गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की घोषणा पर भारत ने कहा, पाक के पास कानूनी आधार नहीं
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की पाकिस्तान की घोषणा के बारे में रिपोर्टों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि 'पाकिस्तान द्वारा तथाकथित कब्जा किए गए गिलगित-बाल्टिस्तान में सैन्य स्थिति को बदलने के लिए कोई भी कार्रवाई का कोई कानूनी आधार नहीं है और जो भी है, पूरी तरह से शून्य है।'
Any action by Pakistan to alter the status of the military occupied so-called 'Gilgit-Baltistan' has no legal basis whatsoever & totally void: MEA Spokesperson Anurag Srivastava on reports about Pakistan's announcement to hold elections in Gilgit Baltistan pic.twitter.com/0dZRpLUy29
— ANI (@ANI) September 24, 2020
गिलगित-बाल्टिस्तान में 15 नवंबर को चुनाव कराएगा पाकिस्तान
भारत द्वारा कड़ी आपत्ति दर्ज कराए जाने के बावजूद पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के लिए 15 नवंबर को चुनाव कराने की घोषणा की है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में इससे पहले चुनाव स्थगित कर दिया गया था। राष्ट्रपति डॉ. आरिफ अल्वी ने बुधवार को इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की।
वक्तव्य में कहा गया है कि “पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र के राष्ट्रपति घोषणा करते हैं कि चुनाव अधिनियम 2017 की धारा 57 (1) के तहत रविवार, 15 नवंबर 2020 को गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा में आम चुनाव कराए जाएंगे।”
भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान समेत जम्मू कश्मीर और लद्दाख संघ शासित प्रदेश के संपूर्ण भूभाग का भारत में पूर्ण रूप से वैधानिक और स्थाई विलय हुआ था इसलिए यह देश का अभिन्न अंग है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार या उसकी न्यायपालिका का उन क्षेत्रों पर कोई अधिकार नहीं है, जिनपर अवैध रूप से कब्जा किया गया था।
गिलगित-बाल्टिस्तान में पहले 18 अगस्त को चुनाव होने थे, लेकिन चुनाव आयोग ने कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए 11 जुलाई को चुनाव की प्रक्रिया टाल दी थी। चुनाव की नई तारीखों का एलान गिलगित-बाल्टिस्तान को पूर्ण प्रांत का दर्जा दिए जाने की खबरों के बीच किया गया है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के बीच 16 सितंबर को हुई बैठक में चर्चा की गई थी।