महाराष्ट्र में फिर भड़की मराठा आरक्षण की चिंगारी, केंद्रीय मंत्री का किया घेराव
पुणे मराठा क्रांति मोर्चा तो मराठवाड़ा में मराठा आरक्षण संघर्ष समिति के लोगों ने आंदलोन शुरू कर दिया है। साथ ही, राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार को चेतावनी दी है कि जल्द ही निर्णय नहीं हुआ तो मराठा समुदाय फिर से सड़कों पर उतरेगा...
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महाराष्ट्र में मराठा समुदाय एक बार फिर आक्रामक हो गया है। पश्चिम महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में मराठा आरक्षण की चिनगारी भड़क उठी है। गुरुवार को पुणे, कोल्हापुर और जालना आदि जिलों में मराठा समुदाय के लोग सड़क पर उतरे। कहीं, मंत्रियों का घेराव किया तो कहीं मंत्रियों का रास्ता रोका गया। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मराठा आरक्षण पर अंतरिम रोक लगाई है। इसके बाद से ही मराठा समुदाय आरक्षण को लेकर अपने तेवर दिखाने लगे हैं।
पुणे में मराठा क्रांति मोर्चा तो मराठवाड़ा में मराठा आरक्षण संघर्ष समिति के लोगों ने आंदलोन शुरू कर दिया है। साथ ही, राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार को चेतावनी दी है कि जल्द ही निर्णय नहीं हुआ तो मराठा समुदाय फिर से सड़कों पर उतरेगा। उधर, विपक्ष ने भी इस मुद्दे को हवा दे दी है। पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा सांसद नारायण राणे ने इस मामले में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मराठा आरक्षण को लेकर उद्धव ठाकरे कभी गंभीर नहीं थे।
मराठों ने केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दावने का घर घेरा
गुरुवार को मराठा संगठनों ने जालना में केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे के घर का घेराव किया। वहीं, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे का रास्ता रोका। टोपे जालना के टाउन हाल में मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस पर एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। तभी मराठा महासंघ के कई कार्यकर्ता जय भवानी, जय शिवाजी और हमें आरक्षण चाहिए का नारा लगाते हुए उनका रास्ता रोका। इसके बाद पुलिस हरकत में आ गई और मंत्री का रास्ता रोकने के आरोप में तीन गिरफ्तार लोगों के हिरासत में ले लिया। महाराष्ट्र का मराठवाड़ा 17 सितंबर को हैदराबाद के निजाम से मुक्त हुआ था। इसलिए इस दिन मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस मनाया जाता है।
आरक्षण नहीं तो भर्ती नहीं
मराठा आरक्षण पर रोक के बीच राज्य सरकार ने 12,528 बंपर पुलिस भर्तियों की घोषणा की है। शिव संग्राम के नेता विनायक मेटे ने इसको लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने गृहमंत्री अनिल देशमुख से कहा है कि जब तक आरक्षण नहीं तब तक सरकार मराठों के लिए 13 फीसदी यानि 1600 की भर्ती न करे। यानि इतनी जगह छोड़कर पुलिस भर्ती करें। इस पर देशमुख ने कहा है कि वह इस संबंध में कानूनी पहलुओं पर विचार करेंगे।
मराठा आरक्षण पर दो दिन में निर्णय- ठाकरे
इधर, मराठा आरक्षण का मामला गरमाने के साथ ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा है कि दो दिन में मराठा आरक्षण पर सरकार ठोस निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार मराठा समुदाय के साथ है और सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष जोरदार तरीके से रखेगी। इसके लिए बुधवार को 24 वकीलों की टीम भी घोषित की है।