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Manoj Jarange: आरक्षण की मांग के दौरान लाठीचार्ज पर मनोज जरांगे ने जताई नाराजगी, बोले- आंदोलन पर काला धब्बा था

Wed, 31 Jan 2024 07:00 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: आदर्श शर्मा Updated Wed, 31 Jan 2024 07:00 PM IST
सार

मराठा आरक्षण की मांग के दौरान सुर्खियों में आने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने कहा कि आंदोलन के दौरान अंतरवाली सरती गांव में समर्थकों पर लाठीचार्ज एक काला धब्बा है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समझ नहीं आया कि पुलिस को लाठीचार्ज करने की नौबत क्यों आई थी, उनके पास ठोस जवाब नहीं है। 

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Manoj Jarange: Lathicharge on protesters at Antarwali Sarati was blot on agitation
मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान संबोधित करते मनोज जरांगे (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

पुणे यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (पीयूडब्ल्यूजे) के कार्यक्रम में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शिरकत की। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पिछले साल के सितंबर माह में अंतरवाली सरती गांव में मराठा आरक्षण की मांग कर रहे समर्थकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जो इस आंदोलन पर एक काला धब्बा था। संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि अगर शिंदे सरकार ने मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने के लिए अधिसूचना जारी नहीं की होती, तो मैं निश्चित रूप से 10 फरवरी को नए सिरे से भूख हड़ताल करता।  
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हिंसा से आरक्षण लेने के हम कभी पक्षधर नहीं रहे- जरांगे
सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने कहा कि एक सितंबर 2023 को जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव में पुलिस की लाठीचार्ज ने आंदोलन को नया मोड़ दिया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। इस घटना ने आंदोलन को अधिक बड़ा बना दिया। हालांकि हम इसी घटना को निर्णायक मोड़ नहीं कह सकते हैं, क्योंकि हम हिंसा से किसी भी कीमत पर आरक्षण नहीं चाहते थे। उन्होंने घटना का जिक्र करते हुए कहा कि हम ही लोग जानते हैं कि हम उस दौरान कैसी-कैसी शारीरिक यातनाएं झेली। आंदोलन में शामिल माताओं और बहनों पर हमला किया गया, जबकि हम शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे। 
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पता नहीं, किस वजह से लाठीचार्ज किया था- जरांगे
लाठीचार्ज से कुछ दिन पहले पुलिस अधीक्षक से बातचीत का जिक्र करते हुए मनोज जरांगे ने कहा कि उन्होंने धरना स्थल का दौरा किया था, उस दौरान उन्होंने जरांगे की सराहना की थी कि जरांगे ने दो लाख से अधिक समर्थकों को घर लौटने का आग्रह किया था। मुझे समझ नहीं आता कि किस बात पर पुलिस ने लाठीचार्ज की। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान कई निर्वाचित प्रतिनिधियों के घरों पर हमले किए गए, इस पर बोलते हुए जरांगे ने कहा कि मैंने पहले ही कहा कि हम हिंसा के खिलाफ हैं, जिन लोगों ने आंदोलन के दौरान इस तरह की चीजें की, वे असल में आंदोलनकारी ही नहीं थे। 
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छगन भुजबल के बयान पर जरांगे ने कहा- यह सच नहीं
राज्य के मौजूदा मंत्री छगन भुजबल की टिप्पणी पर मनोज जरांगे ने कार्यक्रम में कहा कि ओबीसी कोटा में पिछले दरवाजे से मराठाओं को प्रवेश दिया गया, इस बयान में कोई सच्चाई नहीं है। मराठों को कुनबी जाति से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया है, जिसका अब उन्हें लाभ मिलेगा। जरांगे ने कहा कि कोई भी ऐसा कैसे कह सकता है कि यह पिछले दरवाजे से घुसपैठ थी। यह हमारा अधिकार था।
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