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पीएम मोदी के वो नवरत्न, जिनकी मेहनत से साकार हुई अनुच्छेद-370 की विदाई

Tue, 06 Aug 2019 04:42 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Tue, 06 Aug 2019 04:42 PM IST
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Meet Prime Minister Narendra Modi core team members, who helped to Scrapped Article 370 in J&K
पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह - फोटो : PTI

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जब 26 जून को कश्मीर का दौरा किया था, उस वक्त खबरें आई थीं कि वे अमरनाथ यात्रा की तैयारियों का जायजा लेने के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस के शहीद अधिकारी निरीक्षक अरशद अहमद खान के परिजनों से मिलेंगे। लेकिन उनका यह दौरा 'धारा-370' को खत्म करने की दिशा में पहला कदम था। जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने खास नौ लोगों को धारा-370 की विदाई का खाका तैयार करने की जिम्मेदारी दी।

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घोषणा पत्र में छह बार धारा-370 का उल्लेख

इन लोगों में अमित शाह के अलावा विदेश मंत्री एस.जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रॉ प्रमुख सामंत गोयल और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव एवं पीएमओ में पूर्व संयुक्त सचिव के तौर पर काम कर चुके मोदी के भरोसेमंद बी.वी.आर सुब्रमणयम आदि शामिल हैं। धारा-370 हटाने की रुपरेखा मोदी सरकार 2.0 के शपथ ग्रहण के बाद से ही तैयार होने लगी थी। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में जारी भाजपा के घोषणा पत्र में छह बार धारा-370 का उल्लेख किया गया था।

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कश्मीर पर हुईं 47 बैठकें

सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी होने के साथ ही प्रधानमंत्री ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत अपने नौ रत्नों को इस काम पर लगा दिया। मिशन को कामयाब होने में करीब एक माह का वक्त लग गया। इस दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच तकरीबन 47 बैठकें हुईं। यहां तक कि एक जून के बाद से जम्मू-कश्मीर में हो रही सभी अहम घटनाओं की रिपोर्ट प्रतिदिन प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को भेजी जाती रहीं।

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इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय भी जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के साथ निरंतर संपर्क में रहा। सूत्रों का कहना है कि इस मसले पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्री अमित शाह के बीच एक बैठक भी हुई थी। इन अहम लोगों के अलावा इस मिशन में कई ऐसे चेहरे भी रहे, जो भले ही प्रत्यक्ष भूमिका में नजर न आएं हों, लेकिन उनके योगदान को कम नहीं आंका जा सकता। इनमें केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा, आर्मी चीफ विपिन रावत और गृह मंत्रालय में कश्मीर डेस्क के संयुक्त सचिव आदि भी शामिल हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

केंद्र में गृहमंत्री का पदभर संभालने के बाद उन्होंने कश्मीर का दौरा किया। नए जम्मू-कश्मीर को लेकर उन्होंने राज्यपाल सत्यपाल मलिक, वरिष्ठ अधिकारियों और आमजनों से सलाह-मशविरा किया। राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और राज्यपाल के तीन सलाहकारों के साथ उन्होंने अलग से बैठक की। दिल्ली लौटने के बाद अमित शाह ने कश्मीर घाटी के स्कूल-कालेजों और ग्राम पंचायतों से संबंधित एक विशेष रिपोर्ट तैयार कराई। धारा-370 हटाने के बाद कहां पर पथराव की संभावनाएं हैं, उन्हें उकसाने वाले तत्वों की पहचान के साथ उपद्रव कराने वाले अलगाववादी नेताओं के बारे में जानकारियां पहले ही जुटा ली गई थी। संसद में यह प्रस्ताव लाए जाने तक अमित शाह इस मिशन के सभी नौ रत्नों की धुरी बने रहे।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर

धारा-370 हटने के बाद अंतरराष्ट्रीय पटल पर कैसी प्रतिक्रियायें आएंगी, उनका क्या जवाब देना है और किन देशों के राजदूतों से मिलना है, यह सब पहले ही तय कर लिया गया। रॉ के सूत्र बताते हैं, इस मिशन को लेकर अमेरिका को पहले ही इशारा कर दिया गया था। वहीं अरब देशों के कई राजदूतों से मिलकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपना होमवर्क तय समय से पहले ही पूरा कर लिया।

एनएसए अजीत डोभाल

यह कहना गलत नहीं होगा कि जमीनी तौर पर यह मिशन अजीत डोभाल के चारों ओर घूमता रहा है। वे ख़ुद पाकिस्तान और कश्मीर मामलों के मास्टर रहे हैं, इसलिए धारा-370 के मिशन की हर फाइल उनकी टेबल से होकर गुजरी है। अमित शाह के बाद वे भी दो दिन के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचे। उन्होंने राज्यपाल के तीनों सलाहकारों के साथ बैठक की। मुख्यसचिव, डीजीपी और खुफिया विभाग के अफसरों से अपडेट लिया।

डोभाल ने वहां की सिविल सोसायटी के कई लोगों से भी बातचीत की थी। मिशन पूरा होने के दौरान या उसके बाद नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी सेना, आईएसआई और बॉर्डर ऐक्शन टीम की हरकतों को कैसे मुंह तोड़ जवाब देना है, ये सभी तैयारियां पहले ही कर ली गई थीं।

रॉ सेक्रेट्री सामंत गोयल

एनएसए के दौरे के क़रीब एक सप्ताह बाद रॉ सेक्रेट्री सामंत गोयल भी दो दिन के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंच गए और कई जगहों पर बैठक की। ख़ास बात ये रही कि वे सीमावर्ती इलाकों में भी गए। उन्होंने आतंकियों के छिपे होने के अलर्ट, सीमा पार से मिल रही मदद और स्थानीय लोगों के वेश में पाक समर्थित आतंकी समूहों के गुर्गों आदि की जानकारी ली। सीमा के किस हिस्से पर और घाटी में कहां क्या हो सकता है, यह होमवर्क तय समय पर कर लिया गया। आतंकियों के छिपने के संभावित ठिकानों से लेकर पाकिस्तानी हरकत का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर फोन इंटरसेप्ट की मदद ली गई।

मुख्य सचिव बी.वी.आर सुब्रमणयम

मिशन-370 के दौरान जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली से लेकर अभी तक की जो परिस्थितियां बनी हैं, उनमें सुब्रमणयम की अहम भूमिका रही है। पीएमओ में संयुक्त सचिव रह चुके सुब्रमणयम की कश्मीर को लेकर इनकी महारत से मोदी बखूबी परिचित हैं। इन्हें 2018 में जम्मू-कश्मीर भेजा गया था। पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह भी इनकी कार्यशैली से अच्छी तरह से वाक़िफ हैं। वहीं इनके पास नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी काम करने का खासा अनुभव है।

आईबी चीफ अरविंद कुमार

नए खुफिया प्रमुख अरविंद कुमार को भी कश्मीर मामलों का एक्सपर्ट माना जाता है। उन्होंने आईबी में बतौर विशेष निदेशक रहते हुए जम्मू-कश्मीर को लेकर वहां की सामाजिक परिस्थितियों और आतंकवाद की घटनाओं के बारे में एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट में बॉर्डर से लेकर राज्य के गांवों तक को शामिल किया गया। बताया जाता है कि उनकी यह रिपोर्ट धारा-370 को खत्म करने की राह आसान करने में कारगर साबित हुई।

केंद्र के विशेष प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा

आईबी के पूर्व चीफ रह चुके दिनेश्वर शर्मा ने जम्मू-कश्मीर में विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर वहां के माहौल पर जानकारी हासिल की। धारा-370 खत्म करने के बाद कैसे हालात होंगे और उस पर नियंत्रण करने के लिए कौन से कदम उठाए जाएं, इस बाबत उन्होंने एक रिपोर्ट तैयार कर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को सौंपी।

दिलबाग सिंह, डीजीपी जम्मू-कश्मीर

इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का विश्वस्त माना जाता है। धारा-370 की भूमिका तैयार करने में इनका विशेष योगदान है। पिछले एक माह के दौरान इन्होंने जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इनकी फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद ही सोमवार को संसद में धारा-370 को खत्म करने का एलान किया।

फारुख खान, पूर्व पुलिस अधिकारी

जम्मू कश्मीर पुलिस में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के पद से रिटायर हुए 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी फारूक खान गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई के मध्य में जम्मू कश्मीर के राज्यपाल का सलाहकार नियुक्त किया गया था। कभी जम्मू कश्मीर पुलिस के तेज-तर्रार अधिकारियों में गिने जाने वाले फारूक आतंकवाद विरोधी रणनीति और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर राज्य प्रशासन का मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

राज्य के चप्पे-चप्पे से वाकिफ खान को कानून व्यवस्था बनाए रखने में खासी महारत हासिल है। जम्मू-कश्मीर में किस जगह पर दंगा या पत्थरबाज हरकत कर सकते हैं, वह सभी जानकारियां इनके पास थीं। किस नेता को कब और नजरबंद करना है, ये सब इन्हीं की रणनीति थी। मौजूदा समय में कहां पर किस तरह की फोर्स तैनात करनी है, इसमें भी फारूख खान के फार्मूले पर काम किया गया।



हालांकि जम्मू से आने वाले फारूक ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की सेवा से अवकाश ग्रहण करने के बाद उन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी।

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