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ग्राउंड रिपोर्ट: मां से जानिए कैसा था उनका बेटा मधु

Sat, 17 Mar 2018 03:32 PM IST
बीबीसी, हिंदी
बीबीसी, हिंदी Updated Sat, 17 Mar 2018 03:32 PM IST
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Mob beat tribal boy madhu to death on the allegation of stealing food
भीड़ का हमला
तीन हफ्ते पहले केरल के जंगल में मधु नामक जिस आदिवासी युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वो हमेशा अपनी मां से कहते थे कि गुफाओं में रहने को लेकर वो उनकी चिंता न किया करें। मधु अपनी मां से कहते थे कि उनके बारे में वो फिक्र न किया करें क्योंकि वो जानवरों के साथ वहां सुरक्षित हैं। मधु की मां बेटी के साथ खाना खाते हुए एकाएक रोने लगती हैं। मधु ने कभी नहीं सोचा होगा कि लोग उनकी हत्या कर देंगे। खाना चोरी करने के शक में 23 फरवरी को जब उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई तब उसमें से कुछ युवा सेल्फी ले रहे थे। मधु की 56 वर्षीय मां मल्ली अपने बेटे के जंगल की गुफा में रहने के विचार को कभी भी पसंद नहीं करती थीं। वो अट्टापडी क्षेत्र के साइलेंट वेली नेशनल पार्क के अपने छोटे से घर से कुछ किलोमीटर दूर रहते थे।
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'खाना चुराने की संस्कृति नहीं'

मल्ली ने बीबीसी हिंदी से कहा, "मधु जब जंगल में सुरक्षित रहने की बात करता था तो मुझे भरोसा था। लोगों ने चोरी का इल्जाम लगाकर मेरे बेटे की हत्या कर दी।" आंसू पोंछते हुए मल्ली कहती हैं, "वह चोर नहीं था। वो वैसा नहीं था कि चोरी करेगा। किसी की इजाजत के बिना दूसरे का खाना खाना हमारी संस्कृति में ही नहीं है। जरूरत पड़ने पर वो हमेशा पूछता था।" कुछ लोगों के समूह ने जब जबर्दस्ती मधु को रोका तो उनके पास एक छोटा सा बैग था, जिसमें कुछ खाने के पैकेट थे। तब उन्होंने उनके बैग को टटोला और उसमें उन्हें कुछ पैकेट मिले। इसके बाद भीड़ ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया। बाद में किसी ने पुलिस को बुला लिया। अस्पताल ले जाते समय पुलिस की जीप में ही उनकी मौत हो गई।
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शहद निकालने का काम करने लगे

पालक्काड जिले में मन्नारकड से मुक्कली पहुंचने के बाद कार छोड़नी पड़ती है और जीप शटल सेवा लेनी होती है। यह शटल सेवा पथरीले इलाके में जनजातीय अस्पताल तक पहुंचाती है। यहां के रास्तों को रोड नहीं कहा जा सकता है। अस्पताल से 100 मीटर पहले जंगल में जाने के लिए एक पगडंडी जाती है जहां कोई भी शख्स मधु का घर बता सकता है। मधु के दादा का घर चिंदकीपाजायुर में था। तीन दशक पहले शादी के बाद मल्ली वहां चली गई थीं। पति की अचनाक मौत के बाद वह अपनी मां के घर आ गईं और बच्चों को पालने लगीं। दोनों बेटियों सरासु (29) और चंद्रिका (28) ने पड़ोसी जिले वायनाड के आदिवासी स्कूल में 12वीं तक की पढ़ाई की। सभी भाई-बहनों में सबसे बड़े मधु ने कोकमपलाय सरकारी स्कूल में छठी क्लास तक की पढ़ाई की। इसके बाद वह जंगल से शहद और जड़ी-बूटी इकट्ठा करने में लग गए जिसे वह चिंडक्की के कुरुम्बा अनुसूचित जनजाति सहकारी समिति में बेचा करते थे।
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मल्ली ने आंगनवाड़ी केंद्र में सहायक के रूप में काम करना शुरू किया तो उन्हें 196 रुपए मिलते थे। उनकी बेटी जब बड़ी हुईं तो वो अपने पति के घर वापस लौट आईं। 16 वर्ष की उम्र में मधु अजीब सा बर्ताव करने लगे। वो शांत रहते या कभी हिंसक हो जाते। उनका परिवार उन्हों कोझिकोड के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान लेकर गया। मल्ली कहती हैं, "उन्होंने दवाई दी और वह कुछ दिनों तक खाता रहा, लेकिन बाद में उसने खाने से इनकार कर दिया।" उन्होंने कहा, "लेकिन कुछ समय बाद मधु ने गुफा में जाना और वहां रहना शुरू कर दिया। एक बार जब वह गायब हो गया था तो हमने पुलिस में शिकायत की थी। पुलिस ने उन्हें गुफा में पाया था, लेकिन उसने घर वापस आने से इनकार कर दिया था।" मल्ली का कहना है कि वह अपने बेटे को दिन में दो बार खाना देने में समर्थ थीं। मधु जब गुफा में रहते थे तो वह यह सुनिश्चित करती थीं कि उन्हें खाना मिले। उनकी आय 6000 तक पहुंच गई है और उनके दामाद भी घर में मदद करते हैं।

मौत का क्या कारण था?

मधु की मौत का कारण क्या भूख थी या मानसिक रूप से बीमार लोगों को लेकर उदासीनता? जिले के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभु दास बताते हैं, "वह अकेले रहता था और इस कारण से भूखा था। वह किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं चाहता था।" राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की परियोजना निदेशक सीमा भास्कर कहती हैं, "आदिवासी संस्कृति में खाने को लेकर भावना अलग होती है। वे सोचते हैं कि खाना सिर्फ एक व्यक्ति से जुड़ा है। लोग आपको कई दिनों तक साथ खाना खिलाते हैं। इसी वजह से मैं सोचती हूं कि वह नहीं जानते होंगे कि खाना लेना चोरी होती है।" अट्टापडी में मधु में अकेले मानसिक रूप से बीमार शख्स नहीं थे। डॉ. दास कहते हैं, "राज्य के मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 350 मरीज दर्ज हैं लेकिन 50 मरीज ही नियमित रूप से इलाज के लिए आते हैं।"


पहचान न जाहिर करने की शर्त पर एक कार्यकर्ता ने अलग ही सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "यह साफ है कि यह भूख की वजह से नहीं था। यह मानसिक बीमारी के कारण भी हो सकता है। यह भी हो सकता है कि वह किसी गैर-कानूनी चीज के बारे में जान गए हों। आमतौर पर मधु जिस गुफा में रहते थे वहां आसानी से कोई नहीं जाता है। उस क्षेत्र में दाखिल होने से पहले वनकर्मियों को भी अनुमति लेनी होती है। तो वहां कैसे कई लोग पहुंचे और उन्हें पीट-पीटकर मार डाला।" मधु की कथित हत्या मामले में पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया है।
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