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बाबुल सुप्रियो: ममता को क्रूर महिला बुलाया, जेल को टीएमसी का अगला दफ्तर बताया, भाजपा में इन विवादों से जुड़ा नाम
Sun, 19 Sep 2021 06:24 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 19 Sep 2021 06:24 PM IST
सार
बंगाल चुनाव में हार मिलने के बाद बाबुल सुप्रियो ने फेसबुक पोस्ट में कहा था कि बंगाल के लोगों ने एक क्रूर महिला की भ्रष्ट, अक्षम, बेइमान सरकार को चुनकर ऐतिहासिक गलती की है। लेकिन अब वे खुद टीएमसी का हिस्सा बन गए।
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भाजपा में बाबुल सुप्रियो का राजनीतिक सफर।
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटाए जाने के बाद हफ्तों तक कभी नरम तो कभी गरम तेवर दिखाने वाले भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थामकर लोगों को चौंका दिया। दरअसल, आसनसोल संसदीय सीट से दो बार के सांसद सुप्रियो लंबे समय से बंगाल में टीएमसी के धुर-विरोधी नेता रहे हैं। 2014 में पहली बार सांसद बनने के बाद से उन्होंने राज्य की टीएमसी सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरने का जो सिलसिला शुरू किया था, वह इस बंगाल विधानसभा चुनाव तक चला। लेकिन बीते कुछ महीनों में उनके रुख में आए बदलाव का नतीजा अब देखने को मिला है।
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किन-किन विवादित घटनाओं से जुड़ा नाम?
बंगाल की राजनीति में बाबुल सुप्रियो का नाम बड़ी जीत दर्ज करने वाले नेता के साथ विवादित बयान देने वालों में भी शामिल हो गया। इसी साल बंगाल चुनाव से पहले उनका नाम विवादों से तब जुड़ा था, जब उन्होंने कोलकाता स्थित भाजपा कार्यालय में एक आदमी को कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी जमकर वायरल हुआ था, हालांकि तब सुप्रियो ने कहा था कि उन्होंने सिर्फ थप्पड़ मारने का दिखावा किया था।
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2019 में भी बाबुल सुप्रियो का जाधवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों की तरफ से जमकर विरोध हुआ था। सुप्रियो यहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए थे। हालांकि, यहां उनका घेराव किया गया और उन्हें काले झंडे दिखाए गए। इस दौरान सुप्रियो को कुछ छात्रों के साथ भिड़ते हुए भी दिखाया गया था। उन्होंने दावा किया था कि छात्रों ने उनके बाल खींचकर उन्हें घूंसे और लातों से मारा।
2018 में केंद्रीय मंत्री रहते हुए बाबुल सुप्रियो ने आसनसोल में कार्यक्रम के दौरान एक शख्स को पैर तोड़ने की धमकी तक दे डाली थी। यह घटना भी कैमरे में कैद हुई थी। जिस कार्यक्रम में सुप्रियो ने यह बयान दिया था, वह दिव्यांगों के लिए रखा गया था। 2018 मार्च में जब सुप्रियो भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच हुए दंगों की जगह पर जा रहे थे, तब उन पर पुलिस से भिड़ने के आरोप लगे थे। आरोप है कि तब भाजपा सांसद ने तृणमूल कार्यकर्ताओं को खाल खींच लेने की धमकी दी थी।
क्या-क्या रहे विवादित बयान?
बाबुल सुप्रियो ने सांसद रहते हुए कई विवादित बयान भी दिए, जिन पर जमकर हंगामा हुआ। खासकर पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान। चुनाव के पहले उन्होंने ट्वीट्स के जरिए ममता सरकार पर निशाना साधा। एक मौके पर तो उन्होंने अपने ट्वीट में ममता बनर्जी का मीम शेयर किया था। इसमें ममता को खुद को बंगाल की बेटी बताते दिखाया गया था और जवाब में अमित शाह के सामने लिखा था, "बेटियां पराया धन होती हैं, इस बार विदा कर देंगे।" बाबुल सुप्रियो ने इसी मीम पर लिखा, "कर ही देंगे विदा।" उनके इस ट्वीट को लेकर टीएमसी से लेकर दूसीर पार्टियों ने भी उनकी जमकर आलोचना की थी।
इस साल की शुरुआत में भी बाबुल सुप्रियो तब विवादों में आए थे, जब उन्होंने कह दिया था कि तृणमूल कांग्रेस के सभी नेता आने वाले दिनों में जेल भेजे जाएंगे। नीली और सफेद अलीपुर सेंट्रल जेल तृणमूल कांग्रेस का अगला दफ्तर होगा। सुप्रियो का यह बयान टीएमसी के युवा नेता विनय मिश्रा के खिलाफ सीबीआई के छापों के बाद आया था। मिश्रा पर यह छापे गौ-तस्करी और अवैध खनन के मामले में डाल गए थे।
बाबुल सुप्रियो ने एक मौके पर कहा था कि ममता बनर्जी ने बंगाल को गलत गतिविधियों का गढ़ बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी तुष्टीकरण की राजनीति कर आग से खेल रही हैं। सुप्रियो ने यह बयान ऐसे समय दिया था, जब एनआईए ने बंगाल के मुर्शिदाबाद में अल-कायदा के कुछ आरोपियों को पकड़ा था। भाजपा नेता ने कहा था कि इस बात पर कोई आश्चर्य नहीं है कि अल-कायदा के 7 में से छह आतंकी बंगाल से पकड़े गए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने बंगाल को हर तरह की गलत गतिविधियों का गढ़ बना दिया है।
बंगाल चुनाव में भाजपा को हार मिलने के बाद भी बाबुल सुप्रियो ने अपनी खटास जाहिर की थी और फेसबुक पोस्ट में कहा था कि बंगाल के लोगों ने एक क्रूर महिला की भ्रष्ट, अक्षम, बेइमान सरकार को चुनकर ऐतिहासिक गलती की है। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि वे न तो ममता बनर्जी को बंगाल में जीत के लिए बधाई देना चाहते हैं, न ही लोगों के फैसले का सम्मान करने जैसी कोई बात कहेंगे। उन्होंने कहा था कि बंगाल के लोगों ने भाजपा को मौका न देकर बड़ी गलती की थी।