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न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना, किसानों को मिलता है फसल का अच्छा मूल्य
Thu, 27 Dec 2018 09:37 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Thu, 27 Dec 2018 09:37 PM IST
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न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत देश के सभी राज्यों को अपने-अपने राज्य में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत गेहूं एवं चावल देना है- जिसका समर्थन मूल्य घोषित है, जिसकी खरीद केन्द्र एवं राज्य सरकार करती है, तो इससे किसानों को अच्छा मूल्य मिलता है। मूल्य समर्थन योजना के तहत सभी तिलहन, दलहन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का प्रावधान है। बाजार में कृषि उत्पाद के दाम यदि न्यूनतम समर्थन मूल्य के नीचे आते हैं तो राज्य सरकार के प्रस्ताव पर कुल उत्पादन के 25 प्रतिशत की खरीद का प्रावधान था।
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हाल ही में, इस सीमा को बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य है कि किसानों को उनके उत्पाद का लाभकारी मूल्य मिले एवं अधिक उत्पादन हो सके। यूपीए के अंतिम 4 वर्षों 2010-11 से 2013-14 में पीएसएस योजना के तहत कुल 7 लाख 24 हजार मीट्रिक टन की खरीद की गई। जबकि मोदी सरकार में वर्ष 2014-15 से 2018-19 (दिसम्बर 2018 तक) कुल 78 लाख 61 हजार मिट्रिक टन की खरीद की गई है। जोकि यूपीए के समय से लगभग 11 गुना अधिक है।
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यूपीए के अंतिम 4 वर्षों 2010-11 से 2013-14 में पीएसएस योजना के तहत खरीद के लिए कुल 300 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया था। जबकि मोदी सरकार के मात्र 2 वर्षों 2017-18 एवं 2018-19 के लिए 15,053 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया। जो कि यूपीए के 4 वर्षों के मुकाबले 2 वर्षों में ही लगभग 50 गुना अधिक है।
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यूपीए के अंतिम 4 वर्षों 2010-11 से 2013-14 में पीएसएस योजना के तहत खरीद के लिए कुल 2,500 करोड़ रुपये की सरकारी गारंटी दी गई थी। जबकि मोदी सरकार में वर्ष 2014-15 से 2019-20 के लिए कुल 47,250 करोड़ रुपये की सरकारी गारंटी दी गई है। जोकि यूपीए के समय से लगभग 17 गुना अधिक है।