फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Morbi Bridge Collapse Accident similar to Thailand cave rescue operation News in Hindi

Morbi Bridge Collapse: पुल हादसे ने याद दिलाया दुनिया का सबसे खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन, तब भी भारत ने की थी मदद

Thu, 03 Nov 2022 08:23 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Thu, 03 Nov 2022 08:23 AM IST
सार

मोरबी पुल हादसा और इसके बाद चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन थाईलैंड में चलाए गए सबसे खतरनाक बचाव अभियान की याद दिलाता है। 2018 में हुई इस घटना में भी भारत की मदद से एक गुफा से 12 बच्चों और उनके फुटबाल कोच को सुरक्षित निकाला गया था।

विज्ञापन
Morbi Bridge Collapse Accident similar to Thailand cave rescue operation News in Hindi
मोरबी पुल हादसा - फोटो : PTI

विस्तार

गुजरात का मोरबी पुल हादसा एक ऐसी टीस दे गया है, जिसके जख्म सदियों तक नहीं भुलाए जा सकते। हालांकि, इस हादसे के बाद जिस तरह से बचाव व राहत अभियान चलाया गया, उसने दुनिया को हैरान कर दिया गया है। नदी में 400 लोगों के गिरने के बाद विपरीत परिस्थितियों में भी करीब 177 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि, 135 लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी। 

विज्ञापन


यह हादसा और इसके बाद चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन थाईलैंड में चलाए गए सबसे खतरनाक बचाव अभियान की याद दिलाता है। 2018 में हुई इस घटना में भी भारत की मदद से एक गुफा से 12 बच्चों और उनके फुटबाल कोच को सुरक्षित निकाला गया था। अब मोरबी की मच्छु नदी पर भी कुछ इस तरह का रेस्क्यू ऑपरेशन देखने को मिला। 
विज्ञापन

 

पहले जानें अब तक क्या हुआ?

मोरबी पुल हादसे में करीब 400 लोगों के नदी में गिरने के तुरंत बाद बचाव अभियान चलाया गया। पहले एसडीआरएफ ने मोर्चा संभाला, लेकिन बाद में एनडीआरएफ और तीनों सेनाओं ने बचाव व खोज अभियान शुरू किया। हादसे में करीब 177 लोगों को बाहर निकाला गया। हालांकि, 135 लोगों ने अपनी जान गंवा दी।

विज्ञापन

अभी भी क्यों जारी है बचाव अभियान?

एनडीआरएफ कमांडेंट प्रसन्न कुमार का कहना है कि मच्छु नदी में अभी भी दो शवों के फंसे होने की आशंका है। इन शवों को खोजने के लिए लगातार खोज अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, अब तक सफलता नहीं मिली। नदी में दो शवों को निकालने के लिए करीब 40 नावों के अलावा 125 लोगों की टीम को उतारा गया है। 

विज्ञापन

थाईलैंड की घटना से क्यों हो रही तुलना?

2018 में थाईलैंड की पानी से भरी एक गुफा में 12 बच्चे और उनके फुटबाल कोच फंस गए थे। इनको बाहर निकालने के लिए गुफा से हजारों लीटर पानी बाहर निकाला गया था। इसके बाद उन्हें बचाया जा सका। मोरबी पुल हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। गुजरात वाटर रिसोर्सेज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के डिप्टी इंजीनियर पाटनी कौशिक का कहना है कि हमें नदी के 10 किमी के हिस्से को साफ करने का काम सौंपा गया है। हमारी 20 लोगों को की टीम ने नदी से पानी निकालने के लिए दो बड़े पंप लगाए हैं, जिनकी मदद से अब तक करीब 700,000 लीटर पानी निकाला जा चुका है। 

पानी बाहर निकालने से क्या होगा?

पाटनी कौशिश का कहना है कि नदी में दो शवों को फंसे होने की आशंका है। इन्हें खोजने के लिए नदी के जलस्तर को कम किया जा रहा है। इसके लिए हमने घटनास्थल से करीब 200 मीटर की दूरी पर 50-50 हॉर्स पावर के दो पंप तैनात किए हैं, जिससे हर मिनट 12000 लीटर पानी निकाला जा रहा है। वहीं एनडीआरएफ का कहना है कि अगर एक से दो फीट जलस्तर और कम हो जाएगा तो हमें दो शवों को खोजने में काफी मदद मिलेगी। 
 

सबसे खतरनाक अभियान में क्या थी भारत की भूमिका? 

2018 की घटना में थाईलैंड की गुफा में फंसे बच्चों को निकालना आसान नहीं था। तब थाईलैंड सरकार ने भारत सरकार से भी समर्थन मांगा था। इसके बाद भारत से हैवी केबीएस फ्लडपंप के साथ विशेषज्ञ को थाईलैंड भेजा गया। अगले ही दिन इस पंप का असर दिखना शुरू हो गया था और चार बच्चों पहले दिन गुफा से बाहर निकाल लिया गया था। इसके लिए थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने भारत सरकार का शुक्रिया भी अदा किया था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed