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Manual Scavenging: 16 श्रमिकों की मौत के बाद परिजनों को मुआवजा नहीं, नाराज अदालत ने गुजरात सरकार से जवाब मांगा
Wed, 03 Jan 2024 06:01 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 03 Jan 2024 06:01 PM IST
सार
हाथ से मैला ढोने वाले 16 मजदूरों की मौत मामले में परिजनों को मुआवजा नहीं मिला है। सरकार के ढुलमुल रवैये पर गुजरात हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है। सरकार को बताना होगा कि श्रमिकों के परिजनों को मुआवजा क्यों नहीं दिया गया।
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गुजरात हाईकोर्ट
- फोटो : social media
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विस्तार
16 श्रमिकों की मौत के बाद 2013 के कानून के तहत परिजनों को मुआवजा न देने पर उच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार की खिंचाई की। अदालत में दो जजों की खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए 20 साल की अवधि में मारे गए 16 मजदूरों के परिजनों को मुआवजा न दिए जाने का कारण पूछा है। मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध पी मायी की पीठ ने सरकार की तरफ से बरती गई ढिलाई पर नाराजगी प्रकट की।
गौरतलब है कि गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में 1993 से 2014 के बीच मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने) के दौरान 16 मजदूरों की मौत हुई थी। बुधवार को मुआवजे का भुगतान करने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने गुजरात सरकार को शपथ पत्र दायर कर कारण बताने का निर्देश दिया।
अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि करीब 10 साल पहले बन चुके कानून- मैनुअल स्कैवेंजिंग विरोधी कानून, 2013 को पूरे प्रदेश में प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार से यह भी सवाल किया कि क्या राज्य सरकार हाथ से मैला ढोने की प्रथा को जड़ से खत्म करने की स्थिति में है या अभी भी सफाईकर्मियों की मदद ली जा रही है।
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अदालत अहमदाबाद स्थित गैर सरकारी संगठन (एनजीओ)- मानव गरिमा की तरफ से दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी। एनजीओ की तरफ से मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोजगार पर प्रतिबंध की मांग की गई है। साथ ही श्रमिकों के पुनर्वास के लिए 2013 में बनाए गए कानून को पूरी तरह लागू करने की मांग भी की गई।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, 16 मैला ढोने वाले श्रमिकों की मौत के बाद परिवार के सदस्यों को अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है। इस पर सरकार की खिंचाई करते हुए अदालत ने कहा, जब कुछ लोगों को भुगतान किया गया है तो दूसरों को लाभ से वंचित नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट ने शहरी आवास विभाग के प्रमुख सचिव से कहा कि भुगतान न करने के कारणों को रिकॉर्ड पर लाया जाए। सचिव को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने भावनगर में मैनुअल स्कैवेंजिंग की हालिया घटना का भी जिक्र किया। इस मामले में केंद्रीय नमक और समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान (CSMCRI) के परिसर में एक सफाई कर्मचारी की दम घुटने के कारण मौत हो गई थी। 10 नवंबर, 2023 को हुई मौत के मामले में सरकार ने बताया था कि श्रमिक सीवेज टैंक में घुसकर सफाई कर रहा था। इस हादसे में एक अन्य मजदूर को गंभीर चोटें भी आईं थीं।
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गौरतलब है कि गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में 1993 से 2014 के बीच मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने) के दौरान 16 मजदूरों की मौत हुई थी। बुधवार को मुआवजे का भुगतान करने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने गुजरात सरकार को शपथ पत्र दायर कर कारण बताने का निर्देश दिया।
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अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि करीब 10 साल पहले बन चुके कानून- मैनुअल स्कैवेंजिंग विरोधी कानून, 2013 को पूरे प्रदेश में प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार से यह भी सवाल किया कि क्या राज्य सरकार हाथ से मैला ढोने की प्रथा को जड़ से खत्म करने की स्थिति में है या अभी भी सफाईकर्मियों की मदद ली जा रही है।
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अदालत अहमदाबाद स्थित गैर सरकारी संगठन (एनजीओ)- मानव गरिमा की तरफ से दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी। एनजीओ की तरफ से मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोजगार पर प्रतिबंध की मांग की गई है। साथ ही श्रमिकों के पुनर्वास के लिए 2013 में बनाए गए कानून को पूरी तरह लागू करने की मांग भी की गई।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, 16 मैला ढोने वाले श्रमिकों की मौत के बाद परिवार के सदस्यों को अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है। इस पर सरकार की खिंचाई करते हुए अदालत ने कहा, जब कुछ लोगों को भुगतान किया गया है तो दूसरों को लाभ से वंचित नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट ने शहरी आवास विभाग के प्रमुख सचिव से कहा कि भुगतान न करने के कारणों को रिकॉर्ड पर लाया जाए। सचिव को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने भावनगर में मैनुअल स्कैवेंजिंग की हालिया घटना का भी जिक्र किया। इस मामले में केंद्रीय नमक और समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान (CSMCRI) के परिसर में एक सफाई कर्मचारी की दम घुटने के कारण मौत हो गई थी। 10 नवंबर, 2023 को हुई मौत के मामले में सरकार ने बताया था कि श्रमिक सीवेज टैंक में घुसकर सफाई कर रहा था। इस हादसे में एक अन्य मजदूर को गंभीर चोटें भी आईं थीं।