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कर्नल महादिक की शहादत के बाद सेना में शामिल हुई पत्नी, बनी लेफ्टिनेंट

Sun, 10 Sep 2017 06:25 AM IST
amarujala.com- presented by: देव कश्यप
amarujala.com- presented by: देव कश्यप Updated Sun, 10 Sep 2017 06:25 AM IST
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Martyr wife start new lives as Army officers
बच्चों के साथ स्वाति महादिक

चेन्नई के ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) से पासआउट होकर करीब 300 कैडेट्स शनिवार को सेना में अधिकारी बन गए। एकेडमी की द्विवार्षिक परेड पूरी करने के बाद 266 जेंटलमैन कैडेट और 31 महिला कैडेट्स को सेना में कमीशन मिला है।

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धैर्य, साहस और समर्पण की इससे उम्दा मिसाल नहीं हो सकती। जिस वर्दी को पहनकर पति ने अपनी शहादत दे दी पत्नी ने भी बड़े गर्व के साथ उसे पहनने का फैसला किया और शनिवार को बतौर लेफ्टिनेंट सेना में शामिल हो गईं। ये मिशाल पेश की है जम्मू-कश्मीर में दो साल पहले शहादत देने वाले कर्नल संतोष महादिक की पत्नी स्वाति महादिक की।
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स्वाति का सेना से जुड़ना आसान नहीं था। उनके ऊपर दो बच्चों की जिम्मेदारी भी थी। उन्होंने सबसे पहले अपनी बेटी कार्तिकी (12) को देहरादून और बेटे स्वराज (7) को पंचगनी में बोर्डिंग स्कूल भेजा। इसके बाद फिजिकल फिटनेस और मेडिकल समेत सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) के पांच राउंड पास किए। स्वाति सावित्रीबाई फूले पुणे यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं। शनिवार को जब वह ओटीए से पासआउट हो रही थीं तो उनके दोनों बच्चे, सास और माता-पिता दर्शकदीर्घा में बड़े गर्व से उन्हें कर्नल महादिक का सपना पूरा करते देख रहे थे।

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'वर्दी पति का पहला प्यार थी'

Martyr wife start new lives as Army officers
स्वाति महादिक और निधि दुबे - फोटो : The Times of India

लेफ्टिनेंट बनने के बाद अपने पहले रिएक्शन में स्वाति ने कहा, सेना की वर्दी मेरे पति का पहला प्यार थी। इसे पहनकर मुझे ऐसा लगेगा कि वह मेरे साथ हैं। यही वजह थी कि मैंने सेना में शामिल होने का फैसला किया। 

39 साल के कर्नल महादिक महाराष्ट्र के रहने वाले थे। सेना की एलीट 21 पैरा स्पेशल फोर्स के अधिकारी कर्नल महादिक साल 2015 में 13 नवंबर को कुपवाड़ा के जंगलों में लश्कर-ए-ताइबा के आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। कर्नल महादिक को साल 2003 में पूर्वोत्तर में ‘ऑपरेशन राइनो’ के दौरान बहादुरी के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।

रक्षा मंत्रालय ने दी विशेष छूट

शहीद पति के अंतिम संस्कार के बाद जब स्वाति को कर्नल महादिक की वर्दी सौंपी गई तो उन्होंने इसे पहनने की इच्छा जताई। उनका कहना था कि वह अपने पति की जिम्मेदारियों को पूरा करना चाहती हैं। हालांकि स्वाति तब 36 साल की थीं और यही उनके रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट थी। सेना में शामिल होने के लिए अधिकतम उम्र सीमा 27 वर्ष है। लेकिन उनके जज्बे को देखते हुए तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने उन्हें सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) में उम्र में छूट दिए जाने की सिफारिश की। तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने इसे स्वीकार कर लिया।

नायक मुकेश दुबे की पत्नी को भी सेना में मिला कमीशन

स्वाति महादिक की तरह ही मध्य प्रदेश के सागर की रहने वाली निधि दुबे की कहानी साहस की मिसाल है। हैदराबाद में तैनात उनके पति नायक मुकेश दुबे का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उस समय निधि महज 21 साल की थीं। वह चार महीने की गर्भवती थीं। वह मध्यप्रदेश के सागर स्थित अपने मायके चली आई। वहां उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। इसके बाद में धाना स्थित आर्मी स्कूल में पढ़ाने लगी। वर्ष 2014 उन्होंने अखबार में सैनिकों के विधवाओं की भर्ती का विज्ञापन देखा। बस उसी समय सैन्य अधिकारी बनने का फैसला कर लिया। अपनी कड़ी लगन से उन्होंने एसएसबी की परीक्षा पास की। वह भी ओटीए से पासआउट होने के बाद शनिवार को लेफ्टिनेंट बन गईं। 

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