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मेघालय में बीमार बेटे को बचाने मां 3 घंटे पैदल चली: गोद में ही दम तोड़ा मासूम ने; गांव तक वाहन क्यों नहीं आया?
Sun, 04 Oct 2026 06:30 AM IST
निर्मल कांत
एजेंसी, शिलॉन्ग।
एजेंसी, शिलॉन्ग।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 04 Oct 2026 06:30 AM IST
सार
मेघालय में खराब सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण एक मां अपने बीमार बेटे को करीब तीन घंटे गोद में लेकर पैदल चली। अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। पूरा मामला क्या हुआ? इस रिपोर्ट में जानिए।
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मेघालय में बीमार बेटे को बचाने मां 3 घंटे पैदल चली
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली किस कदर मरीजों पर भारी पड़ रही है, इसका उदाहरण इस बार मेघालय से सामने आया है। राज्य के पश्चिम खासी हिल्स जिले के डोमक्यरकोह गांव में अपने बीमार बेटे को बचाने के लिए मां करीब तीन घंटे तक उसे गोद में लेकर पैदल चलती रही, लेकिन वह बच्चे को बचा नहीं सकी।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्चा जिंदगी की जंग हार गया और मां की गोद में दम तोड़ दिया। ग्रामीणों के अनुसार, बच्चे की तबीयत बिगड़ने के बाद माता-पिता ने उसे अस्पताल ले जाने के लिए रातभर वाहन की व्यवस्था करने की कोशिश की। गांव तक पहुंचने वाली सड़क बेहद खराब होने के कारण वाहन चालक वहां आने को तैयार नहीं हुए। चालकों ने परिवार से कहा था कि वे बच्चे को करीब 10 किलोमीटर दूर मावडेट गांव तक लेकर आएं, जहां से वाहन मिल सकता है।
ये भी पढ़ें: लातूर में सूखे की मार: पशुओं के चारे का भी संकट, बच्चों ने गुल्लक फोड़कर दिए 2 लाख; कैसे जुटाई रकम?
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एक मासूम की मौत ने व्यवस्था पर उठाए सवाल: इस घटना ने केवल एक परिवार को नहीं झकझोरा है, बल्कि दूरदराज इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में इलाज में होने वाली देरी कभी-कभी जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन जाती है। गांव के मुखिया बी. सियेम ने घटना की पुष्टि की और प्रशासन से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की अपील की।
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अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्चा जिंदगी की जंग हार गया और मां की गोद में दम तोड़ दिया। ग्रामीणों के अनुसार, बच्चे की तबीयत बिगड़ने के बाद माता-पिता ने उसे अस्पताल ले जाने के लिए रातभर वाहन की व्यवस्था करने की कोशिश की। गांव तक पहुंचने वाली सड़क बेहद खराब होने के कारण वाहन चालक वहां आने को तैयार नहीं हुए। चालकों ने परिवार से कहा था कि वे बच्चे को करीब 10 किलोमीटर दूर मावडेट गांव तक लेकर आएं, जहां से वाहन मिल सकता है।
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एक मासूम की मौत ने व्यवस्था पर उठाए सवाल: इस घटना ने केवल एक परिवार को नहीं झकझोरा है, बल्कि दूरदराज इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में इलाज में होने वाली देरी कभी-कभी जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन जाती है। गांव के मुखिया बी. सियेम ने घटना की पुष्टि की और प्रशासन से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की अपील की।