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यूपी-बिहार पर ही क्यों गिर रही 'बिजली', अब तक 300 से ज्यादा मौत, जानें वजह और ऐसे करें बचाव

Tue, 07 Jul 2020 12:14 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Tue, 07 Jul 2020 12:14 PM IST
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more than 300 people died, what are the reason of lightning strikes in UP and Bihar, Bijli kyu girti hai
ये राज्य ज्यादा प्रभावित - फोटो : Amar Ujala

मानसून के काले बादल पूरे देश पर छा चुके हैं। कई राज्यों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इस साल पहले की अपेक्षा मानसून अभी तक सामान्य से अधिक ही रहा है। इसके कारण मौसम सुहाना बन पड़ा है और किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान देखने को मिल रही है। मगर मानसून के काले बादल अपने साथ एक अलग मुसीबत भी लेकर आए हैं। खासतौर से यूपी और बिहार में।बिजली गिरने की वजह से 15 मई के बाद से अब तक सिर्फ यूपी और बिहार में ही 315 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले हफ्ते शनिवार को ही दोनों राज्यों में बिजली गिरने की घटनाओं में कम से कम 49 लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हुए हैं।

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क्या वजह है कि आकाशीय बिजली इन दो राज्यों में ही इतना क्यों कहर बरपा रही है? बिजली आखिर गिरती क्यों है? अब तक देश में इससे कितने लोगों की जान जा चुकी है? कौन से राज्य से इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं? क्या चक्रवात और बारिश की तरह बिजली गिरने की भी भविष्यवाणी करना संभव है? आइए जानते हैं ऐसे कई सवालों के जवाब... 
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हर साल 2 से 3 हजार लोगों की मौत 

  • भारत में हर साल कम से कम 2,000 से 3,000 मौतें आकाशीय बिजली और मूसलाधार बारिश के कारण होती हैं।
  • 2018 में पश्चिम यूपी, राजस्थान और हरियाणा में आकाशीय बिजली से कम से कम 100 लोगों की मौत हुई थी।

इस साल कहर ढा रही बिजली 

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Lighting Strike - फोटो : PTI
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में पिछले डेढ़ महीने में कम से कम 253 और लोग बिजली गिरने से जान गंवा चुके हैं और 49 घायल हुए हैं जिनमें 90 फीसदी लोग यूपी और बिहार से हैं। 
  • उत्तर प्रदेश और बिहार में बिजली गिरने से शनिवार को कम से कम 49 लोगों की मौत हुई।
  • बिहार के सात जिलों में शनिवार को भारी बारिश और गरज के साथ बिजली गिरने से 25 लोगों की जान चली गई।
  • बिहार में शनिवार को 40 से अधिक घायल हो गए। घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। 
  • शुक्रवार को बिहार के विभिन्न जिलों में बिजली गिरने से 15 लोग मारे गए। 
  • बिहार में गुरुवार को आकाशीय बिजली गिरने से 26 लोगों की मौत हुई। 
  • मार्च से लेकर 26 जून तक बिहार में 212 लोगों की मौत हुई।
  • 26 जून को बिहार में सबसे अधिक 96 लोगों की मौत हुई। 
  • बिहार में 30 जून को 11 लोगों की मौत हुई।
  • बिहार में पिछले एक सप्ताह में 170 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। 
  • उत्तर प्रदेश में बिजली गिरने से शनिवार को कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई। 
  • मरने वालों में प्रयागराज के 10, पूर्वांचल के 14 लोग शामिल हैं। जबकि नौ लोग घायल हो गए।

यूपी बिहार में ही ज्यादा कहर क्यों

  • बिहार में एक जून से दो जुलाई तक 66 फीसदी अधिक बारिश हुई।
  • बिहार में 24 जून से एक जुलाई तक 77 फीसदी अधिक वर्षा हुई। 
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसी अवधि में 72 फीसदी अधिक वर्षा हुई।
  • 24 जून से एक जुलाई के बीच 79 फीसदी अधिक बारिश हुई।

किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रही बिजली 

  • मानसून में खरीफ की फसल की बुआई होती है। धान के खेत में पानी ज्यादा होता है और इस वजह से किसानों को एकदम से करंट लग जाता है। 
  • इस समय बिहार और पूर्वी यूपी में धान की रोपाई काफी ज्यादा होती है क्योंकि जून में मानसून आता है। इस कारण पानी की कमी नहीं होती।  
  • धान के खेत में खड़ा पानी बिजली को आकर्षित करता है और उसमें काम कर रहे किसान इसका शिकार हो जाते हैं। 

क्यों गिरती है बिजली

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Lighting Strike - फोटो : PTI
  • वैज्ञानिकों के मुताबिक बिजली गिरने की मुख्य वजह संवहन बादल convective clouds होते हैं। 
  • संवहन बादल वो बादल होते हैं, जो सतह से गर्म हवा के आसमान के ठंडे वातावरण की ओर उठने से बनते हैं। आमतौर पर चक्रवाती परिसंचरण का माहौल बनने से ऐसा होता है। ये बादल सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। 
  • बिजली गिरना बस कुछ और नहीं बल्कि बादलों से करंट का जमीन की ओर पास होना ही है। यूपी-बिहार में अभी सतह काफी गरम है और काफी ज्यादा बारिश हो रही है। गर्म-ठंडे के मेल से ही यहां ज्यादा बिजली गिरने की घटनाएं हो रही हैं। 
इस तरह के बादल हैं 'खतरनाक'
  • बिहार और यूपी में बिजली गिरने की घटनाएं इसलिए ज्यादा हो रही हैं क्योंकि नम हवा मध्य स्तर में और सूखी हवा ऊपरी स्तर में होती है। इस वजह से वातावरण में लंबे आकार वाले बादल बनने लगते हैं। 
  • पूर्वोत्तर भारत में नमी इतनी ज्यादा होती है कि बादलों का कद बढ़ने से पहले ही वो बरस जाते हैं। इस वजह से वहां बिजली गिरने की संभावना कम हो जाती है। 
  • लंबे कद वालों से अक्सर बिजली गिरने और बादल फटने की आशंका ज्यादा रहती है। 
क्या भविष्यवाणी है संभव 
  • भारतीय मौसम विभाग चक्रवात की तरह बिजली गिरने की भी भविष्यवाणी दो से तीन पहले करने की कोशिश में जुटा हुआ है। इसके लिए एक विशेष ग्रुप भी बनाया गया है। 
  • कुछ हद तक इसमें कामयाबी भी मिली है। मौसम विभाग अब तीन घंटे पहले तक बिजली गिरने के स्थानों की भविष्यवाणी कर सकता है। 
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जब बिजली गिरे तो क्या करें

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Rain in Bihar - फोटो : PTI
  • अगर घर से बाहर हैं तो किसी मजबूत छत के नीचे सहारा ले लें। पानी, बिजली के तारों, खंभों, पेड़ या मोबाइल टावर से दूर रहें। 
  • अगर आप खुले में हैं, तो अपने हाथों को कानों पर रख लें ताकि तेज आवाज से कान के परदे न फट जाएं। 
  • अपनी दोनों एड़ियों को जोड़कर जमीन पर पर उकड़ू बैठ जाएं। पास बैठे किसी व्यक्ति का हाथ बिल्कुल न पकड़ें। 
  • छतरी, सरिया या लोहे की किसी चीज से खुद को दूर रखें। पुआल आदि के ढेर से भी दूर रहें, उसमें आग लग सकती है।
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