोग जो योग दिवस के बहिष्कार या इसे भारत से समाप्त करने को अपना कर्तव्य समझते हैं, वह इसके दुष्प्रभाव को जाने बिना वैसा आसन कर रहे हैं।
संपादकीय में कहा गया है कि जब दूसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दौरान संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों की इसमें भागीदारी बढ़ी है, तब कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष और मोदी विरोधियों ने इसके खिलाफ शीर्षासन करना पसंद किया। अखबार ने इस ऐतिहासिक दिन के विरोध के लिए नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल का जिक्र किया है।
Published By Rahul Sankrityayan