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भारत स्वस्तिक यात्रा: आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली पहुंचे मोरारी बापू बोले- भगवान शिव संपूर्ण सृष्टि के मूलाधार

Mon, 12 Oct 2026 01:02 AM IST
Amit Sharma Amit Sharma
Updated Mon, 12 Oct 2026 01:02 AM IST
सार

मोरारी बापू तमिलनाडु के कन्याकुमारी से उत्तराखंड के केदारनाथ तक 15 दिवसीय भारत स्वस्तिक यात्रा पर हैं। यात्रा के दूसरे दिन मोरारी बापू केरलम में आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली कालडि पहुंचे। उन्होंने कहा कि भगवान शिव संपूर्ण सृष्टि के मूल आधार हैं।

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Morari Bapu Bharat Swastik Yatra Adi Shankaracharya birth Kaladi Keralam Lord Shiva entire creation fundation
मोरारी बापू की भारत स्वास्तिक यात्रा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

15 दिवसीय भारत स्वस्तिक यात्रा के दूसरे दिन रविवार को संत मोरारी बापू केरलम के कालडि पहुंचे। यहां उन्होंने आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली का दर्शन किया जहां वैदिक रीति रिवाज और मंत्रोच्चार के साथ उनका स्वागत सत्कार किया गया। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि भगवान शिव समस्त सृष्टि के मूल आधार हैं। समस्त देवी देवता उनकी आराधना करते हैं और उनसे ही ऊर्जा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि महादेव समस्त शक्तियों के केंद्र हैं और कुछ भी उनकी परिधि से बाहर नहीं है। 

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9000 किमी की भारत स्वस्तिक यात्रा

मोरारी बापू ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अपने अद्भुत ज्ञान से संपूर्ण विश्व और सनातन धर्म की जो अद्भुत सेवा की है, उसके लिए संपूर्ण विश्व समाज हमेशा कालडि का ऋणी रहेगा। दो विशेष ट्रेनों से करीब 900 लोगों के साथ मोरारी बापू 9000 किलोमीटर की भारत स्वस्तिक यात्रा पर निकले हैं। कालडि में यात्रा के दूसरे दिन का पड़ाव था।

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नाम जप पर भ्रम न करें

पूर्णा नदी के तट पर स्थित कालडि में शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन भक्तों को अध्यात्म का रसास्वादन कराते हुए संत मोरारी बापू ने कहा कि लोगों को इस भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए कि वे किस नाम का जाप करें। उन्होंने कहा कि सभी नाम भगवान के ही अलग अलग स्वरूप को प्रतिबिंबित करते हैं, इसलिए किसी भ्रम में पड़े बिना जिसको जो भी नाम प्रिय लगे, उसका जाप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम नाम जप के साथ-साथ महामंत्र भी है और इसका जाप स्वयं महादेव भी करते हैं। उन्होंने कहा कि सहस्र (हजार) नाम लेने से अधिक महत्वपूर्ण है कि लोग सहज नाम (राम) लें।

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कालडि का गहरा अध्यात्मिक महत्त्व

भारत स्वस्तिक यात्रा में कालडि का गहरा अध्यात्मिक अर्थ है। यह यात्रा भारत के विभिन्न क्षेत्रों को साझा अध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के सूत्र में जोड़ने के उद्देश्य से आगे बढ़ रही है। सदियों पूर्व आदि शंकराचार्य द्वारा देशभर में की गई यात्रा भी इसी एकात्म भाव की ऐतिहासिक मिसाल प्रस्तुत करती है। आदि शंकराचार्य इसी भूमि से निकलकर सभी दर्शनों के टकराव को खत्म करते हुए सनातन धर्म की एकता को  पुनर्स्थापित किया।

परंपराएं आज भी जीवंत

पूर्णा (पेरियार) नदी के तट पर स्थित कालडि में शंकराचार्य के बाल्यकाल, उनकी माता आर्याम्बा और उनके प्रारंभिक अध्यात्मिक जीवन से जुड़ी परंपराएं आज भी जीवंत हैं। यह स्थान उनके संन्यास और उस अध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी मान्यताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिसने उन्हें भारत के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाया।

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