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पाकिस्तानी आतंकियों के तीन मददगार, 'मोबाइल टावर, ट्रक और पंक्चर मैकेनिक'

Sun, 22 Nov 2020 09:03 PM IST
गौरव पाण्डेय जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 22 Nov 2020 09:03 PM IST
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Mobile Tower, Truck and Puncture Mechanics are the three biggest aids of Pakistani Terrorists in India
सांकेतिक तस्वीर

पाकिस्तान, जब भारतीय सीमा में आतंकियों की घुसपैठ कराता है तो उस दौरान नियंत्रण रेखा पर फायरिंग करने लगता है। कभी यह फायरिंग घुसपैठ से एक दो दिन पहले भी हो जाती है। इसके बाद जब आतंकियों को भारतीय सीमा में धकेल दिया जाता है तो वहां उन्हें तीन मददगार मिलते हैं। ये तीनों उन्हें तय टारगेट तक पहुंचने में मदद करते हैं। इनमें 'मोबाइल टावर, ट्रक और पंक्चर मैकेनिक' शामिल हैं। यही तीनों अब भारतीय सुरक्षा बलों की चुनौती बन गए हैं। पाकिस्तान ने कई हाई रेंज मोबाइल टावर नियंत्रण रेखा के अपने हिस्से में लगा रखे हैं। 

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इन टावर की मदद से पाकिस्तानी आईएसआई और आतंकी संगठन, भारतीय सीमा में धकेले गए आतंकियों से संपर्क स्थापित करते हैं। आतंकियों के पास पाकिस्तान का ही सिमकार्ड रहता है तो इस कारण वे आसानी से बातचीत कर लेते हैं। कई बार मैसेंजर सिस्टम पर भी संदेशों का आदान-प्रदान होता है। मददगारों में दूसरा नंबर ट्रक चालकों का है। वे इन आतंकियों को इनके ठिकाने तक ले जाते हैं। तीसरा, सड़क किनारे बैठे पंक्चर लगाने वाले मैकेनिक या छोटा ढाबा चलाने वाले लोग हैं। ये आतंकियों को भारतीय सुरक्षा बलों की मूवमेंट बताते हैं। 
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उल्लेखनीय है कि अभी तक पाक से घुसपैठ के जितने भी मामले सामने आए हैं, उनमें उक्त तीनों बातों का गठजोड़ मिला है। जांच रिपोर्ट भी ऐसा ही कहती है कि ये तिगड़ी, आतंकियों को मदद पहुंचा रही है। मोबाइल टावर तकनीक का तोड़ निकालने का प्रयास हो रहा है। हो सकता है कि अगले वर्ष तक उसमें सफलता मिल जाए। जम्मू-कश्मीर पुलिस में तैनात एक आईजी, जो कई दूसरी एजेंसियों में भी काम कर चुके हैं, उन्होंने सुरक्षा कारणों से अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ये तीनों वजह हमारे लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। 

पाक ने 'रोमिंग मोबाइल टावर' यानी अस्थायी टावर, जिन्हें किसी भी वक्त इधर-उधर किया जा सकता है, लगा रखे हैं। कई बार ऐसा हुआ है कि सीमा पर हमारे देश के टावर काम नहीं करते हैं, लेकिन पाक के टावर का स्पष्ट सिग्नल आ जाता है। ये टावर भारतीय सीमा में करीब 15 किलोमीटर अंदर तक काम करते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आतंकियों के लिए पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं यानी हैंडलर से बातचीत करना कितना आसान होता है। नगरोटा एनकाउंटर में मिले तकनीकी उपकरण इस तथ्य को पुख्ता करते हैं। 

अधिकारी के मुताबिक, कई बार हमारे सुरक्षा बलों की ओर से एतराज जताए जाने पर पाकिस्तान अपने मोबाइल टावर की लोकेशन बदल देता है, लेकिन जब कभी फायरिंग होती है तो वे टावर दोबारा से पहले वाली जगह पर आ जाते हैं। ट्रक चालक, जो कि हैंडलर या उनके लोकल गुर्गों के संपर्क में होते हैं, वे आतंकियों को महफूज तरीके से उनके टारगेट पर पहुंचा देते हैं। हालांकि ट्रक चालकों पर जम्मू कश्मीर पुलिस के अलावा दूसरी सीक्रेट एजेंसियों की नजर रहती है, लेकिन फिर भी वे सुरक्षा बलों को गच्चा देने में कामयाब हो जाते हैं। 


अगर पुख्ता इंटेलिजेंस इनपुट है तो ही ट्रकों की गहन चेकिंग होती है। सड़क किनारे बैठे कुछ पंक्चर मैकेनिक, ढाबा संचालक और सर्विस स्टेशन वाले आतंकियों के लिए सूचनाएं जुटाने का काम करते हैं। वे लोकल हैंडलर को सेना से लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस तक की हर मूवमेंट बताते रहते हैं। इसमें, किस रोड से बड़ा अफसर गया है, साथ में काफिला है या स्पेशल फोर्स की गाड़ियां हैं, उन्हें हर तरह की जानकारी रहती है। आसपास के इलाके में सुरक्षा बल किसी बड़े ऑपरेशन की तैयारी कर रहे हैं, ये सूचना भी आतंकियों को मिल जाती है। 

नाकों के आसपास बैठे लोग भी स्थानीय हैंडलर को ये सब सूचनाएं पहुंचाते हैं। इससे कई बार आतंकवादियों को बड़ी मदद मिल जाती है। आतंकवादी बीच राह में ट्रक से उतर कर अपना रास्ता बदल लेते हैं। अब सभी सुरक्षा एजेंसियां इस बाबत एक समन्वित एक्शन प्लान तैयार कर रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इस तिगड़ी का तोड़ निकल आएगा। इसके अलावा सीमा के पार खेती करने के लिए जाने वालों पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। कई बार सीमा के उस पार से मोबाइल और चिप जैसे तकनीकी उपकरण भारतीय क्षेत्र में आ जाते हैं। 

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