ONOE: कानून मंत्रालय ने गिनाईं 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' की खासियत, रिजिजू बोले- देश कांग्रेस को इसके खिलाफ...
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह किसी पार्टी या व्यक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि देश के बारे में है।
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लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश किया जाएगा। लोकसभा के एजेंडे में कहा गया है कि संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 जिसे 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' विधेयक के रूप में जाना जाता है, इसे केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल पेश करेंगे। इसे लेकर लगातार सियासी गलियारों में हलचल मची हुई है। इस बीच कानून और न्याय मंत्रालय ने बताया कि इस विधेयक की क्या कुछ खासियत है और इसे लाने से क्या फायदे होंगे।
400 से अधिक बार हो चुके हैं चुनाव
कानून मंत्रालय का कहना है, भारत का लोकतंत्र चुनावी प्रक्रिया पर आधारित है, जो नागरिकों को सरकार के कामकाज में सक्रिय रूप से भाग लेने का मौका देती है। स्वतंत्रता के बाद से, भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के 400 से अधिक चुनाव हो चुके हैं, जो चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता को दर्शाते हैं। हालांकि, चुनावों का बार-बार होना और इस पर विवाद खड़ा होना इस बात की ओर इशारा करता है कि एक और बेहतर चुनावी प्रणाली की जरूरत है। इसी वजह से 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की विचारधारा फिर से चर्चाओं में आ गई।
चुनावी सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम
भारत में एक साथ चुनाव के विचार पर एक उच्च स्तरीय समिति ने 2024 में अपनी रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में इस विचारधारा को लागू करने के लिए एक विस्तृत योजना दी गई। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2024 को इन सिफारिशों को मंजूरी दी, जो चुनावी सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस प्रणाली के समर्थकों का कहना है कि इससे प्रशासनिक कामकाजी क्षमता बढ़ सकती है, चुनावों पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है और नीतियों में स्थिरता बढ़ सकती है। चूंकि भारत अपने शासन को बेहतर बनाने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुधारने की दिशा में काम कर रहा है, इसलिए 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में सामने आया है, जिसके लिए गंभीर विचार-विमर्श और सबकी सहमति जरूरी है।
India’s democratic framework thrives on the vibrancy of its electoral process, enabling citizens to actively shape governance at every level. Since independence, over 400 elections to the Lok Sabha and State Legislative Assemblies have showcased the Election Commission of India’s… pic.twitter.com/exhJxc07u0
— ANI (@ANI) December 17, 2024
क्या बोले किरेन रिजिजू?
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह किसी पार्टी या व्यक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि देश के बारे में है। उन्होंने कहा कि जब यह विधेयक संसद में पेश होगा, तो उन्हें उम्मीद है कि देश कांग्रेस को इसके खिलाफ नकारात्मक खेल खेलते हुए देखेगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब भारत को आजादी मिली थी, तब करीब दो दशकों तक पूरे देश में एक साथ चुनाव होते थे। मगर फिर कांग्रेस ने अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग किया, जिसके बाद संसद और राज्यों के चुनाव अलग-अलग होने लगे।
रिजिजू ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस यह कहना चाहती है कि पंडित नेहरू की सरकार उस समय अवैध थी, जब पूरे देश में एक साथ चुनाव होते थे। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कांग्रेस चाहती है कि देश को हर साल चुनावों की प्रक्रिया से गुजरना पड़े? उनका कहना था कि चुनाव देश और इसके लोगों की सेवा के लिए होने चाहिए।
उन्होंने ईवीएम के मुद्दे पर कहा कि कांग्रेस ने 2004 और 2009 में केवल ईवीएम मशीनों के जरिए सरकार बनाई। ईवीएम पर सवाल उठाने वाले कांग्रेस के सभी सांसद ईवीएम मशीन के जरिए ही चुने गए हैं। क्या कांग्रेस का मतलब यह है कि वे अलोकतांत्रिक तरीकों और दोषपूर्ण मशीनों के माध्यम से चुने गए? कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है और वे सिर्फ राजनीति करना चाहते हैं।