लॉकडाउन में ग्रामीण इलाकों में मनरेगा बन रहा मजदूरों की रोजी रोटी, सरकार ने बढ़ाई दैनिक मजदूरी की राशि
- लॉकडाउन से गांव के मजदूरी पर निर्भर लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट
- देश में मनरेगा के तहत 13.62 करोड़ जॉब कार्ड धारक
- ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 33300 करोड़ रुपये की राशि मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत की
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का एलान
- मनरेगा के तहत दैनिक मजदूरी 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वायरस महामारी और उसके आर्थिक प्रभाव से निपटने को लेकर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की है।
इसमें कई दूसरी राहतों के अलावा मनरेगा के तहत दैनिक मजदूरी 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये करना भी शामिल था। गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव के अनुसार, केंद्र एवं राज्य सरकारों के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में दो करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। मनरेगा के तहत काम हो रहा है। देश में मनरेगा के तहत 13.62 करोड़ जॉब कार्ड धारक हैं, जिनमें से 8.17 करोड़ जॉब कार्ड धारक सक्रिय हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में रोजी रोटी का संकट गहराता जा रहा था...
मार्च में जब लॉकडाउन लागू हुआ तो सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्र में मजदूरी करने वाले लोगों को हुई। वहां तो भूखे मरने जैसी नौबत आ गई थी। जो लोग शहर में फंसे थे, उन्हें तो सरकार और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए खाना मिल रहा था। गांव के जो लोग मजदूरी पर निर्भर थे, उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया।
ऐसे में मनरेगा बहुत कारगर साबित हुई। मनरेगा के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग में विभिन्न प्रदेशों के मुख्यमंत्री इस बाबत सवाल जवाब करते नजर आए।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री से कहा है कि लॉकडाउन में राजस्व के तमाम स्रोत बंद हैं, इसलिए केंद्र सरकार जल्द भुगतान करे। मनरेगा के तहत मजदूरी दर न्यूनतम 300 रुपये प्रतिदिन की जाए।
मजदूर किसान शक्ति संगठन के निखिल डे व अरुणा राय ने वकील प्रशांत भूषण के जरिए सुप्रीम कोर्ट में मनरेगा कामगारों के लिए एक जनहित याचिका दायर की थी। इसमें केंद्र सरकार को लॉकडाउन की अवधि के लिए मनरेगा मजदूरों को पूरा वेतन देने का निर्देश देने की मांग की गई है।
मनरेगा श्रमिकों का रोजगार 100 से बढ़ाकर 200 दिन करने की मांग
राजस्थान के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने प्रदेश के एक करोड़ 13 लाख मनरेगा श्रमिकों को राहत दिलाने को लेकर केंद्रीय ग्रामीण विकास व पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखा है। पायलट ने मनरेगा श्रमिकों का रोजगार 100 से बढ़ाकर 200 दिन करने की मांग की है। उनका कहना था कि लॉकडाउन की स्थिति में मनरेगा योजना ग्रामीण क्षेत्र की लाइफ लाइन बन सकती है।
पायलट का दावा है कि गत 17 अप्रैल को मनरेगा के तहत रोजगार पाने वाले मजदूरों की संख्या लगभग 62 हजार थी, जो अब बढ़कर 10.50 लाख हो चुकी है। बिहार के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा के तहत कामकाज की गति अब तेज हो रही है। पिछले एक सप्ताह में 7,971 पंचायतों में मनरेगा के तहत काम शुरू हुआ है। इस अवधि में 6 लाख से अधिक मजदूरों को काम मिला है।
बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के मुताबिक, प्रदेश में जल-जीवन-हरियाली से संबंधित 21 हजार योजनाएं चल रही हैं। इसमें दो लाख मजदूर काम पर लगे हैं। प्रवासी मजदूरों के जॉब कार्ड बनाने का काम भी चल रहा है। इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा कार्यों के तहत विभिन्न मदों में 100 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है।
यूपी में मनरेगा के तहत हो रहे हैं जल संरक्षण के कार्य
यूपी में लॉकडाउन के दौरान विकास के सभी कार्य ठप हैं, तो ऐसे में प्रतिदिन कमा कर खाने वाले श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत श्रमिकों को कार्य देने का निर्णय लिया गया है।
जल संरक्षण के कार्यों को मनरेगा के तहत कराया जा रहा है। प्रदेश की 16 नदियों को इस योजना में शामिल किया गया है। ग्राम विकास महकमे के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने मनरेगा के कार्य शुरू करने के लिए कहा है।
मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत की गई 33300 करोड़ रुपये की राशि
ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण तथा पंचायती राज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के अनुसार, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यों को 36000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि वर्तमान वित्तीय वर्ष में जारी कर दी है। मंत्रालय ने 33300 करोड़ रुपये की राशि मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत की है। इसमें से 20225 करोड़ रुपये की राशि पूर्व वर्षों की मजदूरी तथा सामग्री के बकाया को समाप्त करने के लिए जारी की गई है।
स्वीकृत धनराशि मनरेगा के अंतर्गत जून 2020 तक के खर्च की पूर्ति के लिए पर्याप्त है। उन्होंने मनरेगा के तहत जलशक्ति मंत्रालय और भू-संसाधन विभाग की योजनाओं के साथ अभिसरण के जरिए जल संरक्षण, जल पुनर्भरण और सिंचाई कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उन 48 लाख आवास ईकाइयों को पूरा करने को प्राथमिकता देनी होगी, जहां लाभार्थियों को तीसरी और चौथी किस्त दे दी गई है। तोमर ने कहा, लॉकडाउन में मनरेगा ने ग्रामीण इलाकों में रोजी रोटी का संकट टालने में अहम भूमिका निभाई है।