Meghalaya: कांग्रेस के बिगड़े बोल कैसे बने पीएम मोदी के लिए सियासी हथियार? नॉर्थ-ईस्ट में किया 'कब्र' का जिक्र
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विस्तार
जैसे-जैसे विधानसभा लोकसभा के चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे ही सियासी सरगर्मियां भी तेज होती जा रही हैं। खासतौर से चुनावी माहौल में कांग्रेस की ओर से दिए जाने वाले बयानों को भाजपा जिस तरीके से सियासी हथियार बना लेती है, इस बार भी कुछ उसी तरीके की तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिलांग की एक रैली में 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' वाले कांग्रेसी नेताओं के नारे पर सियासी दांव चल दिया है। सियासी गलियारों में चर्चाएं इसी बात की हो रही है कि एक बार फिर कांग्रेस ने चुनावी दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ठीक वैसा ही हमला किया है, जैसा बीते कुछ चुनावों में तल्ख़ शब्द शैली के साथ किया जाता रहा है। भाजपा के नेता जनता के बीच में सियासी रूप से जमकर भुनाते भी हैं। गुजरात में रावण और औकात जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने के बाद भाजपा ने इन चुनावों में उसको जमकर भुनाया था।
कांग्रेस को उसके ही जाल में फंसाना शुरू
नार्थ-ईस्ट में रैली कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार दोपहर को जब शिलांग में आयोजित एक रोड शो खत्म करने के बाद जनसभा को संबोधित किया, तो भाजपा की विधानसभा चुनावों से लेकर लोकसभा चुनाव तक सियासी दांव की मार समझ में आने लगी। इस रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोगों ने शिलांग को एटीएम समझ लिया था। यहां के लोगों को प्राथमिकता नहीं दी गई। इसी वजह से यहां के युवाओं का बड़ा नुकसान हुआ। अपनी शैली में लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा निराशा में डूबे हुए लोग माला जप रहे हैं। माला जपते-जपते कह रहे हैं 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी', लेकिन देश कह रहा है मोदी तेरा कमल खिलेगा। राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिलांग में 'कब्र' का जिक्र करके आने वाले चुनावों से लेकर लोकसभा तक के चुनावों के लिए कांग्रेस को उसके ही तैयार किए गए जाल में फंसाना शुरू कर दिया है।
ऐसे बयानों से कांग्रेस को हुआ है नुकसान
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनाव से पहले हमेशा से कुछ ऐसा होता रहा है कि सियासी नारों के बाद सियासी सरगर्मियां में उनकी तब्दीली होती रही है। 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' जैसी नारेबाजी करके कांग्रेस ने एक तरह से खुद को फंसा लिया है। राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि बीते कुछ चुनावों को अगर आप देखें, तो अंदाजा लगाना आसान हो जाता है कि कांग्रेस के नेताओं की ओर से मोदी के लिए की गई व्यक्तिगत टिप्पणी उनके लिए नुकसानदायक साबित हुई। भाजपा उनके ही बयानों को अपनी रैलियों में आगे करके कांग्रेस को घेर लेती है। शुक्ला कहते हैं कि गुजरात में जिस तरीके से कांग्रेस के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 'रावण' से लेकर 'औकात' शब्द का इस्तेमाल किया, उसे भाजपा ने कितना आक्रामकता के साथ गुजरात के चुनावों में भुनाया, यह किसी से छुपा नहीं है। अब जब एक बार फिर नॉर्थ-ईस्ट में चुनाव है और उसके बाद राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक समेत कई अन्य बड़े राज्यों में चुनाव होने हैं, तो कांग्रेस के नेताओं की ओर से "मोदी तेरी कब्र खुदेगी" जैसे नारे लगाना कांग्रेस के लिए कोई सियासी नफा का सौदा तो नहीं हो सकता।
सियासी जानकार बताते हैं कि कांग्रेस के नेताओं की ओर से जब-जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल किए गए, हमेशा भाजपा ने सियासत के मैदान में उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करके लीड भी ली है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि कांग्रेस के नेता लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर व्यक्तिगत टिप्पणियां करते आ रहे हैं। सियासत में यह तरीका ठीक नहीं है। पार्टी की रणनीति बनाने वाले भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि आने वाले चुनावों में उनकी पार्टी जनता के सामने वह सभी शब्द रखेगी जो कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बोलते हैं। सियासी जानकार बताते हैं कि भाजपा इस मामले में बिल्कुल चूकने वाली नहीं है।
दूसरे चुनावी राज्यों पर भी पड़ेगा असर
राजनीतिक विश्लेषक अनिरुद्ध कुमार कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे गुजरात में 'औकात' शब्द को लेकर जनता के बीच में कांग्रेस को घेरा था ठीक उसी तरीके से शुक्रवार को 'कब्र खोदने' वाले नारे का जिक्र करके कांग्रेस को फिर घेर लिया है। हालांकि अनिरुद्ध कहते हैं कि नार्थ ईस्ट में इसका कितना असर पड़ेगा, यह कहना तो मुश्किल है। लेकिन यह जरूर है जब चुनाव राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे दूसरे राज्यों में होंगे, तो जरूर इन शब्दों को भाजपा में मजबूती से भुनाएगी। वहीं ऐसे मामलों में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि भाजपा के नेता भी उनकी पार्टी के नेताओं पर ऐसे ही अपशब्दों की बौछार करते हैं। लेकिन कांग्रेस सियासी मैदान में चुनावी मुद्दों के साथ बढ़ती है न कि किसी आरोप और प्रत्यारोप में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों को लेकर। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि भाजपा के पास जब कहने को कुछ नहीं होता है तो इस तरीके वह अपना बचाव करने लगती है।