Politics: इस दिन पड़ी थी अखिलेश-स्टालिन की जुगलबंदी की नींव! तब से दिख रही है इन नेताओं की अलग सियासी बॉन्डिंग
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विस्तार
अखिलेश यादव और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की वीपी सिंह की मूर्ति के अनावरण पर हुई मुलाकात से देश की सियासत में बड़ी हलचल मचनी शुरू हो गई है। सियासी गलियारों में कयास यही लगाए जा रहे हैं कि एमके स्टालिन और अखिलेश के साथ अब एक तीसरे बड़े गठबंधन का भी उदय हो सकता है। लेकिन हकीकत यही है कि जिस जुगलबंदी के आधार पर सियासत में ये हलचल मचनी शुरू हुई है, उसकी नींव कुछ महीने पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के जन्मदिन पर ही पड़ चुकी है। सियासी गलियारों में कयास तभी से लगाए जाने लगे थे कि लोकसभा चुनावों से पहले की सियासत में एमके स्टालिन और अखिलेश की जोड़ी के साथ जुड़ने वाले कई सियासी दल एक समानांतर मजबूत गठबंधन बनाने की ओर आगे बढ़ सकते हैं।
I.N.D.I.A गठबंधन के प्रमुख दलों में शामिल समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और उनके स्टालिन की जुगलबंदी से सियासी गलियारों में तमाम तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। कहा यही जा रहा है कि पिछड़ों की राजनीति को आगे करने के लिए वीपी सिंह की मूर्ति के अनावरण के मौके पर जब अखिलेश यादव और एमके स्टालिन चेन्नई में मिले, तो इंडिया गठबंधन में शामिल कई सियासी दलों में एक उम्मीद भी जगी है। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार धीरेन बनर्जी कहते हैं कि विपक्षी दलों के गठबंधन में शामिल नेताओं में अखिलेश यादव और एमके स्टालिन की जुगलबंदी सिर्फ वीपी सिंह की मूर्ति के अनावरण के समय ही मजबूत नहीं हुई है। वह कहते हैं कि अगर कुछ सियासी पन्ने पलटे जाएंगे, तो इसी साल के शुरुआत में एमके स्टालिन के जन्मदिन पर आयोजित किया गया कार्यक्रम इस जुगलबंदी में मजबूती का शुरुआती नींव का पत्थर था। उसके बाद से जो भी गठबंधन में नेताओं की जो जुगलबंदी होती रही, उनमें अखिलेश और स्टालिन के रिश्ते और प्रगाढ़ ही होते रहे।
सियासी जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से बीते कुछ समय से I.N.D.I.A गठबंधन की निष्क्रियता सामने आई है, उसमें स्टालिन और अखिलेश यादव की जुगलबंदी के साथ विपक्षी धड़े के कुछ राजनीतिक दलों को एक और नई उम्मीद दिखनी शुरू हुई है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषण जटाशंकर सिंह कहते हैं कि विपक्षी दलों के गठबंधन में अखिलेश यादव की सिर्फ एमके स्टालिन के साथ ही मजबूत पटरी नहीं खाती है, बल्कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अखिलेश यादव की जुगलबंदी भी देश की सियासत में एक अलग स्थान रखती है। वह कहते हैं कि समाजवादी पार्टी की पश्चिम बंगाल में आयोजित कार्यकारिणी की अहम बैठक से इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि अखिलेश यादव पश्चिम बंगाल में खासतौर से ममता बनर्जी के साथ मिलकर सियासत में आगे की योजनाएं बना रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वैसे तो सियासी गठबंधन I.N.D.I.A में अभी तक की अगुवाई बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर रहे थे। बीते कुछ समय में गठबंधन में निष्क्रियता पर नीतीश कुमार ने भी खुले मंच से निशाना साधा है। राजनीतिक विश्लेषक देवाशीष बनर्जी कहते हैं कि वैसे तो विपक्षी दलों के सभी प्रमुख सियासी दलों को एक मंच पर लाने के लिए नीतीश कुमार ने मेहनत की है। लेकिन अभी भी इन सब में अखिलेश यादव एक ऐसे कॉमन नेता हैं, जो विपक्षी दलों के कई अहम राजनीतिक दलों के नेताओं में सबको अलग-अलग तरह से एकजुट भी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अखिलेश यादव इससे पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुके हैं। वह स्टालिन के जन्मदिन पर कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ मंच साझा कर चुके हैं। अब वह वीपी सिंह की मूर्ति के अनावरण के मौके पर विशेष अतिथि के तौर पर चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में मौजूद रहते हैं। इसके अलावा अखिलेश यादव की बिहार में नितीश कुमार गठबंधन के साथ चल रही आरजेडी के नेताओं के साथ ही अच्छी पकड़ है। पारिवारिक नातेदारी के चलते अखिलेश यादव लालू यादव के बीच रिश्ते भी बेहतर हैं। केसीआर पहले ही अखिलेश यादव और ममता बनर्जी के साथ मिलकर बड़े गठबंधन की ओर चलने का इशारा कर चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है I.N.D.I.A गठबंधन से पहले की सियासत को अगर बारीकी से समझा जाए, तो पता चलता है कि इस साल की शुरुआत में केसीआर की रैली में अरविंद केजरीवाल शामिल होते हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी शामिल होते हैं। फिर अखिलेश यादव तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के साथ जन्मदिन पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होते हैं। इसमें केजरीवाल तो नहीं शामिल हुए, लेकिन फारूक अब्दुल्ला से लेकर मल्लिकार्जुन खरगे तक शामिल होते हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि माना यही जा रहा है कि अगर I.N.D.I.A गठबंधन में किसी भी तरीके की टूट होती है, तो एक नए मोर्चे के गठन के भी कयास लगाए जा सकते हैं।
हालांकि वीपी सिंह की मूर्ति के अनावरण के दौरान हुई अखिलेश और स्टालिन की मुलाकात के बाद INDIA गठबंधन में शामिल सियासी दलों और बड़े नेताओं ने ठप पड़ी गठबंधन की राहों को तेजी देने की योजनाएं बननी शुरू हुईं हैं। गठबंधन में शामिल एक प्रमुख दल के नेता बताते हैं कि 3 दिसंबर को परिणाम आने के बाद विपक्षी दलों के गठबंधनों की पहले से तय बैठकों के दौर शुरू होंगे और आगे की सियासी रणनीति भी तय की जानी है। हालांकि यह बैठक कब और कहां होनी है, इसे लेकर अभी किसी तरीके की कोई जानकारी तो गठबंधन के नेताओं के पास नहीं है। लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि उत्तर भारत के किसी राज्य में गठबंधन की सियासी राह को आगे बढ़ने का का खाका खींचा जाएगा।