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CMDRF का 'दुरुपयोग': लोकायुक्त ने मामले को बड़ी पीठ को भेजने के आदेश को वापस लेने से किया इनकार, याचिका खारिज

Wed, 12 Apr 2023 10:05 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 12 Apr 2023 10:05 PM IST
सार

लोकायुक्त न्यायमूर्ति साइरेक जोसेफ और उप-लोक आयुक्त न्यायमूर्ति हारुन-उल-राशिद ने यह कहते हुए आवेदन को खारिज कर दिया कि यह विचार योग्य नहीं है, क्योंकि भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी केवल वार्ताकारी आवेदनों पर अपने फैसलों या आदेशों की समीक्षा कर सकती है।
 

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Misuse of CMDRF Kerala Lok Ayukta rejects plea to recall order referring matter to larger bench
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन - फोटो : सोशल मीडिया (फाइल)

विस्तार

केरल लोक आयुक्त ने बुधवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मुख्यमंत्री पिनरई विजयन और उनके कैबिनेट सहयोगियों द्वारा मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (सीएमडीआरएफ) के कथित दुरुपयोग के संबंध में एक बड़ी पीठ को सौंपने के अपने हालिया आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी।

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लोकायुक्त न्यायमूर्ति साइरेक जोसेफ और उप-लोक आयुक्त न्यायमूर्ति हारुन-उल-राशिद ने यह कहते हुए आवेदन को खारिज कर दिया कि यह विचार योग्य नहीं है, क्योंकि भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी केवल वार्ताकारी आवेदनों पर अपने फैसलों या आदेशों की समीक्षा कर सकती है।
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लोकायुक्त ने कहा कि 31 मार्च के उसके आदेश की समीक्षा करने की मांग की गई थी। इस आदेश में किसी भी वार्ताकारी आवेदन पर पारित आदेश नहीं था ।

केरल लोक आयुक्त की एक खंडपीठ के बीच 31 मार्च को इस बात पर मतभेद था कि क्या मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद के फैसलों की जांच केरल लोक आयुक्त अधिनियम के प्रावधानों के तहत की जा सकती है और क्या शिकायतकर्ता आरएस शशिकुमार के आरोपों में कोई दम है। पीठ ने इन मुद्दों को बड़ी पीठ के पास भेज दिया था और इसके खिलाफ शशिकुमार ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी।
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आवेदन को खारिज करते हुए लोकायुक्त ने कहा कि 31 मार्च का आदेश शिकायत पर नहीं था, बल्कि इस बात पर था कि क्या मुख्यमंत्री और मंत्रियों के कथित कार्यों की जांच केरल लोक आयुक्त अधिनियम के तहत की जा सकती है। उन्होंने कहा, यहां तक कि अगर शिकायत सुनवाई योग्य है, तो संबंधित लोक सेवक जांच से प्रतिरक्षा या सुरक्षा का हकदार हो सकता है। ऐसी प्रतिरक्षा या संरक्षण उपलब्ध है या नहीं, इस मुद्दे पर लोक सेवक को नोटिस जारी करने और उसकी सुनवाई के बाद ही फैसला किया जा सकता है।


इसमें आगे कहा गया है कि यह सवाल कि क्या कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले की जांच केरल लोक आयुक्त अधिनियम के तहत की जा सकती है, मामले की जड़ से संबंधित सवाल है। इसमें आगे कहा गया है कि यह सवाल कि क्या कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले की जांच केरल लोक आयुक्त अधिनियम के तहत की जा सकती है, मामले की जड़ से संबंधित सवाल है।


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