मनरेगा में जो रोजगार दे रहा है, उसी के खिलाफ सर्वाधिक शिकायतें, कामगारों ने खोली पोल
विभिन्न राज्यों के 696 जिलों में मनरेगा के तहत काम चल रहा है। इन जिलों के 7077 ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली 2.69 लाख ग्राम पंचायतों में 14.45 करोड़ जॉब कॉर्ड जारी किए गए हैं। अभी तक कुल 28.07 करोड़ लोगों को काम मिल चुका है...
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना में कई जगह पर गड़बड़ियां देखने को मिल रही हैं। अच्छी बात ये है कि बहुत से राज्यों में लोग इस योजना से जुड़े कथित गोलमाल के बारे में बोलने लगे हैं। भले ही कोई व्यक्ति इस योजना में काम नहीं कर रहा है, लेकिन उसे लगता है कि कहीं कुछ गलत हुआ है तो वह शिकायत देने से पीछे नहीं हटता।
मनरेगा साइट पर काम करने वाले कर्मचारी सबसे ज्यादा पोल खोल रहे हैं। खास बात ये है कि ग्राम पंचायत, जिस पर रोजगार मुहैया कराने की जिम्मेदारी है, उसी के खिलाफ सर्वाधिक शिकायतें मिल रही हैं। अगर टॉप-5 राज्यों में ग्राम पंचायत के विरुद्ध शिकायतों का आंकड़ा देखा जाए तो उसमें उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न राज्यों के 696 जिलों में मनरेगा के तहत काम चल रहा है। इन जिलों के 7077 ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली 2.69 लाख ग्राम पंचायतों में 14.45 करोड़ जॉब कॉर्ड जारी किए गए हैं। अभी तक कुल 28.07 करोड़ लोगों को काम मिल चुका है। एक्टिव जॉब कार्ड की बात करें तो वह संख्या 8.82 करोड़ है।
इसी तरह एक्टिव वर्कर का आंकड़ा 13.64 करोड़ है। मौजूदा स्थिति में 1.32 करोड़ कामगारों को 14.12 लाख साइट पर रोजगार मुहैया कराया गया है। मनरेगा के कंप्लेंट रजिस्ट्रार के मुताबिक साइट पर कई तरह की अनियमितताएं देखने को मिलती हैं। जैसे, ग्राम पंचायत ने काम के लिए नाम पंजीकृत नहीं किया है। जॉब कार्ड नहीं दिया, डेट रिसिप्ट प्रदान नहीं की गई, पांच किलोमीटर में कामकाज की स्थिति ठीक नहीं है। इस दूरी से बाहर काम दिया गया, लेकिन टीए-डीए नहीं दिया।
साथ ही, समय पर काम नहीं मिला, पेमेंट में देरी की जा रही है, आंशिक राशि देकर बाकी राशि रोक ली गई, या फिर भुगतान राशि बिल्कुल ही नहीं दी गई, भुगतान राशि का गलत तरीका, पैमाइश गलत, इंजीनियर के सामने पैमाइश नहीं कराई गई और कार्य स्थल पर स्वास्थ्य सुविधाएं ठीक नहीं थी, इस तरह की अनेक शिकायतें मिल रही हैं। इनके अलावा स्किल्ड और सेमी स्किल्ड को नियमानुसार वेतन नहीं देना, फंड जारी करने में देरी, कार्य स्थल पर घटिया गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल और जॉब के लिए आवेदन स्वीकार न करना, जैसी शिकायतें भी मिलती हैं।
मनरेगा में इन लोगों के जरिए मिली शिकायतें:
नागरिक- 5904
वर्कर- 16221
ग्राम पंचायत- 125
प्रोग्राम अफसर- 182
डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम कोर्डिनेटर- 116
गैर-सरकारी संस्था- 332
वीआईपी- 442
मीडिया- 380
इंजीनियर- 57
बैंक- 01
डाकघर- 01
इनके खिलाफ मिली हैं सबसे ज्यादा शिकायतें:
ग्राम पंचायत- 21747
ब्लॉक पंचायत- 1080
प्रोग्राम अफसर- 1007
जिला परिषद- 669
डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम कोर्डिनेटर- 859
लागू करने वाली एजेंसी- 345
कुल शिकायतें- 25707
किसके पास कितनी हैं पेंडिंग शिकायतें:
प्रोग्राम अफसर- 630
डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम कोर्डिनेटर- 744
स्टेट- 13630
केंद्र- 421
मौजूदा स्थिति:
पेंडिंग- 13808
फारवर्ड की गई- 2878
त्वरित जवाब दिया- 33
आंशिक तौर पर खत्म- 21
पूरी तरह समाप्त- 8970
टॉप 5 राज्यों में ग्राम पंचायत के खिलाफ मिली शिकायतें
उत्तर प्रदेश- 5461
कर्नाटक- 2842
महाराष्ट्र- 2131
राजस्थान- 1915
मध्यप्रदेश- 1888