सरकार ने 7500 करोड़ रुपये दिए सड़कों की मरम्मत के लिए, लेकिन राज्यों ने खर्च ही नहीं किए
- सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट से हुआ खुलासा
- महाराष्ट्र को जारी हुए एक हजार करोड़ रुपये, खर्च किये 650 करोड़
- केंद्रशासित राज्यों ने खर्च ही नहीं किये रुपये
विस्तार
देश के सभी प्रदेशों और केंद्र शासित राज्यों के लिए बीते चार साल में साढ़े सात हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट राजमार्गों की मरम्मत के लिए जारी हुआ। ताज्जुब की बात यह है कि बदहाल सड़कों की मरम्मत के नाम पर जारी हुई इतनी रकम खर्च ही नहीं की जा सकी। राज्यों में सड़कों की हालत अभी भी बदतर बनी हुई है। सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय की एक रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ है।
मंत्रालय की रिपोर्ट से पता चला है कि सड़कों की मरम्मत के लिए देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए साढ़े सात हजार करोड़ रुपये आवंटित हुए थे। जिसमें से 2017-18 में 2022 करोड़ रुपए राज्यों को आवंटित किए गए। उसमें से सभी राज्यों ने मिलकर 1600 करोड़ रुपये ही सड़कों की मरम्मत के नाम पर खर्च किये।
इसी तरह 2018-19 में 1822 करोड़ रुपये इसी काम के लिए आवंटित किए गए। इस साल भी राज्यों ने महज 1250 करोड़ ही खर्च किए। अगले साल यानि कि 2019-20 में सभी राज्यों को राजमार्गों की मरम्मत के नाम पर 1200 करोड़ रुपये आवंटित हुए। इस साल महज 800 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए।
2020-21 में 2500 करोड़ रुपये राजमार्गों की मरम्मत के नाम पर राज्यों को आवंटित किए गए। अब तक 1200 करोड़ रुपये देश के राज्यों की सड़कों की मरम्मत पर खर्च हो चुके हैं।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बजट का आवंटन
रिपोर्ट के मुताबिक राजमार्गों की मरम्मत के नाम पर सबसे ज्यादा आवंटन महाराष्ट्र को मिला। बीते चार सालों में महाराष्ट्र को 1000 करोड़ रुपये सड़कों की मरम्मत के नाम पर आवंटित हुए। बावजूद इसके महाराष्ट्र ने तकरीबन 650 करोड़ रुपये ही खर्च किए। यानी कि 350 करोड़ रुपये खर्च नहीं किये जा सके।
इसी तरह उत्तराखंड में बीते चार सालों में 138 करोड़ रुपए राजमार्गों की मरम्मत के लिए जारी किए गए। इस राज्य में भी सड़कों की मरम्मत के नाम पर आवंटित बजट में पचास फीसदी से कम महज 64 करोड़ रुपये का ही इस्तेमाल हो सका।
उत्तर प्रदेश सरकार को बीते चार साल में 393 करोड़ रुपये इसी काम के लिए आवंटित हुए। लेकिन 222 करोड़ रुपये ही सड़कों की मरम्मत पर खर्च किए गए।
केंद्र शासित राज्यों ने तो खर्च ही नहीं किए
रिपोर्ट के मुताबिक दादर नगर हवेली, दमन और दीव समेत चंडीगढ़ को भी तकरीबन चार करोड़ रुपये जारी किए गए। इन केंद्र शासित प्रदेशों में सड़कों की मरम्मत के नाम पर जारी बजट से एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ। दादर नगर हवेली, दमन और दीव को चार सालों में 40 लाख रुपये आवंटित किए गए। जबकि चंडीगढ़ को इन चार सालों में साढ़े तीन करोड़ रुपये आवंटित किए गए। किसी भी राज्य ने इन रुपयों का इस्तेमाल नहीं किया। दरसल ये केंद्रशासित प्रदेश क्षेत्रफल के लिहाज से बहुत ही छोटे हैं, जो अपने राज्य से मिले राजस्व से ही सड़कों की मरम्मत कर लेते हैं।