सरकार दो साल में लाएगी दुनिया की पहली डेंगू की आयुर्वेदिक दवा, कुपोषण से जंग लड़ेगा आयुष मंत्रालय
- अब आयुर्वेेदिक उत्पादों का फर्जी दावा करने वालों पर लगेगी लगाम
- नए सिस्टम के तहत उत्पादों के शोध पत्रों की होगी जांच
- डेंगू पर जल्द कारगर दवा ला सकता है आयुष मंत्रालय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आयुष मंत्रालय अगले दो साल में दुनिया की पहली डेंगू की आयुर्वेदिक दवा लॉन्च करेगा। मंत्रालय के मुताबिक दवा विकसित करने का काम तीसरे और अंतिम चरण में है। ट्रायल पूरा होने के बाद इसे बाजार में पेश किया जाएगा।
आयुश सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा शोध परिषद ने दवा को लेकर अनुसंधान किया था। इसे भारत में पाई जाने वाली कई औषधियों से तैयार किया जा रहा है। गोली के रूप में यह दवा अगले दो सालों में बाजार में उपलब्ध होगा।
उन्होंने कहा कि दवा का क्लीनिकल ट्रायल दो साल में पूरा हो जाएगा। दवा का नाम, इसे कैसे बेचा जाएगा यानी क्या काउंटर लगाया जाएगा या फिर सिर्फ डॉक्टर द्वारा लिखने पर ही इसे खरीदा जाएगा इस पर अभी फैसना नहीं हुआ हे। आईसीएमआर और मंत्रालय की टीम दवा की खुराक भी तय करेगी।
गौ मूत्र, दूध, गोबर या अन्य तरह की जड़ी बूटियों से बने उत्पादों की गुणवत्ता का फर्जी दावा करने वालों की सरकार जल्द जांच शुरू करेगी। इसके लिए आयुष मंत्रालय एक ऐसे रजिस्ट्री सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसके तहत उत्पादों के निर्माण की जानकारी मंत्रालय तक भेजना अनिवार्य होगा। फिर मंत्रालय इनके शोध पत्र की जांच करेगा।
मंगलवार को मोदी-0.2 सरकार के पहले 100 दिन में आयुष मंत्रालय की उपलब्धियां को लेकर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी सामने आई। मंत्रालय सचिव डॉ. राजेश कोटेचा ने बताया, आयुर्वेद से जुड़े कई तरह के विज्ञापन देखने को मिलते हैं, जिनमें उनकी दवाओं को कारगर बताया जाता है। अब नए सिस्टम में ऐसे प्रचार के लिए सरकार से मंजूरी लेना जरूरी होगा। उन्होंने कहा, आयुष वैज्ञानिक गौ मूत्र की कैंसर मरीजों के लिए उपयोगिता पर शोध कर रहे हैं।
कुपोषण से जंग लड़ेगा आयुर्वेद
केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाईक ने बताया कि कुपोषण से जंग लड़ने के लिए आयुर्वेद सहायक सिद्घ होगा। महाराष्ट्र के गड़चिरौली में पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है। करीब 10 हजार गर्भवती महिलाओं को आयुर्वेद पद्घति से उपचार दिया जाएगा। जन्म से दो वर्ष तक बच्चों की पूरी निगरानी होगी।
जल्द मिलेंगी 150 तरह की दवाएं
कोटेचा ने कहा, आयुर्वेद, होमियोपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्घति की दवाओं की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए सरकार काम कर रही है। देशभर में करीब पांच हजार से ज्यादा जनऔषधि केंद्र बन चुके हैं। इन पर करीब 150 तरह की दवाएं जल्द ही उपलब्ध होने लगेंगी।