#MeToo : एमजे अकबर पर कार्रवाई को लेकर उलझन में भाजपा
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मी टू अभियान के तहत विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर पर एक के बाद एक नौ महिला पत्रकारों की तरफ से यौन शोषण का आरोप लगाने के बाद भाजपा नेतृत्व में ऊहापोह की स्थिति है। अकबर इस अभियान के निशाने पर आए देश के पहले राजनीतिज्ञ हैं और उन पर कार्रवाई की जाए या नहीं, इस बात का फैसला लेने के लिए भाजपा और सरकार में मंथन का दौर चल रहा है। हालांकि माना जा रहा है कि शुक्रवार को नाइजीरिया दौरे से लौट रहे अकबर से स्पष्टीकरण लेने के बाद ही उनके भविष्य पर फैसला किया जाएगा।
दरअसल मी टू अभियान में अकबर का नाम उछलने के बाद से सरकार और भाजपा प्रबंधन लगातार इस पर मंथन कर रहा है कि उनका इस्तीफा कराने या नहीं कराने का क्या प्रभाव होगा। यदि अकबर का इस्तीफा लिया जाता है तो ये वर्तमान सरकार में किसी मंत्री का इस्तीफा लेने का पहला मामला होगा।
ऐसे में इस बात पर भी मंथन हो रहा है कि इस्तीफा लेने का पार्टी और सरकार की छवि पर क्या असर पड़ेगा। हालांकि फिलहाल यह तय किया गया है कि इस मामले में निर्णय लेने से पहले विदेश राज्य मंत्री का पक्ष जानना चाहिए। इसके बाद अगर जरूरत पड़ी तो नेतृत्व अकबर को खुद नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की घोषणा करने का निर्देश देगा।
सरकार के अंदर से ही उठ रही आवाज
पार्टी और सरकार में भले ही मी टू अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन पार्टी की केंद्रीय और राज्यों की सत्ता से जुड़े कई मंत्रियों और नेताओं ने मामले की जांच को जरूरी बताया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रीता बहुगणा जोशी, सरकार की सहयोगी आरपीआई के मुखिया और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, दूसरी सहयोगी शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने आरोपों की जांच कराने की सलाह दी है।