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आदर्श चुनाव संहिता हमारी राजनीतिक प्रणाली की सबसे बड़ी उपलब्धि: सीईसी सुनील अरोड़ा
Sun, 11 Aug 2019 05:09 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sun, 11 Aug 2019 05:09 PM IST
सार
- आईआईएम कोलकाता के वार्षिक बिजनेस कॉन्क्लेव में शामिल हुए सीईसी अरोरा
- आदर्श चुनाव आचार संहिता को भारत के राजनीतिक प्रणाली की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया
- सुनील अरोड़ा ने कहा कि सीवीआईजीआईएल ऐप ने नागरिकों को काफी सशक्त बनाया
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सुनील अरोड़ा
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद लागू होने वाली आदर्श चुनाव आचार संहिता को भारत के राजनीतिक प्रणाली की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया जिसे सभी दलों के बीच आम सहमति से तैयार किया गया। अरोड़ा ने शनिवार को आईआईएम कोलकाता के वार्षिक बिजनेस कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि यह स्वैच्छिक संहिता थी जिस पर कई वर्षों में राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग में सहमति बनी।
शहर के दो दिन के दौरे पर आये अरोड़ा ने कहा कि मेरा मानना है कि आदर्श चुनाव संहिता भारत की राजनीतिक प्रणाली की सबसे बड़ी उपलब्धि है, यह एक ऐसा दस्तावेज है जो कि एक आम सहमति से तैयार हुआ है। यह एक स्वैच्छिक संहिता है जिस पर राजनीतिक दलों और भारतीय चुनाव आयोग की सहमति बनी।
आदर्श संहिता यह बताती है कि चुनाव के दौरान क्या करना है और क्या नहीं करना है। राजनीतिक दल, उम्मीदवार और पोलिंग एजेंटों से यह उम्मीद की जाती है कि वे चुनाव की तिथि घोषित होने और पूरी चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने तक नियमों का पालन करें जिससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें।
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उन्होंने आचार संहिता में उल्लेखित नियमों की आलोचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे विकास कार्यों को प्रभावित नहीं करते जैसा बहुत लोग दावा करते हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि जारी परियोजनाओं की आड़ में मुफ्त उपहार नहीं बांटे जाने चाहिए। आयोग को इस पर नजर रखनी होती है।
चुनाव मामलों को प्रभावित करने में सोशल मीडिया की ताकत के बारे में छात्रों द्वारा पूछे गए सवाल पर अरोड़ा ने कहा कि चुनाव में इसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव से दो महीने पहले सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का एक समूह एक स्वैच्छिक आचार संहिता लेकर आया था जिसके बारे में उन्होंने कहा कि वह फेक न्यूज के प्रवाह पर लगाम लगाएगा। उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि उस पर विचार किया गया था या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के नये सीवीआईजीआईएल ऐप ने नागरिकों को काफी सशक्त बनाया है।
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शहर के दो दिन के दौरे पर आये अरोड़ा ने कहा कि मेरा मानना है कि आदर्श चुनाव संहिता भारत की राजनीतिक प्रणाली की सबसे बड़ी उपलब्धि है, यह एक ऐसा दस्तावेज है जो कि एक आम सहमति से तैयार हुआ है। यह एक स्वैच्छिक संहिता है जिस पर राजनीतिक दलों और भारतीय चुनाव आयोग की सहमति बनी।
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आदर्श संहिता यह बताती है कि चुनाव के दौरान क्या करना है और क्या नहीं करना है। राजनीतिक दल, उम्मीदवार और पोलिंग एजेंटों से यह उम्मीद की जाती है कि वे चुनाव की तिथि घोषित होने और पूरी चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने तक नियमों का पालन करें जिससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें।
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उन्होंने आचार संहिता में उल्लेखित नियमों की आलोचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे विकास कार्यों को प्रभावित नहीं करते जैसा बहुत लोग दावा करते हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि जारी परियोजनाओं की आड़ में मुफ्त उपहार नहीं बांटे जाने चाहिए। आयोग को इस पर नजर रखनी होती है।
चुनाव मामलों को प्रभावित करने में सोशल मीडिया की ताकत के बारे में छात्रों द्वारा पूछे गए सवाल पर अरोड़ा ने कहा कि चुनाव में इसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव से दो महीने पहले सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का एक समूह एक स्वैच्छिक आचार संहिता लेकर आया था जिसके बारे में उन्होंने कहा कि वह फेक न्यूज के प्रवाह पर लगाम लगाएगा। उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि उस पर विचार किया गया था या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के नये सीवीआईजीआईएल ऐप ने नागरिकों को काफी सशक्त बनाया है।