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तमिलनाडु के सांसद वाइको का विवादित बयान, कहा- हिंदी से गिरा संसद में बहस का स्तर

Mon, 15 Jul 2019 07:19 PM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ;चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ;चेन्नई Published by: गौरव द्विवेदी Updated Mon, 15 Jul 2019 07:19 PM IST
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MDMK Vaiko said Hindi in Parliament brought down the standard of Debates
एमडीएमके के जनरल सेक्रेटरी और सांसद वाइको - फोटो : ANI

तमिलनाडु में एमडीएमके के जनरल सेक्रेटरी और सांसद वाइको के एक बयान से बवाल खड़ा हो गया है। एक अंग्रेजी अखबर को दिए इंटरव्यू में वाइको ने कहा कि संसद में हिंदी में दिए जाने वाले भाषणों की वजह से सदन में बहस का स्तर गिर गया है। इंटरव्यू में वाइको से पूछा गया कि संसद में भाषण के गिरते स्तर के पीछे क्या वजह है? तब उन्होंने जवाब दिया कि पहले संसद में विभिन्न विषयों पर गहरी जानकारी रखने वालों को भेजा जाता था। आज डिबेट का स्तर हिंदी की वजह से गिर गया है। वे बस हिंदी में चिल्लाते हैं। यहां तक की पीएम मोदी भी सदन को हिंदी में संबोधित कर रहे हैं। 

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वाइको ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू एक महान लोकतंत्रवादी थे और वो शायद ही कभी संसद का सत्र मिस किए हो, लेकिन मोदी कभी कदा ही संसद सत्र में हिस्सा लेते हैं। वाइको ने नेहरू और मोदी की तुलना करते हुए कहा कि वो पहाड़ थे तो मोदी उसका एक हिस्सा हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि हिंदी में कौन सा साहित्य है? इसकी कोई जड़ नहीं है और संस्कृत एक मृत भाषा है।
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तमिलनाडु विधानसभा में गूंजा था हिंदी, अंग्रेजी में परीक्षा का मुद्दा


उन्होंने अन्ना का उदाहरण पेश करते हुए कहा कि 8वीं अनुसूची में सभी भारतीय भाषाओं को आधिकारिक भाषा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सभी भाषाओं को आधिकारिक भाषा बनाया जा सकता है तो अंग्रेजी को भी जगह दी जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंगेजी तो सभी के लिए सामान्य होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने और कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

द्रमुक कांग्रेस का वॉकआउट


तमिलनाडु में डाक परीक्षाएं हिंदी और अंग्रेजी में कराए जाने का मुद्दा सोमवार को विधानसभा में गूंजा, जिसका विरोध करते हुए मुख्य विपक्षी दल द्रमुक के विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया। विपक्षी दलों कांग्रेस और यूनियन मुस्लिम लीग ने भी केवल दो भाषाओं में ही परीक्षा कराये जाने का विरोध किया।


गौरतलब है कि केंद्र ने रविवार को सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी में डाक परीक्षाएं आयोजित की थीं, जिसका राजनीतिक दलों ने विरोध किया है। द्रमुक विधायक टी थेन्नारासुन ने प्रश्नकाल खत्म होते ही इस मुद्दे को उठाया और राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिये विशेष चर्चा की मांग की। उन्होंने दावा किया कि इसका मकसद दक्षिणी राज्यों के लोगों को केंद्र सरकार की सेवाओं में शामिल होने से रोकना है। 

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