{"_id":"609d52d58ebc3e8a5d3c92cc","slug":"maratha-reservation-center-filed-a-review-petition-in-supreme-court-against-its-5-may-judgement","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट: मराठा आरक्षण निरस्त करने के फैसले के खिलाफ केंद्र ने दायर की पुनर्विचार याचिका","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट: मराठा आरक्षण निरस्त करने के फैसले के खिलाफ केंद्र ने दायर की पुनर्विचार याचिका
Thu, 13 May 2021 09:54 PM IST
सुरेंद्र जोशी
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 13 May 2021 09:54 PM IST
सार
महाराष्ट्र सरकार से पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार की गुहार लगा दी है।
विज्ञापन
supreme court
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पांच मई को मराठा आरक्षण मामले में दिए फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। सरकार ने पांच सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले की फिर से समीक्षा करने की मांग की है, जो राज्य को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के उद्देश्य से जातियों को ओबीसी घोषित करने की शक्ति से वंचित करता है।
विज्ञापन
पुनर्विचार याचिका दायर कर केंद्र ने 102वें संविधान संशोधन अधिनियम को लेकर पांच सदस्यीय संविधान पीठ की व्याख्या से असहमति जताई है। केंद्र ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा नहीं दिए जाने पर भी आपत्ति जताई है।
विज्ञापन
जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के तीन सदस्यों (बहुमत) का मानना था कि 102वें संशोधन के बाद राज्यों के पास सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान करने का अधिकार नहीं है। वहीं दो सदस्यों की राय इससे उलट थी।
विज्ञापन
केंद्र सरकार का पक्ष रहा है कि संविधान के 102वें संशोधन से राज्य सरकार को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) की सूची बनाने का अधिकार खत्म नहीं हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने पांच मई को सुनाए अपने फैसले में मराठा आरक्षण को निरस्त करते हुए 50 फीसदी आरक्षण की सीमा लांघने को समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया था।
संविधान पीठ ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि मराठा समुदाय के लोगों को उच्च शिक्षा व नौकरियों में दिया गया आरक्षण, आरक्षण की अधिकतम सीमा (50 फीसदी) का उल्लंघन है, लिहाजा यह असंवैधानिक है।