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MGNREGA: एप से हाजिरी लगाने के खिलाफ मनरेगा मजदूरों का प्रदर्शन 40वें दिन भी जारी, DMK और RJD ने दिया समर्थन
Tue, 04 Apr 2023 02:20 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Tue, 04 Apr 2023 02:20 AM IST
सार
ग्रामीण विकास और पंचायती राज की संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्षता करने वाली कनिमोझी ने कहा है कि वह समिति के समक्ष मनरेगा मजदूरों को आमंत्रित करेंगी। सांसद मनोज झा ने सरकार पर मजदूरों की बात नहीं सुनने का आरोप लगाया।
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले एक माह से अधिक समय से मनरेगा मजदूरों का विरोध प्रदर्शन जारी है। एप आधारित हाजिरी सिस्टम के खिलाफ मनरेगा मजदूरों का प्रदर्शन सोमवार को 40वें दिन भी जारी रहा। डीएमके सांसद कनिमोझी और आरजेडी सांसद मनोज झा ने मजदूरों का समर्थन करते हुए नई व्यवस्था को वापस लेने की भी मांग की।
ग्रामीण विकास और पंचायती राज की संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्षता करने वाली कनिमोझी ने कहा है कि वह समिति के समक्ष मनरेगा मजदूरों को आमंत्रित करेंगी। सांसद मनोज झा ने सरकार पर मजदूरों की बात नहीं सुनने का आरोप लगाया और सड़कों पर उतरकर विरोध करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मनरेगा मजदूरों के भुगतान पर राज्यसभा में उनके सवाल का सरकार द्वारा ठीक से जवाब नहीं दिया गया।
कनिमोझी ने ऐप-आधारित उपस्थिति प्रणाली पर उठाया सवाल
कनिमोझी ने कहा, योजना गरीबों के लिए लाई गई थी। धीरे-धीरे उनके अधिकारों को छीना जा रहा है। मनरेगा में मजदूरी राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत मजदूरी से कम है। गैर-भाजपा सरकारें और पश्चिम बंगाल एक उत्कृष्ट उदाहरण है, पैसा नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा, सरकार कहती है कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ है, लेकिन अंत में यह सुनिश्चित कर रही है कि कुछ लोग पैसे लेकर चले जाएं और यह वास्तव में उन लोगों तक नहीं पहुंचे जिनके लिए यह योजना शुरू की गई।
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मजदूरों का विरोध प्रदर्शन 40वें दिन भी जारी
मनरेगा संघर्ष मोर्चा ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) मजदूरों की कुछ समस्याओं को दूर करने के लिए सहमत हो गया है। दिल्ली के जंतर मंतर पर मजूदरों के प्रदर्शन का 40वां दिन था। मनरेगा संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन में सचिव एस.के. सिंह, ग्रामीण विकास मंत्रालय और ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक भी शामिल रहे।
14 फरवरी को शुरू हुआ विरोध
मनरेगा में डिजिटल उपस्थिति अनिवार्य किए जाने के मुश्किल से एक महीने बाद 14 फरवरी को राष्ट्रीय राजधानी में विरोध शुरू हुआ। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उनकी हाजिरी नहीं लग रही है और उनका वेतन काटा जा रहा है।
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ग्रामीण विकास और पंचायती राज की संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्षता करने वाली कनिमोझी ने कहा है कि वह समिति के समक्ष मनरेगा मजदूरों को आमंत्रित करेंगी। सांसद मनोज झा ने सरकार पर मजदूरों की बात नहीं सुनने का आरोप लगाया और सड़कों पर उतरकर विरोध करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मनरेगा मजदूरों के भुगतान पर राज्यसभा में उनके सवाल का सरकार द्वारा ठीक से जवाब नहीं दिया गया।
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कनिमोझी ने ऐप-आधारित उपस्थिति प्रणाली पर उठाया सवाल
कनिमोझी ने कहा, योजना गरीबों के लिए लाई गई थी। धीरे-धीरे उनके अधिकारों को छीना जा रहा है। मनरेगा में मजदूरी राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत मजदूरी से कम है। गैर-भाजपा सरकारें और पश्चिम बंगाल एक उत्कृष्ट उदाहरण है, पैसा नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा, सरकार कहती है कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ है, लेकिन अंत में यह सुनिश्चित कर रही है कि कुछ लोग पैसे लेकर चले जाएं और यह वास्तव में उन लोगों तक नहीं पहुंचे जिनके लिए यह योजना शुरू की गई।
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मजदूरों का विरोध प्रदर्शन 40वें दिन भी जारी
मनरेगा संघर्ष मोर्चा ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) मजदूरों की कुछ समस्याओं को दूर करने के लिए सहमत हो गया है। दिल्ली के जंतर मंतर पर मजूदरों के प्रदर्शन का 40वां दिन था। मनरेगा संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन में सचिव एस.के. सिंह, ग्रामीण विकास मंत्रालय और ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक भी शामिल रहे।
14 फरवरी को शुरू हुआ विरोध
मनरेगा में डिजिटल उपस्थिति अनिवार्य किए जाने के मुश्किल से एक महीने बाद 14 फरवरी को राष्ट्रीय राजधानी में विरोध शुरू हुआ। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उनकी हाजिरी नहीं लग रही है और उनका वेतन काटा जा रहा है।