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Supreme Court: मैला ढोने की प्रथा पर रोक के लिए क्या कदम उठाए? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Sat, 25 Feb 2023 10:42 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 25 Feb 2023 10:42 PM IST
सार

याचिका में मांग की गई है कि सूखे शौचालय एक्ट, 1993 और मैला ढोने की प्रथा को खत्म करने, मैला ढोने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए कोर्ट से निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

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Manual scavengers issue supreme court ask centre implementation law 2013 rehabilitation dry latrines
मैला ढोती महिला - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से पूछा कि उसने मैला ढोने की प्रथा को रोकने, 2013 के कानून को लागू करने और मैला ढोने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए क्या कदम उठाए हैं? सर्वोच्च अदालत ने सूखे शौचालयों को खत्म करने और कितने सूखे शौचालय अभी चल रहे हैं? कैंट बोर्ड और रेलवे में सफाई कर्मचारियों की स्थितियों के बारे में राज्यवार सूचना भी मांगी है। 

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जस्टिस एसआर भट्ट और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिए। बता दें कि याचिका में मांग की गई है कि सूखे शौचालय एक्ट, 1993 और मैला ढोने की प्रथा को खत्म करने, मैला ढोने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए कोर्ट से निर्देश जारी करने की मांग की गई है। बेंच ने कहा कि कोर्ट पहले भी मैला ढोने को लेकर निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने ये भी पूछा है कि राज्यों में सीवेज की सफाई के लिए नगर पालिकाओं द्वारा कौन से उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं?
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बेंच ने सीवेज सफाई के दौरान होने वाली मौतों को रियल टाइम ट्रैक करने पर भी जानकारी मांगी है। साथ ही यह भी पूछा है कि पीड़ितों को संबंधित अथॉरिटीज द्वारा मुआवजे और पुनर्वास की क्या व्यवस्था की जाती है। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार 6 हफ्तों में हलफनामा दाखिल करे। कोर्ट ने वकील के परमेश्वर को इस मामले में अमेकस क्यूरी नियुक्त किया है और अब कोर्ट इस मामले पर 12 अप्रैल को सुनवाई करेगा। 

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