असम एनआरसी से फिर गायब है पूर्व सैन्य अधिकारी सनाउल्लाह का नाम
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भारतीय सेना से जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) के पद से सेवानिवृत्त होने वाले मोहम्मद सनाउल्लाह का नाम एनआरसी की अंतिम सूची में फिर से शामिल नहीं हुआ है। उन्हें इसी साल विदेशी न्यायाधिकरण ने विदेशी घोषित किया था। एक बार फिर उनका नाम एनआरसी सूची से बाहर है। उनके तीन बच्चों- दो बेटियां और एक बेटे का नाम सूची में शामिल नहीं है लेकिन उनकी पत्नी को भारतीय नागरिक माना गया है।
शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एनआरसी की अंतिम सूची जारी कर दी है। 19 लाख से ज्यादा लोगों के नाम सूची से बाहर हैं। यह लोग अब विदेशी न्यायाधिकरण में अपनी नागरिकता के लिए अपील करेंगे। उनके पास अपील करने के लिए केवल 120 दिन हैं। 31 दिसंबर, 2019 अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि है। वहीं यह लोग उच्च न्यायालय से लेकर उच्चतम न्यायालय तक जा सकते हैं।
सूची में नाम शामिल न होने पर सनाउल्लाह ने कहा, 'मैं सूची में अपना नाम शामिल होने की अपेक्षा नहीं कर रहा था क्योंकि मेरा मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। मेरी न्यायालय पर पूरी आस्था है और मुझे पूरा विश्वास है कि मुझे इंसाफ मिलेगा।'
मोहम्मद सनाउल्लाह ने कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया था और उन्हें राष्ट्रपति पदक मिल चुका है। उन्हें कामरूप की विदेशी न्यायाधिकरण विदेशी घोषित कर चुकी है। उनके खिलाफ 2008 में मामला दर्ज किया था और उनके नाम को डी श्रेणी यानी संदिग्ध) मतदाता के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। मई में उन्हें डिटेंशन सेंटर में भेजा गया था। गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने बाद में उन्हें जमानत दे दी।
सनाउल्लाह को 2008 में मिला था नागरिकता साबित करने का नोटिस
उच्च न्यायालय ने विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) के उस आदेश को खारिज नहीं किया है जिसमें सनाउल्लाह को विदेशी घोषित किया गया था। अदालत का कहना है कि याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी। चूंकि सनाउल्लाह को विदेशी घोषित किया गया है और एफटी के आदेश के खिलाफ उनकी अपील गुवाहाटी उच्च न्यायालय में लंबित है इसी कारण न तो उनका और न ही उनके बच्चों के नाम अंतिम सूची में शामिल हैं।
एनआरसी के प्रावधानों के अनुसार जिन लोगों को एफटी ने विदेशी घोषित किया है उनके या उनके बच्चों के नाम एनआरसी की अंतिम सूची में शामिल नहीं हो सकते हैं। 52 साल के सनाउल्लाह भारतीय सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। 1987 में वह सेना में शामिल हुए थे। असम सरकार के अधिकारी चंद्रमल दास ने एक जांच रिपोर्ट तैयार की थी जिसने सनाउल्ला को विदेशी करार दिया था।
दास की जांच रिपोर्ट के आधार पर सनाउल्लाह को 2008 में अपनी नागरिकता साबित करने के लिए नोटिस दिया गया था। वह 2018 में एफटी के समक्ष पेश हुए जहां से उन्हें 23 मई को विदेशी घोषित कर दिया गया। इसके बाद उन्हें गोपालपारा में स्थित डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया था। हालांकि सनाउल्लाह के डिटेंशन सेंटर में जाने की खबर पता चलने पर दास जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं उन्होंने कहा कि अपनी रिपोर्ट में जिस शख्स को उन्होंने मजदूर करार देते हुए बांग्लादेश में जन्मा बताया था वह डिटेंशन सेंटर में भेजा गया व्यक्ति नहीं है।
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