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Earth-Moon: 'मूनक्वैक' बताएंगे धरती से चांद का कितना पुराना नाता, खत्म हो रही चंद्रमा की सतह के भीतर की ऊष्मा?

Wed, 23 Aug 2023 07:07 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Wed, 23 Aug 2023 07:07 PM IST
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सार
वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा पर फिलहाल जीवन की संभावना बिल्कुल ना के बराबर है। इसलिए जो भी शोध या मिशन चंद्रमा पर किए जा रहे हैं वह अनसुलझे रहस्य को सुलझाने के साथ-साथ वहां की मिट्टी, ऊर्जा, ऊष्मा को भविष्य के लिहाज से मानव जीवन की बेहतरी के लिए किए जा रहे हैं।
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Moonquake will tell how old is Moon relation with Earth is the heat within the Moon surface going to end
चंद्रमा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जिस तरह धरती पर भूकंप आते हैं ठीक उसी तरह चंद्रमा पर भी "मूनक्वैक" आते हैं। चंद्रमा के यही मूनक्वैक अब मिशन चंद्रयान के माध्यम से यह बताने वाले हैं कि आखिर धरती और चंद्रमा का कितना पुराना नाता है। अगले कुछ घंटे में चंद्रमा पर उतरने वाले लैंडर और रोवर से मिलने वाली जानकारियां दुनिया भर में शोध का विषय बनने वाली हैं कि आखिर चंद्रमा की सतह के भीतर की ऊष्मा क्या वास्तव में कमजोर पड़ती जा रही है। या फिर धरती के गुरूत्वाकर्षण की वजह से चंद्रमा पर धड़ाधड़ मूनक्वैक आ रहे हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि ऐसे और भी कई रहस्य हैं जो चंद्रयान की सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद खुल सकते हैं।


धरती के भूकंपो की तरह चंद्रमा पर भी आ रहे मूनक्वैक
वरिष्ठ वैज्ञानिक संजीव सहजपाल कहते हैं कि मिशन चंद्रयान के तहत चांद के तमाम अनसुलझे रहस्य की खोजबीन की जाएगी। उसमें मूनक्वैक के बारे में भी बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने वाली हैं। उनका कहना है कि वैसे तो चांद पर आने वाले मूनक्वैक की धरती पर आने वाले भूकंप की तीव्रता बहुत ज्यादा नहीं होती है। लेकिन ये मूनक्वैक ऐसे होते हैं जो कि चांद की सतह पर सूरज के रेडिएशन से बहुत कुछ हलचल पैदा करते हैं। वह कहते हैं कि जिस तरीके से धरती पर भूकंप आते हैं उसी तरीके से चंद्रमा पर मूनक्वैक आते हैं। वह कहते हैं कि सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह मिलने वाली है कि क्या चंद्रमा के भीतर मौजूद ऊष्मा अब खत्म हो रही है। क्योंकि जिस तरीके के मूनक्वैक्स लगातार चंद्रमा पर हो रहे हैं उसमें यह एक बड़ा कारण सामने नजर आ रहा है। 


माना यह भी जा रहा है कि चंद्रमा पर धरती की ग्रेविटी की वजह से भी मूनक्वैक आ सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अभी इस विषय पर बहुत सा शोध किया जाना बाकी है। लेकिन मिशन चंद्रयान की सफलतापूर्वक होने वाली लैंडिंग इस रहस्य पर से पर्दा हटाने में बड़ी कामयाबी हासिल कर सकती है। वरिष्ठ वैज्ञानिक अशोक दास का मानना है कि चंद्रमा पर आने वाले मूनक्वैक्स के रहस्य से उठने वाले परदे से धरती और चंद्रमा के बीच के नाते का अहम खुलासा हो सकेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी भी चंद्रमा पर जितना शोध हुआ है वह पर्याप्त नहीं है। यही वजह है कि मिशन चंद्रयान के माध्यम से मिलने वाली जानकारियां पूरी दुनिया के लिए चंद्रमा के तमाम अनसुलझे रहस्य को सुलझाने में न सिर्फ मदद करेंगी बल्कि शोध के और दरवाजे भी खोलेंगी।

फिलहाल चंद्रमा पर नहीं है जीवन की कोई संभावना
वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा पर फिलहाल जीवन की संभावना बिल्कुल ना के बराबर है। इसलिए जो भी शोध या मिशन चंद्रमा पर किए जा रहे हैं वह अनसुलझे रहस्य को सुलझाने के साथ-साथ वहां की मिट्टी, ऊर्जा, ऊष्मा को भविष्य के लिहाज से मानव जीवन की बेहतरी के लिए किए जा रहे हैं। हालांकि अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष एक ऐसा विषय है जहां पर आने वाले हजारों साल तक ऐसे ही शोध होते रहेंगे और हर बार कुछ ना कुछ नया मिलता भी रहेगा। और उसके आधार पर फिर आगे के शोध की तैयारी होती रहेगी।

इसरो के डाटा सेंटर को मिलेगी पल-पल की जानकारी
वैज्ञानिकों का कहना है कि 14 दिनों के भीतर रोवर चांद पर अपने तय रास्ते को न सिर्फ पूरा करेगा बल्कि उसकी पूरी सूचनाएं भी इसरो के डाटा सेंटर को भेजता रहेगा। संजीव सहजपाल का कहना है कि सिर्फ रोवर ही नहीं बल्कि लैंडर के माध्यम से भी सूचनाएं और पूरी तकनीकी जानकारियां मिलती रहेंगी। वह बताते हैं कि लैंडर और रोवर 14 दिनों तक पूरी सक्रियता के साथ हमें सूचनाएं भेजेगा। उनका कहना है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के लिए तैयार किए जाने वाले लैंडर और रोवर के पावर बैकअप की क्षमता 14 दिनों तक सबसे ज्यादा होती है। उसके बाद की सूचनाएं या तो मिलनी बंद हो जाएंगी या उनकी स्पीड ना के बराबर हो जाएगी। हालांकि अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि 14 दिनों के भीतर मिलने वाली सूचनाएं अंतरिक्ष में चांद पर की जाने वाली तमाम संभावनाओं की सबसे महत्वपूर्ण जानकारियां होंगी।
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