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कच्चे तेल की कीमतों पर बरसे PM मोदी, खाड़ी देशों को जिम्मेदारी का पढ़ाया पाठ

Wed, 11 Apr 2018 08:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 11 Apr 2018 08:52 PM IST
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Modi slams Gulf Countries for Crude Oil price hike

कच्चे तेल के उत्पादक देशों को आड़े हाथ लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कच्चे तेल की कीमतें तर्कसंगत और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसकी कीमतों में बनावटी तेजी लाने की कोशिश बेहद घातक है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा मंच की 16वीं बैठक को बुधवार को यहां संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में बनावटी तेजी लाने की कोशिश यदा-कदा दिखती रहती है, जो बेहद घातक है। 

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कच्चे तेल की कीमतें तर्कसंगत व जिम्मेदार ढंग से तय हों : मोदी

70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है कच्चे तेल की कीमत


तेल उत्पादक देशों को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि कच्चा तेल खरीदने वाले देश, यानी उपभोक्ता देशों की वजह से ही इस बाजार का विस्तार हो रहा है। यदि उत्पादक देश इसकी कीमत सही तरीके से तय करते हैं, तो यह उत्पादक और उपभोक्ता, दोनों देशों के हित में होगा। उल्लेखनीय है कि इस बैठक में कच्चा तेल उत्पादक देशों के संगठन (ओपेक) का महत्वपूर्ण सदस्य सऊदी अरब भी उपस्थित था।  
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कीमतों में बनावटी तेजी लाने की कोशिश है घातक, सही कीमतों से उत्पादक व उपभोक्ता दोनों को फायदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बयान ऐसे समय दिया है, जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है और घरेलू बाजार में डीजल की कीमत ऐतिहासिक उच्च स्तर पर है। पेट्रोल की प्रति लीटर कीमत भी 73-74 रुपये प्रति लीटर के आसपास चल रही है, जो बीते चार साल का सर्वाधिक स्तर है। 

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ऊर्जा के साधन सस्ते व स्वच्छ हों 

Modi slams Gulf Countries for Crude Oil price hike

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गरीबों के लिए ऊर्जा के साधन सस्ते तो होने ही चाहिए, उसका स्वच्छ होना भी बहुत जरूरी है। इसके साथ ही इनकी निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित करनी होगी। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा भारत की विकास दर के अनुमान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जहां विकास दर बढ़ी है, वहीं महंगाई की दर भी काबू में रहती है। लेकिन विकास की प्रमुख जरूरत ऊर्जा है और जब भारत तेज गति से विकास करेगा, तो यहां ऊर्जा की मांग भी सबसे ज्यादा होगी।  

ऊर्जा खपत 4.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी 

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले 25 सालों तक भारत में ऊर्जा की खपत 4.5 फीसदी की सालाना दर से बढ़ेगी। देश मे ऊर्जा के भविष्य को लेकर उनका नजरिया चार खंभों पर टिका है। ये हैं ऊर्जा तक पहुंच (एनर्जी एक्सेस), ऊर्जा की उपयोगिता (एनर्जी इफिशियंसी), ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति (एनर्जी सस्टेनेबिलिटी) और ऊर्जा सुरक्षा (एनर्जी सिक्योरिटी)। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ऊर्जा के एकीकरण में ही नहीं, बल्कि देश के सभी निवासियों तक ऊर्जा के साधन पहुंचाने की सोच में विश्वास रखती है और इसी दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।  

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