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Mars: मंगल ग्रह तय कर रहा पृथ्वी का जलवायु चक्र, इसके बिना अस्थिर हो सकता था धरती का अक्षीय झुकाव
Wed, 18 Feb 2026 05:07 AM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Wed, 18 Feb 2026 05:07 AM IST
सार
इस शोध ने एक और पुरानी धारणा को चुनौती दी है कि केवल चंद्रमा ही पृथ्वी के अक्षीय झुकाव को स्थिर रखता है। सिमुलेशन से पता चला कि मंगल का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के झुकाव (जो 21.5 से 24.5 डिग्री के बीच रहता है) को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मंगल की स्थिति सौर मंडल में ऐसी जगह है जहाँ से उसका गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी पर उसके आकार की तुलना में कहीं अधिक प्रभाव डालता है।
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मंगल ग्रह
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
करोड़ों मील दूर स्थित मंगल ग्रह (लाल ग्रह) हमारी पृथ्वी की जलवायु को संचालित करता है। अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि पृथ्वी के झुकाव और कक्षा को केवल चंद्रमा, सूर्य और विशालकाय बृहस्पति ही प्रभावित करते हैं। हालिया शोध के मुताबिक, वैज्ञानिक सिमुलेशन (सिमुलेशन स्टडी) से पता चला है कि लाल ग्रह यानी मंगल, हमारी पृथ्वी की जलवायु पर पहले से कहीं अधिक गहरा प्रभाव डालता है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि मंगल का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के झुकाव और उसकी कक्षा को प्रभावित करता है, जिससे लाखों वर्षों तक चलने वाले जलवायु चक्र निर्धारित होते हैं। दशकों से वैज्ञानिक यह मानते आए हैं कि पृथ्वी की लंबी अवधि की जलवायु मिलनकोविच चक्र से प्रभावित होती है। ये चक्र पृथ्वी की कक्षा और उसके अक्षीय झुकाव में होने वाले बेहद धीमे बदलाव हैं, जो सौर मंडल के अन्य ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण के कारण होते हैं। अब तक माना जाता था कि शुक्र (अपनी निकटता के कारण) और बृहस्पति (अपने विशाल आकार के कारण) इसके मुख्य कारक हैं।
हालांकि, मंगल की भूमिका को हमेशा कम करके आंका गया था, लेकिन इस नए शोध ने इसकी वास्तविक शक्ति को स्पष्ट कर दिया है। यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के स्टीफन केन, बर्मिंघम यूनिवर्सिटी की पाम वेरवोर्ट व यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न क्वींसलैंड के जोनाथन हॉर्न ने किया है। इस अध्ययन में मंगल के प्रभाव को गहराई से परखा गया। शोधकर्ताओं ने जब सिमुलेशन से मंगल को पूरी तरह हटा दिया, तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए।
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मंगल के बिना पूरी तरह समाप्त हो गए 24 लाख वर्ष तक की अवधि वाले जलवायु चक्र
अध्ययन के अनुसार, लगभग एक लाख वर्ष और 24 लाख वर्ष की अवधि वाले दो महत्वपूर्ण जलवायु चक्र मंगल के बिना पूरी तरह समाप्त हो गए। स्टीफन केन के अनुसार, ये चक्र मंगल के बिना टिक नहीं सकते। यदि मंगल का द्रव्यमान बढ़ाया जाए, तो ये चक्र और भी छोटे हो जाएंगे, जो यह साबित करता है कि मंगल पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र का एक अदृश्य नियंत्रक है।
पृथ्वी के झुकाव को स्थिर रखता है मंगल
इस शोध ने एक और पुरानी धारणा को चुनौती दी है कि केवल चंद्रमा ही पृथ्वी के अक्षीय झुकाव को स्थिर रखता है। सिमुलेशन से पता चला कि मंगल का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के झुकाव (जो 21.5 से 24.5 डिग्री के बीच रहता है) को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मंगल की स्थिति सौर मंडल में ऐसी जगह है जहाँ से उसका गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी पर उसके आकार की तुलना में कहीं अधिक प्रभाव डालता है।
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वर्तमान ग्लोबल वार्मिंग से संबंध
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ये मिलनकोविच चक्र लाखों वर्षों के भूगर्भीय समय पैमाने पर काम करते हैं। इनका वर्तमान मानवीय गतिविधियों के कारण हो रही ग्लोबल वार्मिंग से कोई सीधा संबंध नहीं है। ये चक्र हिमयुगों के आने और जाने के लिए जिम्मेदार होते हैं, जबकि वर्तमान जलवायु परिवर्तन की गति इसकी तुलना में अत्यंत तीव्र है।
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वैज्ञानिकों ने पाया कि मंगल का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के झुकाव और उसकी कक्षा को प्रभावित करता है, जिससे लाखों वर्षों तक चलने वाले जलवायु चक्र निर्धारित होते हैं। दशकों से वैज्ञानिक यह मानते आए हैं कि पृथ्वी की लंबी अवधि की जलवायु मिलनकोविच चक्र से प्रभावित होती है। ये चक्र पृथ्वी की कक्षा और उसके अक्षीय झुकाव में होने वाले बेहद धीमे बदलाव हैं, जो सौर मंडल के अन्य ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण के कारण होते हैं। अब तक माना जाता था कि शुक्र (अपनी निकटता के कारण) और बृहस्पति (अपने विशाल आकार के कारण) इसके मुख्य कारक हैं।
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हालांकि, मंगल की भूमिका को हमेशा कम करके आंका गया था, लेकिन इस नए शोध ने इसकी वास्तविक शक्ति को स्पष्ट कर दिया है। यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के स्टीफन केन, बर्मिंघम यूनिवर्सिटी की पाम वेरवोर्ट व यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न क्वींसलैंड के जोनाथन हॉर्न ने किया है। इस अध्ययन में मंगल के प्रभाव को गहराई से परखा गया। शोधकर्ताओं ने जब सिमुलेशन से मंगल को पूरी तरह हटा दिया, तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए।
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मंगल के बिना पूरी तरह समाप्त हो गए 24 लाख वर्ष तक की अवधि वाले जलवायु चक्र
अध्ययन के अनुसार, लगभग एक लाख वर्ष और 24 लाख वर्ष की अवधि वाले दो महत्वपूर्ण जलवायु चक्र मंगल के बिना पूरी तरह समाप्त हो गए। स्टीफन केन के अनुसार, ये चक्र मंगल के बिना टिक नहीं सकते। यदि मंगल का द्रव्यमान बढ़ाया जाए, तो ये चक्र और भी छोटे हो जाएंगे, जो यह साबित करता है कि मंगल पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र का एक अदृश्य नियंत्रक है।
पृथ्वी के झुकाव को स्थिर रखता है मंगल
इस शोध ने एक और पुरानी धारणा को चुनौती दी है कि केवल चंद्रमा ही पृथ्वी के अक्षीय झुकाव को स्थिर रखता है। सिमुलेशन से पता चला कि मंगल का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के झुकाव (जो 21.5 से 24.5 डिग्री के बीच रहता है) को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मंगल की स्थिति सौर मंडल में ऐसी जगह है जहाँ से उसका गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी पर उसके आकार की तुलना में कहीं अधिक प्रभाव डालता है।
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वर्तमान ग्लोबल वार्मिंग से संबंध
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ये मिलनकोविच चक्र लाखों वर्षों के भूगर्भीय समय पैमाने पर काम करते हैं। इनका वर्तमान मानवीय गतिविधियों के कारण हो रही ग्लोबल वार्मिंग से कोई सीधा संबंध नहीं है। ये चक्र हिमयुगों के आने और जाने के लिए जिम्मेदार होते हैं, जबकि वर्तमान जलवायु परिवर्तन की गति इसकी तुलना में अत्यंत तीव्र है।
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