गुजरात ने उन मामलों में जुर्माना घटाया, जिनमें उसे अधिकार नहीं, मंत्रालय ले रहा कानूनी सलाह

शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली  Updated Thu, 12 Sep 2019 01:38 AM IST
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सार

  • गुजरात सरकार द्वारा जुर्माने को कम करने के फैसले पर कानूनी सलाह ले रही है केंद्र सरकार
  • गुजरात ने कुछ ऐसे जुर्माने की राशि कम कर दी है, जिसका राज्य के पास अधिकार ही नहीं है
  • केंद्र सरकार का मानना है आपस में उलझने से बेहतर है, कानून विशेषज्ञों की राय ले ली जाए

विस्तार

मोटर वाहन कानून 2019 के तहत नियम तोड़ने पर बढ़े जुर्माने को गुजरात सरकार द्वारा कम करने के फैसले पर केंद्र सरकार कानूनी सलाह ले रही है। केंद्र सरकार का मानना है कि संसद द्वारा पारित इस कानून में राज्य सरकार को जिस प्रावधान पर जुर्माना कम या ज्यादा करने का अधिकार है, उससे हट कर गुजरात सरकार ने फैसला लिया है। प्रथम दृष्टया, यह उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है। इसलिए आपस में उलझने से बेहतर है कि इस पर कानून विशेषज्ञों की राय ले ली जाए।
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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि इस मसले पर कानून मंत्रालय से सलाह के लिए चिट्ठी भेज दी गई है। कानून मंत्रालय से मुख्य रूप से दो बातें पूछी गई हैं।
पहला कि मोटर वाहन कानून 2019 के तहत जो जुर्माना संसद ने तय किया है, उसे घटाने का अधिकार राज्य को है या नहीं। इसके अलावा कानून मंत्रालय से यह भी पूछा गया है कि कोई राज्य ऐसा करता है तो केंद्र का संबंधित मंत्रालय या विभाग उस राज्य के खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकता है।
दो तरह के हैं जुर्माने

उक्त अधिकारी ने बताया कि मोटर वाहन कानून के तहत दो तरह के जुर्माने तय किये गए हैं। एक तो जुर्माना वैसा, जिसमें जुर्माना अमुक राशि तक हो सकती है। जैसे धारा 177 के तहत सामान्य जुर्माना पहले अपराध में 500 रुपये तक और दूसरे अपराध में 1500 रुपये तक तय किया गया है।

दूसरे तरह का जुर्माना है एक निश्चित राशि का जुर्माना। जैसे धारा 196 के तहत बिना बीमा कराये मोटर वाहन चलाने पर पहले अपराध में 2000 रुपये और दूसरे अपराध में 4000 रुपये का जुर्माना तय किया गया है।
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राज्यों को है सीमित अधिकार

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