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Digital Competition Bill: 'संविधान के अनुसार हों डिजिटल प्रतिस्पर्धा कानून जैसे विधेयक', जस्टिस कोहली का बयान

Wed, 17 Jul 2024 09:38 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Wed, 17 Jul 2024 09:38 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश हिमा कोहली ने कहा कि इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में भारत, विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है। देश में  88 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, जिन्हें डिजिटल बाजार में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 

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Modern bills like proposed digital competition law must conform to Constitution: SC judge Kohli
न्यायमूर्ति हिमा कोहली - फोटो : ANI

विस्तार

देश की सर्वोच्च अदालत की न्यायाधीश हिमा कोहली ने संविधान को किसी भी कानून का आधार बताया है। उन्होंने यह टिप्पणी प्रस्तावित डिजिटल प्रतिस्पर्धा विधेयक, 2024 को लेकर की। न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने कहा कि डिजिटल प्रतिस्पर्धा विधेयक, 2024 जैसे नए कानून 'जांच और संतुलन' के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुसार होने चाहिए। न्यायमूर्ति कोहली ने अपने संबोधन में कहा,’भारत में संविधान ही किसी भी कानून का आधार है। आधुनिक कानूनों को भी 'जांच और संतुलन' के संवैधानिक सिद्धांतों के मुताबिक होना चाहिए।’

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डिजिटल बाजार में कई तरह की समस्याएं 
न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में भारत, विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है। देश में  88 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, जिन्हें डिजिटल बाजार में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 
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न्यायमूर्ति कोहली ने गिनाईं ये समस्याएं 
न्यायमूर्ति कोहली ने आगे कहा कि डिजिटल प्रतिस्पर्धा विधेयक (डीसीबी) को लेकर जल्द ही मंत्रालयों के बीच परामर्श प्रक्रिया शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि मंत्रालयों को डिजिटल बाजार की समस्याओं के निपटारे पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘डीसीबी का असर विभिन्न प्रकार के क्षेत्रों में पड़ सकता है। इनमें उपयोगकर्ता अनुभव, डेटा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, निवेश, व्यावसायिक लागत जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। मंत्रालयों के बीच परामर्श को अंतिम रूप देने से पहले, सभी पक्षों की समस्याओं का सावधानीपूर्वक निपटारा आवश्यक है।’ 
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न्यायमूर्ति ने इन तर्कों पर भी दिया जोर
न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने इस दौरान डीसीबी की तुलना यूरोपीय संघ के डिजिटल बाजार अधिनियम के साथ भी की। उन्होंने कहा कि डिजिटल बाजार की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना ही डीसीबी का उद्देश्य होना चाहिए। न्यायाधीश ने कहा कि डीसीबी के समर्थकों का तर्क है कि इससे नवाचार बढ़ेगा लेकिन, आलोचकों ने चेताया है कि इससे डिजिटल बाजार की प्रगति रुक सकती है।

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