मिलिए रोबोटिक नवजात शिशु ‘लूसी’ से: एआई समिट में किया गया पेश, क्या बदल जाएगा मेडिकल ट्रेनिंग का तरीका?
नई दिल्ली के एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में 2.5 किलो का रोबोटिक नवजात ‘लूसी’ चर्चा में रहा। एआई और मशीन लर्निंग से लैस यह फेफड़े सिम्युलेटर डॉक्टरों को श्वसन रोगों का वास्तविक जैसा प्रशिक्षण देता है। बताया जा रहा है कि इसके आने के बाद अब असली बच्चों पर अभ्यास की जरूरत नहीं, सुरक्षित और नैतिक तरीके से ट्रेनिंग संभव होगी।
विस्तार
भारत में एआई और मेडिकल प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक नई क्रांति शुरू हो गई है। नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भारतीय कंपनियों ने अत्याधुनिक तकनीकी नवाचार पेश किए, जो आत्मनिर्भर भारत को वैश्विक मंच पर मजबूती दे रहे हैं। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रोबोटिक नवजात 'लुसी' (फेफड़े सिम्युलेटर) बना, जो डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को वास्तविक जीवन जैसे श्वसन प्रशिक्षण का अनुभव देने वाला और स्वास्थ्य क्षेत्र में नया मानक स्थापित करने वाला माना जा है।
2.5 किलो का रोबोटिक नवजात 'लूसी' को आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन के स्टॉल में दिखाया गया। बताया जा रहा है कि इस रोबोटिक शिशु 'लूसी' को बनाने का मकसद डॉक्टरों को प्रशिक्षण देना है। इसे मेवरिक सिमुलेशन सॉल्यूशंस ने विकसित किया है। बताया जा रहा है कि 'लूसी' सिर्फ एक मानवाकृति नहीं है, बल्कि एआई और मशीन लर्निंग से लैस शिशु फेफड़े का सटीक सिम्युलेटर है।
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'लूसी' क्यों खास है?
मेवरिक सिमुलेशन सॉल्यूशंस के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट अजित कुमार ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि यह रोबोटिक शिशु किसी भी प्रकार की श्वसन समस्याओं को दिखा सकता है। अब डॉक्टर वास्तविक बच्चों पर प्रयोग करने की बजाय इस मॉडल पर अभ्यास कर सकते हैं। इससे नैतिक और व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षण आसान और सुरक्षित हो गया है।
वास्तविक उपकरणों के साथ प्रतिक्रिया
बताया जा रहा है कि 'लूसी' इतने उन्नत हैं कि यह रियल वेंटिलेटर और ऑक्सीजन पर असली बच्चे की तरह प्रतिक्रिया देता है। इसकी फिजियोलॉजिकल ऑटोनॉमी के चलते दिल की धड़कन, ऑक्सीजन स्तर और फेफड़ों की स्थिति वास्तविक समय में स्क्रीन पर दिखाई देती है। कुमार ने बताया कि इसका उपयोग श्वसन प्रशिक्षण में होता है। इससे विभिन्न परिस्थितियों जैसे रेसिस्टेंस बढ़ना या कम्प्लायंस घटने पर डॉक्टर सीख सकते हैं कि अलग-अलग दबाव कैसे मैनेज करें। एम्स, एफएमजी और पीजीआई जैसे मेडिकल संस्थान इसे अपनी ट्रेनिंग में इस्तेमाल कर रहे हैं।
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अन्य एआई-इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग
हालांकि एआई समिट में ध्यान केंद्रित करने का सबसे बड़ा वजह 'लूसी' ही नहीं है। इसके अलावा स्टॉल में ATHER, एक और मानव-निर्देशित सिम्युलेटर भी प्रदर्शित किया गया। यह दिखाता है कि भारत एआई और मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। बता दें कि 'लूसी' और ऐसे उपकरणों का मुख्य लक्ष्य है नवजात शिशुओं की सुरक्षा और मृत्यु दर कम करना। इससे नर्स और डॉक्टर NICU में CPAP, NCPAP और मैकेनिकल वेंटिलेशन जैसे जटिल प्रॉसिजर्स पर अभ्यास कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि जब वास्तविक जीवन में संकट आए, तो चिकित्सा कर्मी पूरी तरह तैयार हों।
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