बोला चीनी मीडिया, नोटबंदी फेल, छाती ठोकना बंद करें मोदी
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चीन के सरकारी मीडिया ने पीएम नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के कदम को असफल करार दिया है। ग्लोबल टाइम्स की खबर के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था में 93.5 फीसदी बैन की गई पुरानी करेंसी आ गई है। पीएम मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का एलान करते हुए अनुमान लगाया था कि बैन किए गए नोटों में से 20 फीसदी करेंसी वापस बैंकों में नहीं आएगी।
चीन के सरकारी अखबार की वेबसाइट ने लिखा है कि भारत में जनता को अब भी 24 घंटे बिजली उपलब्ध नहीं है। डिजिटल इंडिया का सपना देख रहे देश में ज्यादातर दुकानों पर अभी ग्राहकों से लेन-देन लिए स्वैप मशीनें नहीं हैं।
सवा सौ करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले देश में महज 34 फीसदी जनता तक इंटरनेट की पहुंच है। इंटरनेट के मामले में अल्पसंख्यकों की हालत तो और भी बुरी है। ग्लोबल बैंकिंग के 2015 के एक अध्ययन के मुताबिक विश्व बैंक ने इस बात का खुलासा किया है कि केवल 53 फीसदी बालिग भारतीयों के पास बैंक खाते हैं। 43 फीसदी बैंक खाते निष्क्रिय हैं।
बैंकों ने किया भ्रष्टाचार
रिपोर्ट में कहा गया है कि तमाम आधारभूत सुविधाएं न होते हुए कैसे भारत रात भर में जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर को जुटा लेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी के फैसले से भ्रष्टाचार में इजाफा हुआ है। नोटबंदी के समानांतर पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों को नए नोटों से गैरकानूनी तरीके से बदलने और खातों में जमा करने का काम बैंकों ने किया। इसके लिए 30 से 40 फीसदी तक कमीशन लिया गया। बैंक कर्मचारियों ने ऐसा करके बहुत बड़ी मात्रा में धन निष्क्रिय खातों में डाल दिया और कई राजनीतिक दलों को फायदा पहुंचाया।
हर राजनीतिक दल इस फिराक में रहा कि वह कारोबारियों का कालाधन चंदे के रूप में बदलकर सफेद कर सके। इसके लिए 30-40 फीसदी कमीशनखोरी की बात कही गई और वादा किया गया कि कारोबारियों को इसके एवज में नए नोट दिलाए जाएंगे।
पीएम मोदी पर करार प्रहार करते हुए लिखा गया है कि वह ईमानदारी की बात करते हैं और जनता के बीच फैला भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करते हैं, लेकिन उनकी पार्टी के ही नेताओं ने 2015 में सुप्रीम कोर्ट में राजनीतिक पार्टियों को सूचना का अधिकार कानून के दायरे में लाने के खिलाफ हलफनामा दायर किया।
अपनी छाती ठोकना बंद करें मोदी
पीएम मोदी ने यह कहते हुए 500 और 1000 के नोटों को बैन किया कि देश में बड़े नोटों की वजह से भ्रष्टाचार बड़ी मात्रा में फैल रहा है, लेकिन नोटबंदी के बाद पहले से भी बड़ा यानी 2000 रुपये का नोट लाया गया। 2000 रुपये का नोट जारी करने के पीछे भारत सरकार कोई भी सही तर्क देने में नाकाम रही।
ऑल इंडिया मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन की तरफ से किए गए एक अध्यय में पता चला कि नोटंबदी से तीन लाख से ज्यादा सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों को घाटा हुआ। विनिर्माण और निर्यात से जुड़े इन उद्योगों पर नोटबंदी का असर यह हुआ कि करीब 35 फीसदी नौकरियां चली गईं और करीब 50 फीसदी आय का नुकसान हो गया।
नोटबंदी का मतलब ऐसा रहा, जैसा कि बेघर आदमी से महाने भर में मंगल ग्रह पर घर दिलाने का वादा किया गया हो। दुर्भाग्यवश सच्चाई यह है कि नोटबंदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक दशक पीछे भेज दिया है। नौकरियां गईं। हर शख्स और उद्योग को खर्च में कटौती करनी पड़ी। बैंकों की लाइनों में घंटों बुजुर्गों को खड़े रहने की मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी, यही नहीं, कईयों की तो मौत हो गई। रिपोर्ट में अंत में कहा गया कि पीएम मोदी को नोटबंदी को लेकर अपनी छाती ठोकना बंद कर देना चाहिए।