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मंजिलें और भी हैं: घर से शुरू हुई एक पहल पूरे हरियाणा में फैल गई

Wed, 15 May 2019 05:54 AM IST
गौरव द्विवेदी देवेंद्र सूरा
देवेंद्र सूरा Published by: गौरव द्विवेदी Updated Wed, 15 May 2019 05:54 AM IST
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manzilein aur bhi hain: An initiative started from home spread throughout Haryana
देवेंद्र सूरा (फाइल फोटो)

वर्ष 2011 में जब मैं पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए चंडीगढ़ गया तो, मुझे वहां की हरियाली ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। मैं हरियाणा के सोनीपत का रहने वाला हूं। मेरे पिता रिटायर्ड फौजी हैं। बचपन से ही वह मुझे देश और अपने समाज के लिए कुछ करने को प्रेरित करते रहे हैं। मुझे चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल की नौकरी मिल गई। चंडीगढ़ से प्रेरणा लेकर मैंने पहले सोनीपत और फिर पूरे हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण को लेकर अभियान शुरू कर दिया। इसकी पहल मैंने अपने घर से की।

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गांव में रहने के कारण मुझे पेड़-पौधों के बारे में ज्ञान तो था, अपने अभियान के साथ-साथ मैं हर रोज कुछ नया सीखता रहा। जब मैंने यह काम शुरू किया, तब मेरा परिवार पूरे मन से मेरा साथ नहीं दे रहा था, क्योंकि मेरा लगभग पूरा वेतन पौधारोपण पर ही खर्च हो जाता था। लेकिन जब कई जगहों पर मेरे प्रयासों से बदलाव आने लगा, तो मेरे परिवार ने साथ देना शुरू कर दिया। शुरुआत में मैं हरियाणा में ही निजी नर्सरी से पौधे खरीदता रहा। लेकिन जब मेरा अभियान बढ़ने लगा तो मैंने दो एकड़ जमीन लीज पर ली और वहीं पर अपनी नर्सरी शुरू कर दी।
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इस नर्सरी से कोई भी मुफ्त में पौधे ले जा सकता है। नर्सरी शुरू करवाने के साथ ही मैंने बीधल गांव को गोद लिया। मैं और मेरे कुछ साथी आस-पास के गांवों में जाकर चौपाल पर लोगों के साथ बात करते हैं। हम उन्हें पर्यावरण का महत्व समझाते हैं और अपने घर, घर के बाहर या फिर खेतों पर पौधे लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। फिर गांव से ही लगभग 20-30 युवा व बच्चों की एक समिति बनाई जाती है और गांव में पौधारोपण के बाद, इस समिति को उनकी देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। यहां मैंने ग्राम पंचायत और अन्य लोगों के साथ मिलकर 8,000 से ज्यादा पेड़ लगवाए हैं।
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इस तरह के समेकित प्रयासों से अब तक मेरे अभियान में 8,000 से ज्यादा पर्यावरण मित्र जुड़े हैं और अपने-अपने इलाकों में काम कर रहे हैं। मैंने अब तक सोनीपत के आस-पास के लगभग 182 गांवों में तकरीबन डेढ़ लाख पौधे लगवाए हैं। साथ ही ढाई लाख से ज्यादा पौधे स्कूल, शादी समारोह, रेलवे स्टेशन, मंदिर आदि में जाकर बांटे हैं। मेरा एक लक्ष्य शहर में पक्षी-विहार बनाने का भी है। जहां पर पक्षियों के लिए आहार-पानी की पूरी व्यवस्था हो। इसके लिए मैंने शहर भर में 8, 000 मिट्टी के कसोरे (बर्तन) और लगभग 10, 000 लकड़ी के घोंसले बांटे हैं।

सोनीपत के सेक्टर 23 को मैंने ‘ग्रीन सेक्टर’ बनाने का संकल्प लिया है। यहां रहने वालों के सहयोग से हमने सड़क किनारे पौधे लगाए हैं। ये सभी पौधे लोगों ने अपनी बेटियों के नाम पर लगाए हैं। इसका उद्देश्य है कि सभी लोग अपने-अपने पौधों की देखभाल वैसे ही करें जैसे कि वे अपने बच्चों की करते हैं। मेरे काम में मेरे विभाग ने पूरा सहयोग दिया है। कई बार उन्होंने मेरे साथ मिलकर पौधारोपण भी किया। चंडीगढ़ पुलिस ने मुझे सम्मानित भी किया है।


मेरे इस काम को देखते हुए मुझे ड्यूटी भी इसी तरह दी जाती है, ताकि मेरे अभियान पर कोई असर न पड़े। मैं ताउम्र यह अभियान चलाना चाहता हूं। मेरा लक्ष्य हर एक गांव-शहर को हरा-भरा बनाना है। मुझे खुशी है कि घर के बाहर एक-दो पौधे लगाने की जो पहल मैंने शुरू की थी, वह आज पूरे हरियाणा में फैल चुकी है। -विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित

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