MHA: केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड कर्मियों का मेडिकल अलाउंस 5000 रुपये करने की योजना, मांगा ब्यौरा
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय, अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड जवानों का मेडिकल अलाउंस, एक हजार रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये किया जा सकता है। इसके लिए कल्याण और पुनर्वास बोर्ड 'वॉर्ब' एमएचए ने विभिन्न बलों से उनके पास मौजूद रिटायर्ड कर्मियों का ब्यौरा मांगा था। सभी केंद्रीय बलों ने अपने रिटायर्ड कर्मियों का डाटा गृह मंत्रालय को भेज दिया है। पिछले दिनों इन बलों के रिटायर्ड कर्मियों को 'सीजीएचएस' कार्ड लेने के लिए प्रोत्साहित करने की बात भी सामने आई थी। अब इन बलों के रिटायर्ड कर्मियों के पास दोनों विकल्प रहेंगे। अगर वे सीजीएचएस कार्ड लेते हैं, तो उन्हें एकमुश्त तीस हजार रुपये की कटौती करानी होगी।
सीजीएचएस से क्यों दूर हटे रिटायर्ड कर्मी
सितंबर माह में सीआरपीएफ मुख्यालय में उप महानिरीक्षक (कल्याण) द्वारा 29 सितंबर को एक पत्र जारी किया गया था। कई रिटायर्ड कर्मियों द्वारा सीजीएचएस की आईपीडी कार्ड बनवाने के प्रति अनिच्छा जाहिर की जा रही थी। इस संबंध में कई कारण सामने आए थे। इनमें संबंधित कर्मी के गृह नगर से सीजीएचएस अस्पताल का दूर होना भी, एक कारण रहा है। सरकार ने 2021 में यह निर्णय लिया था कि बल के जो पेंशनर्स, सीजीएचएस कवर्ड एरिया में नहीं रहते हैं, ऐसे सभी पेंशनर्स को उनके जोखिम निधि के अंतिम भुगतान की राशि से कटौती कर सीजीएचएस का आईपीडी कार्ड बनवाना अनिवार्य किया गया है। उसमें इच्छुक/अनिच्छा का कोई औचित्य नहीं होगा। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि रिटायर्ड कर्मी और उनके आश्रितों को सीजीएचएस इम्पैनल्ड अस्पताल से आजीवन चिकित्सा की सुविधा मिल सके। इस मामले में कहा गया कि बल के ज्यादा से ज्यादा रिटायर्ड कर्मियों को सीजीएचएस की सुविधाओं से अवगत कराया जाए।
तय मेडिकल अलाउंस का विकल्प क्यों
सेवानिवृत्त होने वाले अधिकांश कर्मी, तय मेडिकल अलाउंस का विकल्प देते हैं। इससे उन्हें सीजीएचएस की सुविधा नहीं मिलती। सीजीएचएस कार्ड धारकों व उनके आश्रितों को ओपीडी के साथ साथ आईपीडी (अस्पताल में भर्ती होकर इलाज) की सुविधा का भी प्रावधान है। अधिकांश रिटायर्ड कर्मी, इसलिए तय मेडिकल अलाउंस का विकल्प चुनते हैं, क्योंकि सीजीएचएस की सुविधा के लिए एक सिपाही रैंक के कर्मी को जोखिम निधि के अंतिम भुगतान की राशि से एकमुश्त 30 हजार रुपये की राशि की कटौती करानी होती है। दूसरी तरफ, रिटायरमेंट के बाद कार्मिक व उनके आश्रितों को विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए भारी धनराशि खर्च करनी पड़ती है।
जीवन पर्यंत कैशलेस आईपीडी की सुविधा
सीजीएचएस कार्ड धारकों को जीवन पर्यंत कैशलेस आईपीडी की सुविधा मिलती है। साथ ही उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपये तय मेडिकल अलाउंस भी दिया जाता है। कई कर्मचारी ऐसा सोचते हैं कि सीजीएचएस कार्ड के लिए उन्हें एकमुश्त राशि की कटौती करानी पड़ती है। इसके चलते वे सीजीएचएस कार्ड के प्रति रूचि नहीं दिखाते। वे यह भी सोचते हैं कि उनके घर के आसपास सीजीएचएस अस्पताल नहीं है। ऐसे में उनके लिए इस कार्ड का कोई फायदा नहीं है। रिटायर्ड कर्मियों को बताया गया है कि बीमारी की स्थिति में उन्हें किसी न किसी शहर में जाना पड़ता है। वहां प्रत्यक्ष तौर पर सीजीएचएस अस्पताल नहीं तो अधिकृत अस्पताल की सुविधा होती है, उनके आसपास कोई न कोई इम्पैनल्ड अस्पताल मिल जाता है।
कल्याण और पुनर्वास बोर्ड 'वॉर्ब' ने मांगी जानकारी
सीजीएचएस कार्ड, संबंधित कार्मिक और उसकी पत्नी के लिए जीवन पर्यंत कैशलेस इलाज की सुविधा देता है। यह किसी भी हेल्थ इंश्योरेंस से कई गुना सस्ता होता है। अगर कोई कार्मिक 75 से 80 वर्ष की आयु तक जीवित रहता है, तो सीजीएचएस कार्ड पर खर्च की गई लगभग 30 हजार रुपये की राशि मात्र 2000 रुपये प्रतिवर्ष या उससे भी कम रहती है। कार्मिक और उसकी पत्नी को निशुल्क इलाज मिलता है। मात्र 30 हजार रुपये खर्च कर सीजीएचएस कार्ड के जरिए अगले 30 से 35 वर्ष तक उसका फायदा मिल सकता है। कल्याण और पुनर्वास बोर्ड 'वॉर्ब' एमएचए ने विभिन्न बलों से जो जानकारी मांगी है, उसमें रैंक, नाम, यूनिट, कैडर, श्रेणी, जन्मतिथि, डीओई, रिटायरमेंट टाइप, स्टेट, होम एड्रेस, मोबाइल नंबर, आश्रित का नाम, पेंशनर के साथ संबंध आदि बातें शामिल हैं।