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Monsoon Session: वन्यजीव संरक्षण संशोधन विधेयक, 2021 पारित, जीवों को वर्मिन घोषित करने में होगी आसानी

Wed, 03 Aug 2022 07:01 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 03 Aug 2022 07:01 AM IST
सार

केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि वन्य जीवों को वर्मिन (नुकसानदेह व बीमारी फैलाने वाला) घोषित करने के विषय को असंवेदनशीलता से नहीं लिया जा सकता। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक चीफ वार्डन अपने क्षेत्र के हिसाब से इस सबंध में संवेदनशीलता के साथ फैसला ले सकते हैं।

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Monsoon Session Wildlife Protection Amendment Bill, 2021 passed
लोकसभा - फोटो : lok sabha tv

विस्तार

केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को वन्य जीव (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 लोकसभा में पेश किया। उन्होंने कहा कि सरकार की धरती हरी-भरी और सभी जीवों के सह-अस्तित्व में विश्वास रखती है।

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चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि वन्य जीवों को वर्मिन (नुकसानदेह व बीमारी फैलाने वाला) घोषित करने के विषय को असंवेदनशीलता से नहीं लिया जा सकता। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक चीफ वार्डन अपने क्षेत्र के हिसाब से इस सबंध में संवेदनशीलता के साथ फैसला ले सकते हैं। चर्चा के बाद सदस्यों के संशोधनों को अस्वीकृत करते हुए विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। ब्यूरो
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यादव ने कहा, वन्य जीवों, वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर केंद्रित संधि (साइटेस) की विधिक रूपरेखा के तहत एक समिति होनी चाहिए, जो वन्यजीवों से संबंधित पदार्थों के आयात और निर्यात को प्रमाणित करे।
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राज्यों का अधिकार कम करने का प्रस्ताव नहीं
वन मंत्री ने बताया, विधेयक में 1972 के कानून में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है, ताकि जीवों एवं प्रजातियों के संरक्षण की व्यवस्था को युक्तिसंगत बनाने एवं बेहतर देखरेख सुनिश्चित करने का प्रावधान किया जा सकें। विधेयक को पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया गया था। 25 दिसंबर को इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन पर संसदीय स्थायी समिति को भेजा था। विधेयक में जीवित प्राणियों की बेहतर देखरेख तथा जीवित हाथियों के परिवहन संबंधी प्रावधान हैं। इसके साथ ही यादव ने साफ किया कि विधेयक में राज्यों के अधिकार कम करने का कोई प्रस्ताव या प्रावधान नहीं है।  

  • आदिवासियों से नहीं छिनेगा पानी का अधिकार : विधेयक में प्रावधान शामिल किया गया है कि राष्ट्रीय अभयारण्य घोषित करते समय आदिवासियों और वहां रहने वाले परंपरागत समुदायों को तुरंत विस्थापन को नहीं कहा जाए तथा जब तक विस्थापन पूरा नहीं हो जाता, उनके पानी आदि के अधिकार संरक्षित रहें।
  • दुनिया में वन्यजीव संरक्षण में सबसे आगे : आज भारत में 65,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हाथियों के लिए है। दुनिया के 75% बाघ, 60% हाथी, 100% एशियाई शेर हमारे देश में हैं। हम दुनिया में सबसे अच्छे तरीके से वन और वन्यजीवों का संरक्षण करते हैं।
  •  विपक्ष ने पूर्व सरकारों को सराहा : विधेयक पर बहस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रद्युत बारदोलोई ने वन्य जीवों के संरक्षण में पूर्व सरकारों, खासतौर पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने अगरवुड के बढ़े पैमाने पर इस्तेमाल के बावजूद असम को लाभ नहीं मिलने का मुद्दा उठाया, साथ ही सरकार से हाथियों की बिक्री और खरीद को प्रोत्साहित नहीं किए जाने पर जोर देने की संसदीय पैनल की सिफारिशों को अपनाने का भी आग्रह किया।
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