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MiG-21 Crash: गलती माफ नहीं करता मिग-21! इस लड़ाकू जहाज को अब क्यों कह रहे 'ताबूत' और 'विधवा'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 29 Jul 2022 01:18 PM IST
सार

MiG-21 Crash: मिग-21 को ऑपरेशनली हैंडल कर चुके एयर कमोडोर बीएस सिवाच (रिटायर्ड) कहते हैं, ये लड़ाकू जहाज एक पुरानी तकनीक वाला है। इस सुपरसोनिक जहाज की मार से दुश्मन कांप उठता था। 1971 की लड़ाई में मिग-21 ने शानदार नतीजे दिए थे। ग्राउंड अटैक में इसका बेहतरीन इस्तेमाल किया गया...

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MiG-21 Crash: Why this fighter jet called as flying coffin and widow
MiG-21 Crash: मिग-21 - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

किसी जमाने में भारतीय वायुसेना की ताकत रहे मिग-21 लड़ाकू जहाज को अब कई तरह के विचलित करने वाले शब्दों का सामना करना पड़ रहा है। जिस तेजी से मिग-21 क्रैश हो रहे हैं, उसे देखकर इस हवाई जहाज को 'ताबूत' और 'विधवा बनाने वाला' जैसे नामों से पुकारा जाने लगा है। ताजा घटना राजस्थान के बाड़मेर की है। गुरुवार की रात वहां एक मिग-21 क्रैश हो गया। भारतीय वायुसेना के दो पायलट शहीद हो गए। आखिर इस पुराने लड़ाकू जहाज को वायुसेना रिटायर क्यों नहीं कर रही है, जबकि दुनिया के अधिकांश देश इससे किनारा कर चुके हैं। भारत ने ये लड़ाकू जहाज तत्कालीन सोवियत संघ अब 'रूस' से साठ के दशक में खरीदे थे, वह खुद इस फाइटर प्लेन को 1985 में रिटायर कर चुका है, जबकि भारत में आज तक इन विमानों का इस्तेमाल हो रहा है। एयर कमोडोर बीएस सिवाच (रिटायर्ड) ने बताया, मिग-21 की सबसे बड़ी खासियत है कि ये गलती माफ नहीं करता। इसे किसी भी तरह से उड़ा लेंगे, ये बहुत बड़ी गलतफहमी है। अगर मिग-21 का सूझबूझ से इस्तेमाल करो तो ये कभी धोखा नहीं देगा।  

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तकनीक पुरानी है, मगर नतीजे शानदार दिए हैं

मिग-21 को ऑपरेशनली हैंडल कर चुके एयर कमोडोर बीएस सिवाच (रिटायर्ड) कहते हैं, ये लड़ाकू जहाज एक पुरानी तकनीक वाला है। कभी इस जहाज का सिक्का चलता था। इस सुपरसोनिक जहाज की मार से दुश्मन कांप उठता था। 1971 की लड़ाई में मिग-21 ने शानदार नतीजे दिए थे। ग्राउंड अटैक में इसका बेहतरीन इस्तेमाल किया गया। उस लड़ाई में ढाका के गवर्नर हाउस पर मिग-21 ने ही अटैक किया था। पाकिस्तान के साथ 1965 और 1999 की लड़ाई में भी ये लड़ाकू जहाज खुद को साबित कर चुका है। ये जहाज कभी गलती को माफ नहीं करता। इसे उड़ाने के लिए बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है। यू कहें कि इसे हल्के में ले ही नहीं सकते। किसी भी तरह से चला लेंगे, ऐसा इसके साथ संभव नहीं है। अगर सूझबूझ से इस्तेमाल करोगे तो ये धोखा नहीं देगा। 'जंगी कार्रवाई तैयारी प्लेटफार्म' में इसका जमकर प्रयोग किया गया है। दूसरे उच्च श्रेणी वाले लड़ाकू जहाजों को उड़ाने से पहले पायलटों को सुपरसोनिक मिग-21 पर ही प्रशिक्षित किया जाता है। इस लड़ाकू जहाज की लैंडिंग स्पीड ही 300 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है। आसमान में इसकी रफ्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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क्या इस वजह से हादसों का शिकार हो रहा मिग-21

लगभग पौन दो सौ करोड़ रुपये की कीमत वाले मिग-21 को रूस से खरीदा गया था। 1963 में इसे औपचारिक तौर पर वायुसेना के बेड़े में शामिल किया गया था। भारत सरकार ने 874 मिग-21 खरीदे थे। रूस ने 1985 में इस जहाज का निर्माण बंद कर दिया था। दुनिया के करीब साठ देशों ने अपने लड़ाकू जहाजों के बेड़े में 'मिग-21' सुपरसोनिक को शामिल किया था। अब अधिकांश देश, इस जहाज को स्थायी तौर से विश्राम दे चुके हैं। भारत ने इसे अभी तक चलाए रखा है। वजह, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इस विमान को कुछ हद तक अपग्रेड कर दिया। बीएस सिवाच बताते हैं, 60 साल से ट्रेनिंग और लड़ाई में इस जहाज का कोई मुकाबला नहीं था। अब स्पेयर पार्ट्स का बैकअप ठीक से नहीं मिल रहा। चूंकि रूस ने इसका निर्माण बंद कर दिया है तो ऐसे में स्पेयर पार्ट्स का संकट आ गया। पहले वाले पुर्जों से ही काम चल रहा है। एयर फ्रेम को अपग्रेड नहीं कर सकते हैं, इसकी एक सीमा भी होती है। ऐसे में पुरानी मशीन को रिटायर कर देना चाहिए। पुरानी तकनीक होने के कारण, मिग-21 लड़ाकू जहाज हादसों का सबब बनता जा रहा है।

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दो-तीन साल बाद मिग-21 का रिटायरमेंट संभव

मिग-21 को अब इसकी समय सीमा से ज्यादा उड़ाया जा चुका है। भले ही अपग्रेड करने के बाद इसे 2022 तक उड़ाने की बात कही गई है, लेकिन इसके रिटायर होने में अभी वक्त लगेगा। वजह, भारतीय वायुसेना के पास अभी पर्याप्त संख्या में लड़ाकू जहाज नहीं हैं। मात्र 36 राफेल से वायुसेना की सामरिक जरूरत पूरी नहीं हो जाती। हालांकि इसे 1990 के दशक में रिटायर होना चाहिए था, लेकिन ये अभी तक चल रहा है। तत्कालीन सरकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अगर तभी वायुसेना को मिग-21 का विकल्प मिल जाता तो इसे रिटायर किया जा सकता था। आठ साल पहले भारतीय वायुसेना प्रमुख रहे अरूप राहा ने इस लड़ाकू विमान के बारे में अहम बात कही थी। उन्होंने कहा, इस तरह के पुराने लड़ाकू जहाजों को हटाने में भारत जितनी देर करेगा, राष्ट्र की सुरक्षा में खतरा उतना ही बढ़ता जाएगा। उनसे पहले भी कई एयरचीफ कहते रहे कि मिग-21 को अब विश्राम देना चाहिए, लेकिन सरकार ने विकल्प न होने के चलते इस जहाज का इस्तेमाल जारी रखा। मिग-21 के कुछ विमानों के अलावा मिग-25 और मिग-27 जैसे लड़ाकू जहाज रिटायर भी हुए हैं। 'तेजस' पर काम चल रहा है। दो तीन साल में जैसे ही तेजस के पर्याप्त स्क्वाड्रन इस्तेमाल में आएंगे तो मिग-21 को रिटायर कर दिया जाएगा।

आधे से ज्यादा 'मिग 21' हुए हादसों का शिकार

अभी तक 400 से अधिक मिग लड़ाकू जहाज, क्रैश हो चुके हैं। इन हादसों में वायुसेना के 200 से अधिक पायलट शहीद हो गए हैं। इसके अलावा ढाई सौ से ज्यादा सामान्य लोगों ने भी इन हादसों में अपनी जान गंवाई है। यूपीए सरकार में साल 2012 के दौरान तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने संसद में जानकारी देते हुए बताया था कि रूस से खरीदे गए 827 मिग विमानों में से अभी तक आधे से अधिक लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। पिछले साल ही पांच मिग लड़ाकू जहाज क्रैश हुए थे। 2016-17 के दौरान मिग-21 एम, मिग-27 यूपीजी, मिग-21 टी 69, दो जगुआर, दो एसयू-30 एमकेआई और एक मिग-23 यूबी हादसों का शिकार हुए। साल 2018 में एक जगुआर, मिग-21 टी 75 और मिग-27 यूपीजी क्रैश हुए थे। अगले साल यानी 2019 में जगुआर, मिग-27 यूपीजी, मिग-21 बाइसन, मिग-21 यूपीजी, एसयू-30 एमकेआई और मिग-21 टी 69 क्रैश हो गए थे। जब मिग को वायुसेना का हिस्सा बनाया गया तो शुरुआत में काफी संख्या में ये जहाज क्रैश होते रहे। अगर 70 के दशक की बात करें तो 365 दिन में लगभग 50 फाइटर प्लेन हादसों का शिकार हो गए थे। अगले दशक में यह संख्या करीब तीन दर्जन पर सिमट गई। उससे अगले दशक यानी 1990 में यह आंकड़ा 30 के आसपास रहा। बाद में कई तरह के सुधार किए गए तो हादसों का ग्राफ और गिरता चला गया।

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