मिशन चंद्रयान-2 : अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम, धरती की तीसरी कक्षा में पहुंचा यान
- 989 सेकंड में प्रपल्शन के जरिए सफलतापूर्वक बदली धरती की कक्षा
- इसरो ने ट्वीट कर कहा, तय मानकों के मुताबिक काम कर रहा है यान
- 14 अगस्त को चांद की कक्षा की ओर रवाना होगा, 20 को पहुंचेगा
- सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा लैंडर 'विक्रम'
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विस्तार
देश का दूसरा चंद्र मिशन चंद्रयान-2 कामयाबी की नित नई ऊंचाइयां छूते हुए चांद के और करीब पहुंच गया है। योजना के मुताबिक, चंद्रयान-2 ने सोमवार को दोपहर बाद 3:12 बजे धरती की तीसरी कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है। चंद्रयान-2 ने यह काम 989 सेकंड में प्रपल्शन सिस्टम के जरिए धरती की कक्षा बदलने को अंजाम दिया।
अब यान धरती की 276 गुणा 7,192 किमी के दायरे में धरती की इस कक्षा में रहेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। अब तक इसरो चंद्रयान-2 को धरती की पहली और दूसरी कक्षाओं में क्रमश: 24 और 26 जुलाई को सफलतापूर्वक प्रवेश करा चुका है।
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Today after performing the third orbit raising maneuver, we are now 3 steps closer to the moon !!!#ISRO pic.twitter.com/M8iqxwZgZr— ISRO (@isro) July 29, 2019
इसरो ने कहा है कि यान की सभी प्रक्रियाएं सुचारू रूप से चल रही हैं। यह धरती की कक्षाओं को पार करते हुए चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करेगा। यान तय मानकों के मुताबिक काम कर रहा है। उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से देश के सबसे ताकतवर बाहुबली रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 एम1 के जरिए प्रक्षेपित किया गया था।
दो अगस्त को पहुंचेगा धरती की चौथी कक्षा में
इसरो ने बताया कि तय कार्यक्रम के मुताबिक चंद्रयान-2 दो अगस्त को दोपहर दो बजे से तीन बजे के बीच चौथी कक्षा में पहुंचाया जाएगा। यह प्रक्रिया छह अगस्त तक चलेगी। चंद्रयान-2 छह अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा।
14 अगस्त को चांद की कक्षा की ओर होगा रवाना
इसरो के अनुसार, चंद्रयान-2 को धरती की चार कक्षाओं से गुजारे जाने के बाद यह 14 अगस्त को चांद की कक्षा की ओर रवाना कर दिया जाएगा। 20 अगस्त को ही यह चांद की कक्षा में पहुंचेगा। इसके बाद 11 दिन यानी 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा।
एक सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा। पांच दिन की यात्रा के बाद सात सितंबर को विक्रम चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। इसके करीब चार घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा।