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Monsoon 2022: मानसून की दस्तक से देश में घटी बिजली की मांग, जून में दर्ज की गई 12.5 फीसदी की कमी

Thu, 23 Jun 2022 02:01 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 23 Jun 2022 02:01 PM IST
सार

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसूनी बारिश का दौर देश के मध्य और उत्तरी हिस्से में आगे बढ़ने का सिलसिला जारी है। 21 जून तक भारत में बारिश की कमी 21 जून तक सामान्य से महज दो फीसदी कम रह गई है। ऐसा इस महीने के शुरुआती के 15 दिन में हुआ है...

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Monsoon 2022: demand for electricity in the country decreased due to monsoon, 12.5 percent reduction was recorded in June
बारिश - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

देशभर के कई राज्यों में मानसून की शुरुआत होते ही जून माह में बिजली की मांग में गिरावट देखी गई है। सोमवार तक बिजली की मांग में 12.5 फीसदी की कमी देखी गई है। जबकि यही मांग कुछ दिनों पहले तक रिकॉर्ड 210 गीगावॉट तक पहुंच गई थी। इस मांग के पीछे बढ़ती गर्मी के साथ औद्योगिक गतिविधियां शुरू होना महत्वपूर्ण वजह थी।  

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घटी कोयले की मांग

देश के कई हिस्सों में गर्म हवा और तापमान बढ़ने के कारण कई राज्यों में बिजली की मांग तेज हो गई थी। बढ़ती कोयले की मांग और समय से आपूर्ति नहीं होने के कारण राज्यों को बिजली कटौती का सहारा लेना पड़ा। इसके कारण स्थिति पर काबू पाया जा सका था, लेकिन अब मानसून की दस्तक देने के बाद स्थिति में सुधार नजर आ रहा है। कई राज्यों में बारिश होने लगी है। लेकिन पनबिजली उत्पादन को गति पकड़ना अभी बाकी है, जिससे बिजली आपूर्ति बास्केट में इसकी हिस्सेदारी बढ़ सके। पिछले 20 दिन से पनबिजली आपूर्ति 45 से 50 करोड़ यूनिट रही है।

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दक्षिण पश्चिम मानसून सामान्य से 43 फीसदी ऊपर

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसूनी बारिश का दौर देश के मध्य और उत्तरी हिस्से में आगे बढ़ने का सिलसिला जारी है। 21 जून तक भारत में बारिश की कमी 21 जून तक सामान्य से महज दो फीसदी कम रह गई है। ऐसा इस महीने के शुरुआती के 15 दिन में हुआ है। माह की शुरुआत तक सामान्य से 40 फीसदी कम बारिश हुई थी। मानसून की शुरुआत में यह डर था कि बारिश के कारण देश के कुछ हिस्सों में खरीफ की फसल प्रभावित हो सकती है। लेकिन पिछले कुछ दिन से बारिश बहुत तेजी से घाटे की भरपाई कर रही है और ऐसे में खरीफ की बुआई की रफ्तार पकड़ सकती है। मानसून में पिछले 10 दिन में सुस्ती की प्रमुख वजह पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश है जो सामान्य से 43 फीसदी अधिक रही है। दक्षिण पश्चिम मानसून सामान्य से 43 फीसदी ऊपर रहा है।

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मानसून के पहले पड़ने वाली बौछारों से मध्य व उत्तर भारत के इलाकों में बारिश में आई कुल कमी का अंतर घटाने में मदद मिली है। बहरहाल अगर आगे की स्थिति देखें तो भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि अगले 24 घंटे में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में अच्छी बारिश की संभावना है और इससे बारिश में आई कमी की भरपाई हो सकेगी। वहीं अगले पांच दिन में मध्यप्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ में गरज चमक के साथ बारिश की संभावना है।

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