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पाकिस्तान 'पढ़ाई' करने गए कश्मीरी छात्रों को लेकर बड़ा खुलासा, जुड़े हवाला जैसे धंधों से

Wed, 02 Oct 2019 08:16 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 02 Oct 2019 08:16 PM IST
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Many of Kashmiri Indian students are Studying in Pakistani Universities, working with terror groups
प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों से बात करते यासीन मलिक - फोटो : Amar Ujala

जम्मू कश्मीर, खासतौर पर घाटी के कई इलाकों से पाकिस्तान में शिक्षा ग्रहण करने गए छात्र अब भारतीय जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हुर्रियत नेताओं, अलगाववादियों और कश्मीर में कथित तौर से सामाजिक संगठनों के नाम पर आतंकियों के मददगार बने बैठे व्यक्तियों ने बहुत से युवकों को छात्र बनाकर पाकिस्तान भेजा है। वहां जाकर ये युवक पाकिस्तान के आतंकी संगठनों और कश्मीर में बतौर स्लीपर सेल काम कर रहे लोगों के बीच कड़ी बन बैठे हैं।

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पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर मुखौटा कंपनियां

जांच में यह भी पता चला है कि ये युवक बहुत चतुराई के साथ हवाला चैनलों के जरिए मिनटों में करोड़ों रुपये इधर से उधर कर देते हैं। दुबई और खाड़ी के कई देशों के साथ इनके लिंक हैं। आतंकियों तक आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए इन्होंने कश्मीर और पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर मुखौटा कंपनियां पंजीकृत कराई हैं। बता दें कि एनआईए ने अभी तक ऐसी तीन चार्जशीट पेश की हैं, जिनमें आतंकियों की मदद के लिए कश्मीरी संगठनों, हुर्रियत नेताओं और अलगाववादियों का नाम सामने आया है।

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जांच एजेंसी ने बड़े साफ शब्दों में अदालत को यह बात भी कह दी है कि आतंकियों को मदद पहुंचाने वाले इस धंधे में दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग भी शामिल है। पाकिस्तानी उच्चायोग की मदद से कश्मीर के युवाओं को पाकिस्तानी विश्वविद्यालयों में दाखिला दिलाया जाता है। वीजा से लेकर उनकी दूसरी कई तरह की मदद भी उच्चायोग करता है।

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पाक में कश्मीरी युवक देखते हैं स्लीपर सेल का काम

एनआईए जांच में पता चला है कि कश्मीर में मौजूद स्लीपर सेल पाकिस्तानी हैंडलर्स के निर्देशों पर बहुत व्यवस्थित तरीके से काम करते हैं। पाकिस्तान में मौजूद कश्मीरी युवक स्लीपर सेल का कामकाज देखते हैं। इन्होंने कश्मीर में कई स्तरों पर अपना संगठन बना रखा है। ग्रामीण इलाकों और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग संगठन हैं, जबकि छोटे-छोटे ब्लॉक एवं जिला स्तर पर भी इकाइयां गठित की गई हैं। स्लीपर सेल को किस इलाके के युवा गुमराह करने हैं, उन्हें यह सब निर्देश पाकिस्तान से ही मिलते हैं। वहां पर यह काम कश्मीरी युवकों को सौंपा गया है।


वजह, वे आसानी से कश्मीरी युवकों के साथ बातचीत कर उन्हें अपने साथ मिला लेते हैं। सोशल मीडिया पर कब और कौन सी सूचना वायरल करनी है, ऐसे सभी आदेश पाकिस्तान में मौजूद कश्मीरी छात्रों की तरफ से दिए जाते हैं। पत्थरबाजी की घटनाओं को अंजाम देना और आतंकवादियों से जुड़ने के लिए युवाओं को प्रेरित करने के दूसरे साधनों का इस्तेमाल, यह आदेश भी सीमा पार से आता है।

आतंकियों के नेटवर्क का पता लगा

एक अधिकारी के अनुसार, कश्मीर में अब काफी हद तक आतंकियों के नेटवर्क का पता लगा लिया गया है। कश्मीर के किस हिस्से से कितने युवक पढ़ाई के नाम पर पाकिस्तान भेजे गए हैं, अब यह जांच की जा रही है। देश की बाहरी खुफिया एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पाकिस्तान के विश्चविद्यालयों में गए कश्मीरी छात्र वहां क्या कर रहे हैं। वे किन संगठनों के साथ जुड़े हैं। कश्मीर में किस संगठन के साथ उनकी बातचीत होती है। उन्हें किस संगठन की मदद से पाकिस्तान भेजा गया, यह सब जानकारी जुटाई जा रही है।

उग्रवादियों एवं उनके परिवारों का समर्थन करने और उनके मारे जाने की स्थिति में परिजनों तक धन पहुंचाने के लिए हुर्रियत और अलगाववादियों के जो समूह काम कर रहे हैं, जल्द ही यह खुलासा हो जाएगा। इन संगठनों की कितनी शैल कंपनियां हैं और कश्मीर में कौन से सरकारी विभागों ने इनकी मदद की है, ये सब जानकारी भी शीघ्र ही सार्वजनिक होंगी।



हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह, यासीन मलिक, आसिया अंद्राबी और मसरत आलम एवं दूसरे नेताओं से हुई पूछताछ में कई सनसनीखेज जानकारियां सामने आई हैं। कश्मीर के युवाओं को पाकिस्तान कौन भिजवा रहा है, इस बाबत कश्मीर के हुर्रियत एवं अलगावादियों नेताओं के चेहरे से जल्द नकाब हटने वाला है।

 

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