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कोरोना से बचे तो लॉकडाउन में फंसे, छावला सेंटर में अटके विदेशी ITBP से सीख रहे 'जीने की कला'

Sat, 25 Apr 2020 09:11 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 25 Apr 2020 09:11 PM IST
सार

  • अधिकांश लोगों की क्वारंटीन अवधि 14 दिन की
  • मार्च में आए लोगों की अवधि हुई एक माह से ज्यादा की
  • इटली से 15 मार्च को 129 लोग और 22 मार्च को 127 लोग पहुंचे

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Many of the foreigners returned from italy stuck at itbp chhawla quarantine camp due to lockdown
ITBP Isolation centre - फोटो : AmarUjala

विस्तार

कोरोना संक्रमण फैलने के बाद विदेश से लौटे भारतीयों को एयरपोर्ट से सीधे छावला के आईटीबीपी परिसर में स्थित सबसे बड़े क्वारंटीन सेंटर ले जाया गया था। वहां के डॉक्टरों और आईटीबीपी की जीवन शैली ने इन लोगों को कोरोना से तो बचा लिया, मगर वे लॉकडाउन में फंस गए।
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पहले दो-तीन बैच के पांच सौ से अधिक लोग तो 14 दिन की क्वारंटीन अवधि पूरी करने के बाद अपने घर चले गए। मार्च में इटली व दूसरे देशों से आए लोगों को अब क्वारंटीन सेंटर में रहते हुए एक माह से ज्यादा का वक्त बीत चुका है।

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सेंटर में आए भारतीयों के लिए तो आईटीबीपी ने विभिन्न राज्यों के रेजिडेंट कमिश्नरों के साथ बातचीत कर बहुत से लोगों को उनके घर भिजवाया है। फिर भी अभी वहां करीब 129 लोग बचे हैं। इसमें 80 फीसदी से अधिक इटली के हैं।
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जितने भी इस समय छावला केंद्र में अटके हैं, वे अब आईटीबीपी से मुसीबत में जीने की कला सीख कर वक्त गुजार रहे हैं।
 

आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडे के अनुसार, वैसे तो अधिकांश लोगों की क्वारंटीन अवधि 14 दिन की रहती है। मार्च में आए लोगों की यह अवधि एक माह से ज्यादा की हो गई है। इटली से 15 मार्च को 129 लोग और 22 मार्च को 127 लोग आए थे।


उसके बाद अफगानिस्तान से लोगों का एक समूह आया था, जो आसपास के राज्यों में रहने वाले थे, आईटीबीपी ने उन्हें घर भिजवाने के लिए खूब मशक्कत की है। अब लॉकडाउन चल रहा है, ट्रांसपोर्ट बंद है और राज्यों में बिना पास के एंट्री भी नहीं हो रही।

ऐसे में इन लोगों के परिजनों को दिल्ली आने में ही बड़ी परेशानी हो रही थी। आईटीबीपी ने दिल्ली में मौजूद विभिन्न राज्यों के रेजिडेंट कमिश्नरों से मदद लेकर इन लोगों के पास तैयार कराए।

उसी पास के आधार पर इन लोगों की गाड़ियां क्वारंटीन सेंटर तक पहुंच सकी हैं। साथ ही, दूसरे केंद्रों पर रह रहे विदेशी लोगों को उनके मुल्क रवाना किया जा रहा  है। बांग्लादेश के लोगों को ढाका भेजा गया है। अमेरिका एवं दूसरे देशों के एनआरआई लोगों को भी ले जाने का काम चल रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रक्रिया शुरू की है।

आईटीबीपी ने सिखा दिया मुश्किल वक्त में जीना... 

क्वारंटीन सेंटर में जो भारतीय लोग बचे हैं, उनमें से ज्यादातर केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश व दक्षिण भारत के दूसरे राज्यों से हैं, इन्हें भी घर तक भिजवाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि बिना रेल या हवाई सेवा के इनका घर पहुंचना मुश्किल है।

129 लोगों को आईटीबीपी के प्रशिक्षक सुबह-शाम योग कराते हैं। जो खेलना चाहते हैं, उन्हें इंडोर गेम की इजाजत दी जाती है। सुबह-शाम समय पर उठना और सुरक्षा बलों का भोजना करना, अब इनकी दिनचर्या में शामिल हो गया है।

समय-समय पर इनकी काउंसलिंग भी होती है। आईटीबीपी किन मुश्किल परिस्थितियों में ड्यूटी देती है, इन्हें उसके बारे में बताया जाता है। दिन में जब भी इन्हें कोई चर्चा करनी होती है, तो आईटीबीपी के विशेषज्ञ इनके पास आ जाते हैं।

सेंटर पर फरवरी से कार्यरत डॉ. राजकुमार बताते हैं कि अब ये लोग आईटीबीपी की जीवन शैली में रहने लगे हैं। किसी को कोई दिक्कत नहीं है। सबके दो-दो टेस्ट हो चुके हैं।



सभी की रिपोर्ट नेगेटिव रही है। हालांकि, अभी भी इनकी नियमित जांच होती है। अच्छी बात ये है कि इन लोगों को आईटीबीपी के डाइट चार्ट के मुताबिक जो भोजन मिलता है, उससे इनका शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गया है।

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