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BJP Mission 2024 : बिप्लब के बाद कुछ और राज्यों में होंगे बदलाव, शिवराज की विदेश यात्रा टलने की चर्चा, जयपुर बैठक से पहले होंगे अहम फैसले

Sun, 15 May 2022 04:57 AM IST
योगेश साहू हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली। 
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली।  Published by: योगेश साहू Updated Sun, 15 May 2022 04:57 AM IST
सार

राज्यों में पार्टी ने जिसे चेहरा बनाया, वही पार्टी के लिए मुसीबत बन गए। लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनाव में राज्यों के सीएम के कारण पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा। हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के मुकाबले पार्टी को क्रमश: 17, 22 और 5 फीसदी कम वोट मिले। बीते साल प. बंगाल में भी पार्टी विस चुनाव में लोकसभा चुनाव जैसे प्रदर्शन से दूर रही।

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Mission 2024: Changes will happen in some more states after Biplab Kumar Deb, Shivraj Singh Chouhan foreign trip postpone, decisions will be taken before Jaipur meeting
भाजपा - फोटो : Twitter/@BJP4india

विस्तार

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। मिशन 2024 को मजबूती देने और चुनावी राज्यों में मजबूत तैयारी का संदेश देने केलिए परिवर्तन की बयार एक-दो और राज्यों में बह सकती है। दरअसल बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री की अगुवाई में देर रात तक चली उच्च स्तरीय मैराथन बैठक में 21 से जयपुर में हो रही भाजपा की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक से पहले अहम बदलावों पर सहमति बनी है। इस बैठक में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, संगठन महासचिव बीएल संतोष मौजूद थे।

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सूत्रों का कहना है कि कुछ और राज्य इस परिवर्तन की चपेट में आ सकते हैं। इनमें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम लिया जा रहा है। बदलाव की चर्चा के बीच शिवराज ने शनिवार को विदेश जाने का कार्यक्रम टाल दिया है। जबकि हरियाणा और कर्नाटक में भी बदलाव को ले कर बीते कछ महीने में लगातार मंथन हुआ है। दरअसल इन राज्यों में लोकसभा से पहले चुनाव होंगे, इसलिए नेतृत्व कोई खतरा नहीं उठाना चाहता।
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राष्ट्रीय संगठन के खाली पद भरे जाएंगे
जयपुर में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक से पहले राज्यों के संगठन में बदलाव, राष्ट्रीय संगठन में खाली पड़े पदों को भरने और मामूली स्तर पर बदलाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। हरियाणा, मध्यप्रदेश और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों के भाग्य का फैसला भी जल्द हो सकता है।

इन राज्यों में भी नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा हुई है, हालांकि इस संबंध में अभी एक और बैठक होगी। गौरतलब है कि राष्ट्रीय संगठन में संसदीय बोर्ड के चार, महासचिव और संयुक्त संगठन महासचिव के तीन-तीन पद अरसे से खाली हैं। बैठक में इन पदों के लिए नामों और मामूली फेरबदल पर चर्चा हुई है। इसके अलावा कुछ राज्यों के संगठन मंत्रियों को बदलने पर भी सहमति बनी है।

पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी, ईमानदारी से निभाया
त्रिपुरा के सीएम बिप्लब ने इस्तीफे के बाद कहा, मेरे लिए पार्टी सर्वोपरि है। निष्ठावान कार्यकर्ता हूं, पार्टी ने जो भी जिम्मेदारी सौंपी, चाहे प्रदेश अध्यक्ष की हो या फिर सीएम की, ईमानदारी से निभाया।  त्रिपुरा के सर्वांगीण विकास और प्रदेश के लोगों की शांति सुनिश्चित करने के लिए काम किया।

यूपी को जल्द मिलेगा नया अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश को नया अध्यक्ष जल्द मिलेगा। नए अध्यक्ष के लिए जाट, ब्राह्मण और दलित नेताओं के नाम पर मंथन हुआ है। इनमें एक पूर्वी उत्तरप्रदेश से तो तीन पश्चिम उत्तर प्रदेश से हैं। जिन नामों को रेस में सबसे आगे बताया जा रहा है, उनका पूर्व में संगठन में व्यापक अनुभव रहा है। जबकि जाट बिरादरी के जिस चेहरे पर चर्चा हुई है उन्हें अपनी बिरादरी का दंबग नेता माना जाता है।

...इसलिए भी हुए फेरबदल
पार्टी आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में किसी तरह का खतरा नहीं उठाना चाहती। असम को छोड़ दें तो देश का एक भी राज्य ऐसा नहीं है जहां लोकसभा चुनाव के मुकाबले भाजपा के मत प्रतिशत में गिरावट न आई हो। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में मोदी समर्थक मतदाता राज्य नेतृत्व से नाराजगी के कारण पाला बदल लेते हैं।


साफ सुथरी छवि चाहिए
बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा को मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सत्ता गंवानी पड़ी, जबकि इन्हीं राज्यों में तीन चार महीने बाद हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मोदी के चेहरे की बदौलत विपक्ष का करीब-करीब सूपड़ा साफ कर दिया। इसलिए नेतृत्व चाहता है कि राज्यों में ऐसा चेहरा न हो जिसके कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़े।

वोट कायम रखने के बदले घटा रहे हैं चेहरा
दरअसल राज्यों में पार्टी ने जिसे चेहरा बनाया, वही पार्टी के लिए मुसीबत बन गए। लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनाव में राज्यों के सीएम के कारण पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा। हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के मुकाबले पार्टी को क्रमश: 17, 22 और 5 फीसदी कम वोट मिले। बीते साल प. बंगाल में भी पार्टी विस चुनाव में लोकसभा चुनाव जैसे प्रदर्शन से दूर रही। इसके बाद तय किया गया कि जिस राज्य में परिवर्तन की जरूरत है, वहां तत्काल अमल में लाया जाए।

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