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पॉक्सो से जुड़े मामलों में आरोपी को बचाने के लिए शादी का ऐसे होता है इस्तेमाल

Sun, 14 Oct 2018 08:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 14 Oct 2018 08:52 AM IST
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Marriages using by accused as a tool in Pocso cases

केरल की जिला अदालतों में बीते 5 सालों में पॉक्सो एक्ट के तहत करीब 90 मामले दर्ज हुए हैं। लेकिन आरोपियों को फिर भी सजा नहीं मिली या उनकी गलती माफ कर दी गई। केवल इसलिए क्योंकि वह पीड़िता से शादी करने को राजी हो गए। इन मामालों में ये भी देखा गया कि अपराध के वक्त पीड़िता की उम्र 15 साल थी। इनमें से 68 मामलों में अपराध के वक्त पीड़िता की उम्र 16-17 साल थी। एक स्वैच्छिक संगठन इंडीपेंडेंट थॉट ने केरल की जिला अदालतों के फैसलों पर आंकड़े पेश किए। ये आंकड़े वकील सौम्या भामुक ने केस स्टडी के तौर पर पेश किए।


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सौम्या का कहना है कि अधिकतर मामलों में ये देखा गया है कि आरोपी इसलिए बच जाते हैं क्योंकि वह केस दर्ज होने के बाद  पीड़िता से शादी करने के लिए मान जाते हैं। ऐसे मामले और भी बदतर तब होते हैं जब पीड़िता नाबालिग होती है। जो कि बाल विवाह के अंतर्गत आता है और गैरकानूनी है। वहीं कई और मामलों में जांच देरी से शुरू होती है। इसी समय सीमा में अपराधी पीड़िता के परिवार को मना लेता है और उससे शादी कर लेता है।

सौम्या का कहना है कि कई मामलों में अन्य लोगों के कहने पर पीड़िता शादी के लिए मान जाती है। वहीं एक मामलो में तो अपराधी पीड़ित लड़की का सौतेला भाई था लेकिन मामला दब जाए इसके लिए उसे उसका पति बना दिया जाता है। और उनका परिवार उन्हें अच्छी शादीशुदा जिंदगी जीने की नसीहत तक देता है। कई मामले तो ऐसे भी सामने आए हैं जिनमें शादी के बाद आरोपी पीड़िता तो छोड़ देता है। वो बस केस बंद कराने के लिए ही शादी करता है।

दिल्ली और मुंबई में सेंटर फॉर चाइल्ड राइट एंड द फोरम अगेनस्ट सेक्सुअल एक्सप्लोइटेशन ऑफ चिल्ड्रन (एफएसीएसई) ने एक अध्ययन किया। इसमें पता चला कि पॉक्सो एक्ट के तहत कई मामले जो दर्ज किए गए, उनमें पाया गया कि लड़के और लड़की के बीच सहमति से संबंध बनाए गए थे। दोनों रिलेशनशिप में थे। इस विषय पर भी विचार करने की आवश्यकता है।

साल 2012-15 के आंकड़े बताते हैं कि मुंबई और दिल्ली के कुल 386 मामलों में 92 में आरोप सिद्ध हो गए। वहीं 286 (78 फीसदी) में आरोपी को रिहाई मिल गई। दिल्ली में रिहा हुए 231 में से 72 मामलों में आरोपी की उम्र 16-18 के बीच थी। और मुंबई में 8 में से 4 मामलों में रिहा हुए आरोपी की उम्र 13-15 के बीच। 39 फीसदी मामलों में तो आरोपी पीड़ित बच्ची को जानते हैं और उनके बीच रोमांटिक रिलेशनशिप होता है। वहीं 25 फीसदी मामलों में आरोपी पड़ोसी होता है और 19 फीसदी मामलों में रिश्तेदार।

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